20/08/2026
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं,
पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः।
संचारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो,
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ।।
सरल हिंदी अर्थ:
हे शम्भो ! आप मेरी आत्मा हैं।
भगवती गिरिजा (पार्वती) मेरी बुद्धि हैं।
मेरे प्राण आपके गण (सेवक) हैं।
यह पूरा शरीर आपका घर (मंदिर) है।
संसार के सभी विषय-भोगों का अनुभव आपकी पूजा है।
मेरी नींद आपकी समाधि की स्थिति है।
मेरा चलना-फिरना आपकी परिक्रमा (प्रदक्षिणा) है।
मेरे मुंह से निकले सभी शब्द आपके स्तोत्र हैं।
इस तरह मैं जो भी काम करता हूँ, हे भगवान, वह सब आपकी ही आराधना (पूजा) है।
विपिन कुमार पाण्डेय