14/03/2026
सारण में एक बच्ची के साथे जवन घटल उ सुन के शरीर जरि गइल।इ सब खत्म होखे के नामें नइखे लेत,
एगो रचना:-
आज भी रावण,आज भी कंस बा,
आजो दुसासन दुस्साहस बा कईले।
ओह दिन लाज राम कृष्ण जी रखले,
आज सरकार उनके आगे झुक गइले।।
कवनी कसुरवा कईनी,आजु हम मारल गईनी,
आरे लोगवा रे,आरे लोगवा रे।
मरला के बादो इज्जतिया ना बाचल ए राम।।
कई लोग धई लेगइले,लेई जाके बेइज्जत कईले,
आरे लोगवा रे, आरे लोगवा रे।
कुंअवा धकेली जनवा मारल ए राम।।
कुंअवा से देहिआ निकलल,सासन के मुंहवा फिसलल,
आरे लोगवा रे, आरे लोगवा रे।
कहेला कि कुदि के अपने से मरल ए राम।।
सुन लोगे शरम कर,मन में ना भरम धर,
आरे लोगवा रे, आरे लोगवा रे।
सुनी सुनी संतोष छतिया जरल ए राम।
हे हरि जी जल्दी आव,असुरन के लुकवा लगाव,
आरे लोगवा रे, आरे लोगवा रे।
अबो धरतीया काहे ना फाटल ए राम।।
आपके --
संतोष तिवारी परशुरामपुरवाले