Akhil Bharatiya Pahadi Adhivakta Sangh

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14/05/2022
एडवोकेट गोपाल भाई आपको जन्म दिन की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं
14/05/2022

एडवोकेट गोपाल भाई आपको जन्म दिन की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

CDS श्री रावत के रूप में, देश ने एक महान योद्धा, अप्रतिम सेनापति, सुधारवादी नायक और एक दूरदर्शी सैनिक को खो दिया😢🇮🇳। अंत...
08/12/2021

CDS श्री रावत के रूप में, देश ने एक महान योद्धा, अप्रतिम सेनापति, सुधारवादी नायक और एक दूरदर्शी सैनिक को खो दिया😢🇮🇳। अंतिम प्रणाम माँ भारती के बहादुर सपूत जनरल विपिन रावत और उनकी धर्मपत्नी जी को।इस उड़ान के सभी सहयात्रियों को सादर अंतिम प्रणाम 😢🙏
परमपिता परमात्मा आप सबके परिवारों को इस भीषण दुख को सहन करने की ईश्वर शक्ति दे 🙏

भगवान जी ,, पित्रों ,बड़ों, और दोस्तों , भैयाओ, सहयोगियों के आश्रीवाद से मेरी बड़ी बेटिया की शादी 20june को बड़ी ख़ुशी स...
03/07/2021

भगवान जी ,, पित्रों ,बड़ों, और दोस्तों , भैयाओ, सहयोगियों के आश्रीवाद से मेरी बड़ी बेटिया की शादी 20june को बड़ी ख़ुशी से सम्पन्न हुई.मै सभी से बेटी की सुखी और सम्पन जीवन कामना करता हूँ

*🙏🙏आपको और आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएंl ईश्वर से  कामना है कि आने वाला प्रत्येक नया दिन आपके जीवन में अप...
01/01/2021

*🙏🙏आपको और आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएंl ईश्वर से कामना है कि आने वाला प्रत्येक नया दिन आपके जीवन में अपार खुशियाँ लेकर आए इस अवसर पर ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह वैभव,ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ साथ आजीवन आपको जीवन पथ पर गतिमान रखेl*
*🌹नववर्ष 2021की हार्दिक शुभकामनाये।🌹*
उत्तराखण्ड के कोटद्वार भाबर क्षेत्र की प्रमुख एतिहासिक धरोहरों में कण्वाश्रम जिसका पुराणों में विस्तृत उल्लेख मिलता है। हजारों वर्ष पूर्व पौराणिक युग में कण्वाश्रम शिवालिक की तलहटी में छोटे-छोटे आश्रमों का प्रख्यात विद्यापीठ था। यहां मात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा थी इसमें वे शिक्षार्थी प्रविष्ट हो सकते थे, कण्वाश्रम चारों वेदों, व्याकरण, छन्द, निरुक्त, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिक्षा तथा कर्मकाण्ड इन ६ वेदांगों के अध्ययन-अध्यापन का प्रबन्ध था..

यह कण्वाश्रम कण्व ऋषि का वही आश्रम है जहां हस्तिनापुर के राजा दुष्यन्त तथा शकुन्तला के प्रणय के पश्चात "भरत" का जन्म हुआ था, कालान्तर में इसी गढ़वाली खस नारी शकुन्तला पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। शकुन्तला ऋषि विश्वामित्र व अप्सरा मेनका की पुत्री थी

इस क्षेत्र की प्राचीनता के संबन्ध में अन्य पौराणिक प्रसंगों का भी उल्लेख है। पाण्डवों के पूर्वज शकुन्तला और भरत / निवास आश्रम हैं।महाकवि कालिदास द्वारा रचित "अभिज्ञान शाकुन्तलम" में कण्वाश्रम का जिस तरह से जिक्र मिलता है वे स्थल आज भी वैसे ही देखे जा सकते हैं।

भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एल एसी) पर गलवान घाटी में मां भारती की सुरक्षा हेतु शहीद हुए भारतीय सैनिकों ...
17/06/2020

भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एल एसी) पर गलवान घाटी में मां भारती की सुरक्षा हेतु शहीद हुए भारतीय सैनिकों की शहादत पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि . .
उन सभी जाबाज भारतीय ऑफिसर और जवानों के अदम्य साहस, देशभक्ति, बलिदान,से में ही नहीं पूरे देश के सभी सच्चे हिंदुस्तानी को गर्व है। जिन्होंने अपने देश की सीमा पर तैनात देश की रक्षा के लिए जान निछावर कर दी।और विरोधी चीन की कायर फ़ौज को उनकी ओकात बता कर जहन्नुम पहुंचा दिया ।

श्रद्धा भाव से उन सभी जाबाज भारतीय ऑफिसर और जवानों को मेरा शत शत नमन।
और उन जवानों को जल्दी स्वस्थ होने की कामना करता हूं। ।जो चीन के कायर कारनामे से गम्भीर रूप से घायल हुए है।। और उन परिवार को भी मेरी इस दुख की घड़ी में भावभीनी विन्रम श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भगवान उनको इस दुख की घड़ी में साहस दे। जिनके परिवार के ऑफिसर और जवान देश के लिए जिन्होंने अपना बलिदान दिया।।देश इस सभी ऑफिसर ओर जवानों का कर्जदार रहेगा।।

