Sabr India Foundation

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16/11/2024

बिहार शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में किशनगंज नगर परिषद अन्तर्गत वार्ड नंबर 05, रहमत नगर (साउथ), कर्बला से फरहत परवीन ने सफलता हासिल की। फरहत ने वार्ड नंबर 05 समेत पूरे ज़िले के लोगों को गौरवान्वित किया।
SABR India Foundation की जानिब से फरहत और उनके परिवार वालों को ढ़ेरों मुबारकबाद।

ये लड़का जिसका नाम सुरज मल्लिक है और वार्ड नंबर 05 , माधव नगर, किशनगंज नगर परिषद का निवासी है जो अपने घर से गुम हो गया ह...
14/11/2024

ये लड़का जिसका नाम सुरज मल्लिक है और वार्ड नंबर 05 , माधव नगर, किशनगंज नगर परिषद का निवासी है जो अपने घर से गुम हो गया है। आप सभी लोगों से अनुरोध है कि इस लड़के पर कहीं भी नज़र पड़े या कोई खबर मिले तो कृपया कर दिए गए मोबाइल नंबर पर जरूर सूचना दें।
और इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें ताकी ये लड़का अपने घरवालों से जल्द से जल्द मिल जाए।
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आज ही के दिन इमामुल हिन्द मौलाना अबुल कलाम आजाद पैदा हुए थे। आज तमाम भाईयों और बहनों से गुजारिश है कि मौलाना अबुल कलाम आ...
11/11/2024

आज ही के दिन इमामुल हिन्द मौलाना अबुल कलाम आजाद पैदा हुए थे। आज तमाम भाईयों और बहनों से गुजारिश है कि मौलाना अबुल कलाम आजाद के कोट्स/quotes कमेंट बॉक्स में लिखें। हमने इसके लिए एक ज्यूरिस्ट का पैनल भी मुनतखब किया है। जिनका quotes ज्यूरिस्ट के पैनल द्वारा सिलेक्ट होगा उनको हमारी जानिब से #सम्मानित किया जाएगा।
✓Quotes लिखने का मुद्दत: 11:30am से 7:30pm तक
✓Quotes मौलाना अबुल कलाम आजाद की ही होनी चाहिए।
✓Language: English, Hindi, Urdu
✓Panel of Judges: Tafheem Rahman Suhail Akhter Sheikh Sabeer Md Arfin Noor Md Mudassir Alam

शेख़ साबिर
किशनगंज, बिहार


ये तारीख़ी अल्फ़ाज़ हैं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के, जिसे उन्होंने 1947 में बकरीद के मौके पर दिल्ली की जामा मस्जिद में कहा था।...
11/11/2024

ये तारीख़ी अल्फ़ाज़ हैं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के, जिसे उन्होंने 1947 में बकरीद के मौके पर दिल्ली की जामा मस्जिद में कहा था। उन्होंने आज़ादी मिलने पर मुसलमानों को उस वक़्त ख़िताब किया। लेकिन उनकी ये बातें पढ़कर ऐसा लगता है जैसे अभी के लिए ही कही गयी थीं।

उन्होंने कहा था की देखो ये मस्जिद की मीनारें तुमसे उचक कर सवाल कर रही हैं कि तुमने अपनी तारीख के सफ़हात को कहां गुम कर दिया है? अभी कल की बात है कि यही जमुना के किनारे तुम्हारे काफ़िलों ने वज़ू किया था, और आज तुम हो कि तुम्हें यहां रहते हुए खौफ़ महसूस होता है, हालांकि देल्ही तुम्हारे खून की सींची हुई है।

अज़ीज़ों! अपने अंदर एक बुनियादी तब्दीली पैदा करो, जिस तरह आज से कुछ अरसे पहले तुम्हारे जोश-ओ-ख़रोश बेजा थे, उसी तरह से आज ये तुम्हारा खौफ़ बेजा है, मुसलमान और बुज़दिली या मुसलमान और इश्तआल एक जगह जमा नहीं हो सकते। सच्चे मुसलमान को कोई ताक़त हिला नहीं सकती है। और न कोई खौफ़ डरा सकता है।

आओ अहद करो कि ये मुल्क हमारा है, हम इसी के लिए हैं और उसकी तक़दीर के बुनियादी फैसले हमारी आवाज़ के बगैर अधूरे ही रहेंगे।

आज तुम ज़लज़लों से डरते हो? कभी तुम ख़ुद एक ज़लज़ला थे, आज अंधेरे से कांपते हो, क्या याद नहीं रहा कि तुम्हारा वजूद ख़ुद एक उजाला था, ये बादलों के पानी की सील क्या है कि तुमने भीग जाने के डर से अपने पायंचे चढ़ा लिए हैं, वो तुम्हारे ही इस्लाफ़ थे जो समुंदरों में उतर गए थे, पहाड़ियों की छातियों को रौंद डाला था, आंधियां आईं तो उनसे कह दिया कि तुम्हारा रास्ता ये नहीं है, ये ईमान से भटकने की ही बात है जो शहंशाहों के गिरेबानों से खेलने वाले आज खुद अपने ही गिरेबान के तार बेच रहे हैं, और ख़ुदा से उस दर्जे तक गाफ़िल हो गये हैं कि जैसे उसपर कभी ईमान ही नहीं था।

