अनुसूचित जनजाति संगठन

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मेरे साथियों आप इसके बारे में बिचार करे की ये सही कैसे होगा ?
12/12/2021

मेरे साथियों आप इसके बारे में बिचार करे की ये सही कैसे होगा ?

01/12/2021
24/11/2020

*आर्टिकल 13 क्या है?*
आर्टिकल 13 के अनुसार साविधान लागू होने की दिनांक से पहले जीतने भी धार्मिक ग्रन्थ,, विधि कानून जो विषमता पर आधारित थे उन्हें **शून्य घोषित किया जाता है।।*
*व्याख्या -* इस कानून के अनुसार बाबा साहब ने सिर्फ एक लाइन में ढाई हजार सालों की उस व्यवस्था और उस कानून कि किताबों को शून्य घोषित कर दिया जो इंसानों को गुलाम बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।। *जैसे* - सविधान लागू होने से पहले भारत में मनुस्मृति का कानून लागू था। मनुस्मृति के अनुसार भारत के शूद्र व अति शूद्र और महिलाओं को शिक्षा का अधिकार, संपत्ति का अधिकार नहीं था।। इसके अलावा मनुस्मृति के कानून के अनुसार शुद्र वर्ण को सिर्फ ब्राह्मणों की निस्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता था और अति शूद्र लोगों को पानी पीने तक का अधिकार नहीं था। यह विषमता वादी कानून इतनी कठोरता से लागू था जिसे पढ़कर बाबा साहब का हृदय कांप उठा था,, बाबा साहब ने इस मनुस्मृति के कानून का अध्ययन किया तो पाया कि भारत की महिलाएं दोहरी गुलाम है ,उन्हें तो सिर्फ इस्तेमाल की वस्तु ही समझा जाता था,, इसके अलावा सती प्रथा, बाल विवाह,, बेमेल विवाह,, वैधन्य जीवन,, मुंडन प्रथा आदि क्रूर प्रथाएं लागू थी।। यह प्रथा इसलिए लागू की गई ताकि ब्राह्मणों द्वारा निर्मित जाति व्यवस्था मजबूत बनी रहे और शूद्र व अति शूद्र लोगों की गुलामी मजबूत बनी रहे,, 19वीं सदी में ज्योतिराव फुले, सावित्री बाई फुले, विलियम बैटिंग, लार्ड मैकाले आदि विद्वानों ने अपने अपने स्तर पर बहुत कोशिश की इस व्यवस्था को खतम करने की,, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने अपनी विद्वता के दम पर *25 दिसंबर 1927 को इस मनुस्मृति नामक विषमता वादी जहरीले ग्रंथ को आग लगा दी* और अछूत लोगों को महाड में पानी पीने का अधिकार दिलवाया,, इसके बाद बाबा साहब ने पूरे भारत में घूम घूम कर साइमन कमीशन को मनुस्मृति से प्रभावित शूद्र व अति शूद्र लोगों की वास्तविक स्थिति का परिचय करवाया। 