अनिल ध्यानी एडवोकेट
पूर्व उपाध्यक्ष साकेत बार एसोसिएशन न्यू दिल्ली 17

भारत माता का वीर सपूत श्री श्री श्री महाराणा प्रताप को शत शत कोटि कोटि प्रणाम।महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया उदयपुर, मेवाड...
09/05/2020

भारत माता का वीर सपूत श्री श्री श्री महाराणा प्रताप को शत शत कोटि कोटि प्रणाम।
महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया उदयपुर, मेवाड में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया।
भारतवर्ष के महान योद्धा महाराणा प्रताप को भारत का पहला स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है। वह मेवाड़ में सिसौदिया राजपूत राजवंश के राजा थे। महाराणा प्रताप अपनी वीरता और युद्ध कला के लिए जाने जाते हैं। हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध को 300 साल हो चुके हैं, पर आज भी वहां युद्ध मैदान में तलवारें पाई जाती हैं। इस युद्ध में ना तो अकबर की जीत हुई और ना ही महाराणा प्रताप की।
अकबर ने महाराणा प्रताप को प्रस्ताव दिया था कि यदि वे उसके सामने झुक जाते हैं तो आधा भारत महाराणा प्रताप का हो जाएगा परंतु उन्होंने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। हल्दीघाटी का युद्ध 21 जून 1576 को लड़ा गया और दोनों सेनाओ के बीच भीषण युद्ध हुआ जो केवल चार घंटे में ही समाप्त हो गया। हल्दीघाटी युद्ध के बाद से और चेतक की मृत्यु से उनका दिल पसीज गया और उन्होंने मुगलों से जीतने तक महल त्यागकर जंगल में जीवन बिताने का निश्चय किया। महाराणा प्रताप के भाले का वजन 81 किलो था। उनके कवच का वजन 72 किलो था। महाराणा प्रताप भाला, ढाल, दो तलवारें, कवच लेकर युद्ध में जाते थे, जिसका कुल वजन 208 किलो होता था। इतना भार लेकर युद्ध करना सामान्य पुरुष के लिए संभव नहीं है। युद्ध में महाराणा प्रताप दो तलवार रखते थे। यदि उनके दुश्मन के पास तलवार नहीं होती थी तो उसे अपनी एक तलवार देते थे जिससे कि युद्ध बराबरी का हो। महाराणा प्रताप की तरह उनके सेनापति और सैनिक भी बहुत वीर थे। उनका एक सेनापति युद्ध में सिर कटने के बाद भी लड़ता रहा। महाराणा प्रताप वर्षों तक मेवाड़ के जंगलो में घूमे। लगातार 30 वर्षों तक प्रयास करने के बावजूद अकबर, महाराणा प्रताप को बंदी नहीं बना सका। महाराणा प्रताप ने अपने वंशजों को वचन दिया था कि जब तक वह चित्तौड़ वापस हासिल नहीं कर लेते, तब तक वह पुआल पर सोएंगे और पेड़ के पत्ते पर खाएंगे। आखिर तक महाराणा प्रताप को चित्तौड़ वापस नहीं मिला। उनके वचन का मान रखते हुए आज भी कई राजपूत अपने खाने की प्लेट के नीचे एक पत्ता रखते हैं और बिस्तर के नीचे सूखी घास का तिनका रखते हैं।

जीवन में शस्त्र और शास्त्र दोनों उपयोगी है इसका पाठ सिखा के गए प्रभु श्री परशुराम जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।भ...
25/04/2020

जीवन में शस्त्र और शास्त्र दोनों उपयोगी है इसका पाठ सिखा के गए प्रभु श्री परशुराम जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का अवतार भी कहा जाता है। उन्हें भार्गव नाम से भी जाना जाता है। ऋचीक ऋषि के आत्मज जमदग्नि सात्विक वृति के थे।पिता के देवलोक जाने पर जमदग्नि इक्ष्वाकु वंश की राजकन्या रेणुका के साथ विवाह करके निर्मल और सांस्कृतिक जीवन बिताने लगे। इनके पांच पुत्र हुए। उनमें सबसे छोटे थे परशुराम। परशुराम का जन्म वैशाख शुक्लतृतिया का हुआ था। वो सर्वशास्त्र संपन्न थे। उनकी नसों में जगद्विजयी अग्रिपूर्वक साधुओं का प्रतापी रूधिर बह रहा था। जहां साम्राज्यों के सिंहासन के सन्मुख ऋषित्व ऊंचा समझा जाता था और जहां आर्य संस्कारों की रक्षा जीवन की सफलता थी।

