अभ्युदय सनातन संस्कृति

अभ्युदय सनातन संस्कृति A Social knowledge

20/08/2026

आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं,
पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः।
संचारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो,
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ।।
सरल हिंदी अर्थ:
हे शम्भो ! आप मेरी आत्मा हैं।
भगवती गिरिजा (पार्वती) मेरी बुद्धि हैं।
मेरे प्राण आपके गण (सेवक) हैं।
यह पूरा शरीर आपका घर (मंदिर) है।
संसार के सभी विषय-भोगों का अनुभव आपकी पूजा है।
मेरी नींद आपकी समाधि की स्थिति है।
मेरा चलना-फिरना आपकी परिक्रमा (प्रदक्षिणा) है।
मेरे मुंह से निकले सभी शब्द आपके स्तोत्र हैं।
इस तरह मैं जो भी काम करता हूँ, हे भगवान, वह सब आपकी ही आराधना (पूजा) है।
विपिन कुमार पाण्डेय

20/08/2026

तरक्की की फसल हम भी काट लेते,
अगर थोड़े से तलवे हम भी चाट लेते।

मेरे लहजे में 'जी हुज़ूर' न था,
इसके अलावा मेरा कसूर कोई न था।

पल भर के लिए अगर मैं बेज़मीर हो जाता
यकीन मानिए, मैं कब का अमीर हो जाता.
विपिन कुमार पाण्डेय

16/08/2026
जय श्री महाकाल
17/07/2026

जय श्री महाकाल

जय श्री राधा रानी सरकार
17/07/2026

जय श्री राधा रानी सरकार

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