1931-32 में बाबा साहब ने इन 90% लोगों को वोट का अधिकार दिलवाया,, सबके लिए प्रतिनिधित्व का अधिकार,, विधिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व और शिक्षा का दरवाजा राष्ट्रीय स्तर पर सबके लिए खुलवाया,, जब संविधान लिखने की बात आई बाबा साहब ने ब्राह्मणवादी तमाम शक्तियां कानून और धर्म ग्रंथ को, जो इंसान को इंसान नहीं मानते थे,, महज एक लाइन में घोषित कर दिया। इसी सविधान ने बाबा साहब ने एससी, एस टी, ओबीसी और इनसे धर्म परिवर्तित माइनॉरिटी के लिए 69 आर्टिकल लिखकर इन्हें अलग अलग क्षेत्र में कुछ विशेषाधिकार दिए। इन्हीं 69 आर्टिकल की वजह से हमें मिले अधिकार ही इन ब्राह्मणवादी मनुवादी लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहे है और इन्हें खत्म करवाने के लिए रात दिन प्रोपेगंडा और धर्म, भ्रम,पाखंड अंधविश्वास,, साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल के रहे हैं और संसदीय बहुमत का गलत इस्तेमाल करते हैं। इसलिए ये लोग भारत में भाईचारा और एकता नहीं चाहते क्योंकि भाईचारा और एकता होने की वजह से इनकी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और हमारी व्यवस्था लागू हो जाएगी।
**आर्टिकल 14 क्या है?*
आर्टिकल 14 के अनुसार ऐसा कोई भी कानून फिर से लागू नहीं होगा और ना ही बनेगा जो इंसानों के साथ विषमता वादी व्यवहार करें और उनको बद से बदतर जिंदगी जीने के लिए मजबूर करें,, अर्थात भारत के सब नागरिक को समान मानते हुए ही विधि या कानून लागू या बनाए जाए,,
*व्याख्या* - भारत की संसद में चाहे किसी भी पार्टी का बहुमत हो,, तो इस बहुमत के आधार पर ऐसा कोई कानून नहीं बनाया जाएगा जो पूर्व में मौजूद व्यवस्था को मजबूत बनाए और एक कम्यूनिटी को इस कानून के दम पर तानाशाही करने के लिए सरक्षण प्रदान करता हो,, इसलिए आर्टिकल 14 सब भारतीयों के लिए एक समान विधि सहिंता उपलब्ध करवाता है और किसी भी विषमता वादी कानून बनाने के लिए रोकता है,, चाहे संसद में कितना भी बहुमत क्यों ना हो।।
*प्लीज़ इस ज्ञान से भरी पोस्ट को कम से कम दो बार पढ़ कर अपने परिवार रिश्तेदार सगे सम्बन्धी को जरूर भेजें और ज्यादा से ज्यादा वायरल करें* ।