अज़ीज़ों मेरे पास कोई नया नुस्ख़ा नहीं है। वही 1400 बरस पहले का नुस्ख़ा है, वो नुस्ख़ा जिसको इस क़ायनात के सबसे बड़े मोहसिन (मोहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) लेकर आये थे। और वो नुस्ख़ा है क़ुरान का ये ऐलान, 'बददिल न होना, और न गम करना, अगर तुम मोमिन (नेक, ईमानदार) हो, तो तुम ही ग़ालिब होगे'


की मुहम्मद से वफ़ा तूने तो हम तेरे हैं,ये जहां चीज़ क्या है, लौहो कलम तेरे हैं।आज के दिन ही, 9 नवंबर 1877 ई. में, सियालकोट...
09/11/2024

की मुहम्मद से वफ़ा तूने तो हम तेरे हैं,
ये जहां चीज़ क्या है, लौहो कलम तेरे हैं।

आज के दिन ही, 9 नवंबर 1877 ई. में, सियालकोट पंजाब में मुफ्फकिर- ए-पाकिस्तान, शायर-ए-मशरीक, हकीम-उल- उम्मत अल्लामा मुहम्मद इकबाल मसऊदी की पैदाइश हुयी थी। इकबाल ने हिंदुस्तान की आजादी से पहले तराना-ए-हिन्द सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा लिखा था । उस वक्त वो इस तराने के जरिये अविभाजित हिंदुस्तान के लोगो को एक होकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने के लिए इंस्पायर्ड कर रहे थे, हालांकि बाद में अल्लामा इकबाल ने कांग्रेस के खिलाफ जाकर जिन्ना की मुस्लिम लीग का साथ दिया था।

अल्लामा इक़बाल अपने सदी के मशहूरतरीन शायर थे। इनके मां बाप पैदाइशी मुसलमान नही थे बल्कि एक कश्मीर ब्राह्मण थे जिनका ताल्लुक कश्मीर के शोपियां से था। इक़बाल के वालिद का असली नाम रत्न लाल सपरु था। इनके इस्लाम कुबूल करने पर इनके दादा कन्हैया लाल ने अपने बेटे रत्न लाल से सारे रिश्ते खत्म कर दिए थे। इक़बाल के वालिदे-मोहतरम शेख़ नूर मुहम्मद ज़्यादा पढ़े लिखे या ख़ुशहाल नहीं थे लेकिन दीनदार थे और उलेमा-ए-कराम के साथ उठते बैठते थे। शम्सुल उल्मा मीर हसन स्यालकोटी उनको “अनपढ़ फ़लसफ़ी” कहते थे।

इक़बाल को खासकर मशरिक की बदहाली बेहद बेचैन रखती थी और वो उसके असबाब से भी वाक़िफ़ थे, लिहाज़ा उन्होंने इंसानी ज़िंदगी को सुधारने और उसे तरक़्क़ी की राह पर डालने के लिए अपनी शायरी को वसीला बनाया। इक़बाल अज़मत-ए-अदम के अलमबरदार थे और वो किसी बख़्शी हुई जन्नत के बजाय अपने ख़ून-ए-जिगर से ख़ुद अपनी जन्नत बनाने के ज़्यादा इमकान-परवर और ज्यादा आफरीं समझते थे।

इक़बाल की नज़्मों का शबाब उनकी ग़ज़लों की शराब में डूबा हुआ है। इक़बाल ने उर्दू शायरी से दुख और अवसाद के तत्वों को ख़त्म कर के उसमें आशावाद, उत्साह और जीवटता पैदा की। इक़बाल के यहां फ़िक्र और जज़्बे का ऐसा मिश्रण है कि उनके दार्शनिक विचार उनकी दाख़िली कैफियात और वारदात का आईना बन गए हैं, इसीलिए उनके फ़लसफ़े में कशिश और आकर्षण है।

इक़बाल ने अपने दौर और अपने बाद आने वाली नस्लों को ऐसी ज़बान दी जो हर तरह के जज़्बात और ख़यालात को ख़ूबसूरती के साथ अदा कर सके। उनके बाद शुरू होने वाली अदबी तहरीकें किसी न किसी उन्वान से उनके जादू में गिरफ़्तार रही हैं। उर्दू के तीन अज़ीम शायरों में मीर की शायरी अपने पाठकों को उनका अनुयायी बनाती है, ग़ालिब की शायरी आकर्षित और मंत्रमुग्ध करती है और इक़बाल की शायरी पाठक को उनका प्रशंसक और चाहनेवाला बना देती है।

आज सामाजिक कार्यकर्ता शेख़ साबिर ने किशनगंज नगर परिषद अंतर्गत वार्ड नंबर 05, कर्बला के शांति छठ घाट का निर्माण एवं सौंदर...
08/11/2024