परशुराम महर्षि थे। उच्च संस्कृति के प्रतिनिधि थे। बली,भयंकर, दुर्जेय, प्रतापी और दृढ़ विजेता थे।
आर्य- संस्कृति का उष:काल ही था, जब भृगुवंशी महर्षि जमदग्नि-पत्नी रेणुका के गर्भ से परशुराम का जन्म हुआ। यह वह समय था जब सरस्वती और हषदव्ती नदियों के बीच फैले आर्यावर्त में युद्ध और पुरूष, भरत और तृत्सु, तवरसु और अनु, दरहाऊ और जन्हू तथा भृगु जैसी आर्य जातियां निलंबित थी और जहां वशिष्ठ, जमदग्नि, अंगिरा, गौतम और कण्व आदि महापुरुषों के आश्रमो से गुंजारित दिव्य ऋचाएं आर्य धर्म का संस्कार- संस्थापन कर रही थी। तराजू सहस्त्रारजुन के लोमहर्षक अत्याचारों से त्रस्त था। ऐसे में युवावस्था में प्रवेश कर रहे परशुराम ने आर्य-संस्कृति को ध्वस्त करने वाले हैहयराज की प्रचंडता को चुनौती दी और अपनी आर्यनिष्ठा , तेजस्विता, संगठन- क्षमता,साहस और अपरिमित शौर्य के बल पर विजयी हुए। भगवान परशुराम जी एक ऐसी शौर्य गाथा है जो किसी भी युग में अन्याय और दमन के सक्रिय प्रतिरोध की प्रेरणा देती हैं।
परशुराम ऋषि के रक्षक और अजेय सहस्त्रार्जुन के काल बने। उन्होंने पृथ्वी को 21 बार राक्षसीवृत्ति के राजाओं से विहीन किया और समस्त वसुंधरा यज्ञ में दान दे दी। परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ, इसलिए अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी कहीं तपस्या में लीन हैं।

बचपन में भगवान परशुराम को उनके माता-पिता राम कहकर पुकारते थे। जब वह बड़े हुए तो पिता ने उन्हें भगवान शिव की आराधना करने को कहा। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और असुरों के नाश का आदेश दिया। उन्होंने अपने पराक्रम से असुरों का नाश किया। भगवान शिव ने उन्हें परशु नाम का शस्त्र दिया। यह अस्त्र उन्हें बहुत प्रिय था, इसलिए वह राम से परशुराम हो गए। महाभारत काल में भीष्म, द्रोण और कर्ण को भगवान परशुराम ने ही शस्त्र विद्या सिखाई थी। पिता की आज्ञा का मान रखने के लिए भगवान परशुराम को अपनी माता का वध करना पड़ा और पिता से ही वरदान मांगकर उन्होंने अपनी माता को पुन: जीवित करा लिया। भगवान परशुराम ने तीर चलाकर समुद्र को पीछे धकेलते हुए नई भूमि का निर्माण किया। उन्होंने यज्ञ के लिए बत्तीस हाथ की सोने की वेदी बनवाई थी। बाद में इसे महर्षि कश्यप ने ले लिया और उन्हें पृथ्वी छोड़कर चले जाने के लिए कहा। भगवान परशुराम ने उनकी बात मान ली और समुद्र को पीछे हटाकर गिरिश्रेष्ठ महेंद्र पर चले गए।

जिस तरह हनुमान जी  संजविनी ला कर  लक्ष्मण जी को जीवन बचाया दिया, उसी तरह भारत देश भी विश्व को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (सं...
08/04/2020

जिस तरह हनुमान जी संजविनी ला कर लक्ष्मण जी को जीवन बचाया दिया, उसी तरह भारत देश भी विश्व को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (संजीवनी) देने जीवन बचाने वाला प्रमुख देश।
आप सभी को हनुमान जयंती की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं।

02/04/2020
31/03/2020

भारत के हर जनप्रतिनिधियों सांसद , विधायक, पार्षद ओर अन्य को (कोरॉना प्रधानमंत्रीराहत कोष) के लिए प्रधानमंत्री फंड में अपनी व्यकतिगत जमा खाता से रुपया जमा (दान)करने चाहिए।
सांसद, विधायक,ओर पार्षद निधि, जनता की निधि है । इस निधि से अपने नाम को ना चमकाए .

अगर कोई व्यक्ति भारत सरकार ओर राज्य सरकार के  करोना महामारी को फैलानी  से बचने के लिए कानूनी बात नहीं मानता तो भारतीय का...
21/03/2020

अगर कोई व्यक्ति भारत सरकार ओर राज्य सरकार के करोना महामारी को फैलानी से बचने के लिए कानूनी बात नहीं मानता तो भारतीय कानून की धारा आईपीसी की धारा 269
भारतीय दंड संहिता की अनुसार जो कोई विधि विरुद्ध रूप से या उपेक्षा से ऐसा कोई कार्य करेगा, जिससे कि और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रमण फैलना संभावित है। वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
भारतीय दंड संहिता की धारा 270 के मुताबिक, जो कोई परिद्वेष से ऐसा कोई कार्य करेगा जिससे कि और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोक का संक्रमण फैलना संभावित है। इस अपराध में दो वर्ष की सजा या फिर दंड या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह संज्ञेय अपराध है।
सख्त कानून कार्यवाही होनी चाहिए।

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