परम पूज्य बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी अमर रहे अमर रहे अमर रहे

जय सेवा जय आदिवासी जय भीम जय मूलनिवासी 🙏🙏🙏
🙏🙏🙏 🙏
🌾🌱🌷🌿🌾🌷🌿🌱

सूरमा मे सिविर की तसवीर
23/11/2020

सूरमा मे सिविर की तसवीर

28/10/2020

*जीवन चारि दिवस का मेला रे ।*
*बांभन झूठा , वेद भी झूठा , झूठा ब्रह्म अकेला रे ।*
*मंदिर भीतर मूरति बैठी , पूजति बाहर चेला रे ।*
*लड्डू भोग चढावति जनता , मूरति के ढिंग केला रे ।*
*पत्थर मूरति कछु न खाती , खाते बांभन चेला रे ।*
*जनता लूटति बांभन सारे , प्रभु जी देति न धेला रे ।*
*पुन्य पाप या पुनर्जन्म का , बांभन दीन्हा खेला रे ।*
*स्वर्ग नरक बैकुंठ पधारो , गुरु शिष्य या चेला रे ।*
*जितना दान देव गे जैसा , वैसा निकरै तेला रे ।*
*बांभन जाति सभी बहकावे , जन्ह तंह मचै बबेला रे ।*
*छोड़ि के बांभन आ संग मेरे , कह विद्रोहि अकेला रे ।*
चित्तौड़ के कुम्भ श्याम के मंदिर में रविदास जी ने यह गीत पद गाया था , जिसका विस्तार से अर्थ है कि ब्राह्मणी लोग भारतीय बहुजनों को पाखण्ड के नाम पर खूब लूटते थे । उन्होंने लोगों को लूटने के लिए तरह तरह के पाखण्ड फैलाये हुए थे । संत शिरोमणि रविदास जी ने उनके पाखंडों का खंडन अपने इस गीत से किया था । उन्होंने कहा था कि मनुष्य का जीवन एक बुलबुले की तरह है । ब्राह्मणी लोग झूठे हैं , उनके वेद भी झूठे हैं और उनका ब्रह्मा भी झूठा है , जो मनुष्य की आत्मा को अजर अमर बताकर ठगता है । ब्राह्मण एक मूर्ति को अंदर बंद करके पटक देता है और उस मूर्ति की पूजा के नाम पर बाहर बैठकर लोगों को ठगता है । जनता तरह तरह की कीमती वस्तु लाकर उस भगवान के लिए भेंट करती है , लेकिन पुजारी उन वस्तुओं में से एक केला मूर्ति के पास रख देता है और शेष सभी कीमती सामान को अपने पास रख लेता है । पत्थर की मूर्ति जब उस केले तक नही खा पाती है , तो अन्य वस्तुओं को कैसे खा पाएगी । उस पत्थर की मूर्ति के नाम पर सभी कीमती सामान को ब्राह्मण चट कर जाते हैं । इस प्रकार ब्राह्मण भारत की सारी जनता को लूटते हैं । लेकिन जनता को उसका कोई भी प्रतिफल नही मिलता है । ब्राह्मण अपने इस खेल को मजबूती देने के लिए पुण्य , पाप , पुनर्जन्म का पाखण्ड रचता है । दान के आधार पर स्वर्ग , नरक , बैकुण्ड की कल्पना उनके द्वारा की जाती है । इस प्रकार ब्राह्मण लोग सभी को मूर्ख बनाते हैं । जहां पर भी एक ब्राह्मण निवास करता है , वह क्षेत्र उसी प्रकार गंदा हो जाता है , जिस प्रकार एक मछली की उपस्थिति से समुद्र गंदा हो जाता है । इसलिए ब्राह्मण के पास निवास नही करें । क्योंकि जिस गांव , कस्बे या शहर में ब्राह्मण निवास करता है , उस गांव , कस्बे या शहर का निवास जाति और धर्मवाद के आधार पर होता है । रविदास जी ने कहा था कि ब्राह्मण को अपने पास बसने से वर्जित करें और मेरे सम्यक मार्ग का अनुसरण करें । तभी इस देश की उन्नति शिरोधार्य होगी । कहाँ ब्राह्मणवादी यह शिक्षा कि वेद स्वर्ग का द्वार खोलते हैं और कहाँ रैदास जी की यह चेतावनी कि जो वेदों पर चलेगा , वह नरक में जायेगा ।

11/10/2020

*चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है ये माता गुफाओं पहाडों, मंदिरों में ही क्यों बुलाती है*

*युनिवर्सिटी, कालेजों, स्कूलों में क्यों नहीं बुलाती है*

सालभर मे केवल नाै दिन माता आती है और बाकी दिन
जब महिलाओ का अपहरण करके बलात्कार किया जाता है जब ओ मां मां बुलाती है तब मां नही आती।

जब कई पुरूष मिलकर महिलाओ का गैंगरेप करते है तब माता नही आतीं।

जब महिलाओ काे दहेज के नाम जिन्दा जलाया जाता है तब माता नही आती।

जब दलित महिला काे डायन कहकर दाैड़ाकर मारते है तब माता नही आती।
जब छोटी छोटी मासूम बच्चीयों के साथ बलात्कार होता है तब माता नहीं आतीं।

माता नवरात्र मे आती है चढ़ावा लेती है और निकल जाती है भक्त चिल्लाते रह जाते है।

इतनी माता हाेने के बावजूद महिलाओ पर इतना अत्याचार क्याें।
9 दिन भूखे रहो। बनिये से सामान खरीदो और ब्राम्हण को दे आओ।
*नवरात्रि*
*एक मानसिक गुलामी*।
🙏🙏🙏🙏🙏
सोचिये