आज सामाजिक कार्यकर्ता शेख़ साबिर ने किशनगंज नगर परिषद अंतर्गत वार्ड नंबर 05, कर्बला के शांति छठ घाट का निर्माण एवं सौंदर्यकरण हेतु माननीय शहरी विकास मंत्री श्री जी को ईमेल के माध्यम से आवेदन दिया।
इसकी प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री बिहार, माननीय ज़िला पदाधिकारी महोदय किशनगंज, नगर परिषद कार्यालय किशनगंज, माननीय सांसद किशनगंज को दिया।
उम्मीद करता हूं कि ये कार्य जल्द से जल्द आरंभ होगा।

छठ के अवसर पर अपने इलाक़े के मां, बहनों के बीच सारी बांटा गया। किशनगंज में गंगा जमुना तहजीब ज़िंदा थी, है और हमेशा रहेगी...
06/11/2024

छठ के अवसर पर अपने इलाक़े के मां, बहनों के बीच सारी बांटा गया। किशनगंज में गंगा जमुना तहजीब ज़िंदा थी, है और हमेशा रहेगी।

दिघलबैंक प्रखंड पदमपुर कटहलबाड़ी गांव में लगातार 4 बच्चों की दुर्भाग्यवश मौत के ताल्लुक से त्वरित जांच और मेडिकल टीम की ...
04/11/2024

दिघलबैंक प्रखंड पदमपुर कटहलबाड़ी गांव में लगातार 4 बच्चों की दुर्भाग्यवश मौत के ताल्लुक से त्वरित जांच और मेडिकल टीम की सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता #शेख़_साबिर ने e-mail के जरिए किशनगंज सिविल सर्जन साहब से अनुरोध किया था।
आज सिविल सर्जन साहब द्वारा उनके मेल के रिप्लाई में एक चिट्ठी प्राप्त हुई। सिविल सर्जन ने कहा की बिमारी की जांच चल रही है और साथ ही एक बच्ची को हल्का बुखार है जिसका ईलाज किया जा रहा है।

Muzaffar Qasmi साहब के एक करीबी रिश्तेदार को B+ ब्लड की सख़्त ज़रूरत थी। आज हमारे Sabr India Foundation  के सम्मानित सदस...
22/10/2024

Muzaffar Qasmi साहब के एक करीबी रिश्तेदार को B+ ब्लड की सख़्त ज़रूरत थी। आज हमारे Sabr India Foundation के सम्मानित सदस्य जनाब Munibur Rahman साहब ने अपना ब्लड डोनेट किया।
सलाम है हमारे योद्धा को। ये हैं हमारे रियल हीरो। अल्लाह मुनीब भाई को जज़ा ए ख़ैर अता फरमाए और अल्लाह हमेशा भाई को तंदुरुस्त और सेहतमंद रखे।


डस्टबिन नहीं होने और हर दिन कचरे की गाड़ी नहीं आने की वजह से रहमत नगर साउथ, मोतीबाग में कचरे का अंबार लगा हुआ था। आज एनज...
18/10/2024

डस्टबिन नहीं होने और हर दिन कचरे की गाड़ी नहीं आने की वजह से रहमत नगर साउथ, मोतीबाग में कचरे का अंबार लगा हुआ था। आज एनजीओ के फील्ड मैनेजर जनाब गौरव जी को कॉल कर तत्काल सफाई करने का अनुरोध किया और गौरव जी तुरंत संज्ञान लेते हुए सफाईकर्मियों के साथ जगह पर पहुंचे और कचरे को पूरी तरह से साफ करवाए।
मैं गौरव जी और सभी सफाईकर्मियों का शुक्रगुजार हूं।
👍👍
#स्वच्छ_और_स्वस्थ_किशनगंज

शेख़ साबिर जो कि पुर्व छात्र है AMU के आज   के अवसर पर उन्होंने एएमयू किशनगंज कैंपस के लिए लंबित धनराशि तत्काल जारी करने...
17/10/2024

शेख़ साबिर जो कि पुर्व छात्र है AMU के आज के अवसर पर उन्होंने एएमयू किशनगंज कैंपस के लिए लंबित धनराशि तत्काल जारी करने के संबंध में माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी को एक ईमेल भेजा।




17/10/2024

नशा करता है बर्बाद इसलिए नशा से रहे दूर।

Remembering the founder of Aligarh Muslim University(AMU) Sir Syed Ahmed Khan on his birth anniversary. He was a great l...
16/10/2024

Remembering the founder of Aligarh Muslim University(AMU) Sir Syed Ahmed Khan on his birth anniversary. He was a great leader, scholar, Philosopher, poet and educationist.
His famous books included "Asbab-e-Baghawat-e-Hind, The Aligarh Institute Gazette and Tehzib-ul-Akhlaq".
He was one of those early pioneers who recognized the critical role of education in the empowerment of the poor and backward Muslim community. In more than one ways, Sir Syed was one of the greatest social reformers and a great national builder of modern India.

⭐⭐Happy Sir Syed Day To All Alig Brothers....



16/10/2024

"As the night gets dark, let your worries fade. Sleep peacefully knowing you've done all you can do for today."

16/10/2024

It does not matter how slowly you go as long as you do not stop.

15/10/2024

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