08/05/2026
तमिलनाडु में अजीब स्थिति है. क्या राज्यपाल राजभवन में बहुमत का परिक्षण करेंगे? क्या वो ऐसा कर सकते हैं? फिर विधानसभा किस लिए है? क्या जानबूझकर विजय को रोका जा रहा ताकि कोई और आंकड़ा जुटा ले? क्या ये सही है? क्या राज्यपाल विजय का संवैधानिक अधिकार छीन सकते हैं?
ध्यान रहे, एस आर बोम्मई के केस में 1994 में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि, "राज्यपाल अपनी निजी राय या संतुष्टि के आधार पर ये तय नहीं कर सकते कि सरकार के पास बहुमत है या नहीं. बहुमत राजभवन में नहीं, बल्कि सदन के पटल पर तय होना चाहिए."
सबसे बड़ी पार्टी है. किसी और पार्टी ने सरकार बनाने के लिए दावा नहीं किया है. इसलिए राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए और उन्हें सदन में बहुमत साबित करने का अवसर देना चाहिए.
पूर्ण बहुमत का पूर्व-प्रमाण ज़रूरी नहीं है. विजय अल्पमत सरकार भी चला सकते हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं जब राज्यपालों ने समर्थन देने वाले सभी विधायकों की पूरी सूची के बिना भी सरकार बनाने का निमंत्रण दिया है. कई राज्यों और केंद्र में भी अल्पमत सरकारों ने अपना कार्यकाल पूरा किया है.
ये नाटक तुरंत बंद होना चाहिए.
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