We thinks
11/10/2020

We thinks

24/09/2020

*आर्टिकल 13 क्या है?*
आर्टिकल 13 के अनुसार साविधान लागू होने की दिनांक से पहले जीतने भी धार्मिक ग्रन्थ,, विधि कानून जो विषमता पर आधारित थे उन्हें शून्य घोषित किया जाता है।।*
*व्याख्या -* इस कानून के अनुसार बाबा साहब ने सिर्फ एक लाइन में ढाई हजार सालों की उस व्यवस्था और उस कानून कि किताबों को शून्य घोषित कर दिया जो इंसानों को गुलाम बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।। *जैसे* - सविधान लागू होने से पहले भारत में मनुस्मृति का कानून लागू था। मनुस्मृति के अनुसार भारत के शूद्र व अति शूद्र और महिलाओं को शिक्षा का अधिकार, संपत्ति का अधिकार नहीं था।। इसके अलावा मनुस्मृति के कानून के अनुसार शुद्र वर्ण को सिर्फ ब्राह्मणों की निस्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता था और अति शूद्र लोगों को पानी पीने तक का अधिकार नहीं था। यह विषमता वादी कानून इतनी कठोरता से लागू था जिसे पढ़कर बाबा साहब का हृदय कांप उठा था,, बाबा साहब ने इस मनुस्मृति के कानून का अध्ययन किया तो पाया कि भारत की महिलाएं दोहरी गुलाम है ,उन्हें तो सिर्फ इस्तेमाल की वस्तु ही समझा जाता था,, इसके अलावा सती प्रथा, बाल विवाह,, बेमेल विवाह,, वैधन्य जीवन,, मुंडन प्रथा आदि क्रूर प्रथाएं लागू थी।। यह प्रथा इसलिए लागू की गई ताकि ब्राह्मणों द्वारा निर्मित जाति व्यवस्था मजबूत बनी रहे और शूद्र व अति शूद्र लोगों की गुलामी मजबूत बनी रहे,, 19वीं सदी में ज्योतिराव फुले, सावित्री बाई फुले, विलियम बैटिंग, लार्ड मैकाले आदि विद्वानों ने अपने अपने स्तर पर बहुत कोशिश की इस व्यवस्था को खतम करने की,, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने अपनी विद्वता के दम पर *25 दिसंबर 1927 को इस मनुस्मृति नामक विषमता वादी जहरीले ग्रंथ को आग लगा दी* और अछूत लोगों को महाड में पानी पीने का अधिकार दिलवाया,, इसके बाद बाबा साहब ने पूरे भारत में घूम घूम कर साइमन कमीशन को मनुस्मृति से प्रभावित शूद्र व अति शूद्र लोगों की वास्तविक स्थिति का परिचय करवाया। 1931-32 में बाबा साहब ने इन 90% लोगों को वोट का अधिकार दिलवाया,, सबके लिए प्रतिनिधित्व का अधिकार,, विधिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व और शिक्षा का दरवाजा राष्ट्रीय स्तर पर सबके लिए खुलवाया,, जब संविधान लिखने की बात आई बाबा साहब ने ब्राह्मणवादी तमाम शक्तियां कानून और धर्म ग्रंथ को, जो इंसान को इंसान नहीं मानते थे,, महज एक लाइन में घोषित कर दिया। इसी सविधान ने बाबा साहब ने एससी, एस टी, ओबीसी और इनसे धर्म परिवर्तित माइनॉरिटी के लिए 69 आर्टिकल लिखकर इन्हें अलग अलग क्षेत्र में कुछ विशेषाधिकार दिए। इन्हीं 69 आर्टिकल की वजह से हमें मिले अधिकार ही इन ब्राह्मणवादी मनुवादी लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहे है और इन्हें खत्म करवाने के लिए रात दिन प्रोपेगंडा और धर्म, भ्रम,पाखंड अंधविश्वास,, साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल के रहे हैं और संसदीय बहुमत का गलत इस्तेमाल करते हैं। इसलिए ये लोग भारत में भाईचारा और एकता नहीं चाहते क्योंकि भाईचारा और एकता होने की वजह से इनकी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और हमारी व्यवस्था लागू हो जाएगी।
आर्टिकल 14 क्या है?*
आर्टिकल 14 के अनुसार ऐसा कोई भी कानून फिर से लागू नहीं होगा और ना ही बनेगा जो इंसानों के साथ विषमता वादी व्यवहार करें और उनको बद से बदतर जिंदगी जीने के लिए मजबूर करें,, अर्थात भारत के सब नागरिक को समान मानते हुए ही विधि या कानून लागू या बनाए जाए,,
*व्याख्या* - भारत की संसद में चाहे किसी भी पार्टी का बहुमत हो,, तो इस बहुमत के आधार पर ऐसा कोई कानून नहीं बनाया जाएगा जो पूर्व में मौजूद व्यवस्था को मजबूत बनाए और एक कम्यूनिटी को इस कानून के दम पर तानाशाही करने के लिए सरक्षण प्रदान करता हो,, इसलिए आर्टिकल 14 सब भारतीयों के लिए एक समान विधि सहिंता उपलब्ध करवाता है और किसी भी विषमता वादी कानून बनाने के लिए रोकता है,, चाहे संसद में कितना भी बहुमत क्यों ना हो।।
*प्लीज़ इस ज्ञान से भरी पोस्ट को कम से कम दो बार पढ़ कर अपने परिवार रिश्तेदार सगे सम्बन्धी को जरूर भेजें और ज्यादा से ज्यादा वायरल करें* ।सेवा जोहार

23/09/2020

दुधवा नेशनल पार्क से 15 किलोमीटर दूर चंदनचौकी में तैयार थारू शिल्प ग्राम बनकर तैयार हो गया है। जनजाति की पारंपरिक संस्कृतिक, हस्तशिल्प व परिधान को संरक्षित करके राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के माध्यम से पहचान दिलाने के लिए थारू शिल्प ग्राम का निर्माण किया गया है। इसका संचालन प्राइवेट सेक्टर में देने की तैयारी है। इसके लिए कंपनियों, होटल, रेस्टोरेंट संचालकों शासकीय व गैर सरकारी संगठन से आवेदन मांगे गए हैं।

परियोजना अधिकारी चंदन चौकी यूके सिंह ने बताया कि पलिया तहसील क्षेत्र के गांवों में जारू जनजाति के कई गांव हैं। इण्डो नेपाल बार्डर चंदनचौकी में दूधवा से 15 किलोमीटर दूर थारू शिल्पग्राम तैयार किया गया है। बार्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत बनाए गए थारू शिल्पग्राम का मकसद जनजाति की पारंपरिक संस्कृति, हस्तशिल्प व परिधान को संरक्षित करना है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के माध्यम से नई पहचान दिलाने का है। उन्होंने बताया कि थारू शिल्पग्राम में पर्यटकों के ठहरने के लिए चार सूट, एक म्यूजियम, थारूओं के पारंपरिक व्यंजनों के लिए थारू रेस्टारेंट, थारू नृत्य, संगीत के लिए आडिटोरियम, थारू शिल्प व वस्तु प्रशिक्षण केन्द्र है। इसके अलावायहां थारुओं द्वारा निर्मित शिल्पकला की वस्तुओं, जड़ी बूटी आद के विक्रय के लिए 10 दुकानें बनी हैं।

https://youtu.be/bd1gKEtTla4 *जय सेवा जागरण में शामिल हुए गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन टीम*
23/09/2020

https://youtu.be/bd1gKEtTla4
*जय सेवा जागरण में शामिल हुए गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन टीम*

#आदिवासी_समाचार जय सेवा जागरण में शामिल हुए गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन। jay sewa jagaran । GSU। 2020

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