Maharaja Gulab Singh Rajput Sabha -Jammu & Kashmir

Maharaja Gulab Singh Rajput Sabha -Jammu & Kashmir Shree Amar Kashtriye Rajput sabha kathua j&k is established in 1907 by Maharaja Amar Singh ji. This

13/03/2026
13/03/2026

Heartiest Thanks LG Manoj Sinha for issued Order to Renaming Kathua Railway Station to Martyr Captain Sunil Kumar Choudhary ji name . Special thanks to Dr Jitendra Singh PMO For kind support and helping us.
Adv HP singh Jasrotia-Bablu
Chairman
Kathua Development Front-KDF
Kathua JKUT
Jai Hind

12/03/2026

जसरोटा राज्य का गौरवशाली इतिहास
महाराजा जसदेव सिंह जसरोटिया
संस्थापक — रॉयल जसरोटा किंगडम (1019 ई.)
जम्मू–कश्मीर के प्राचीन इतिहास में जसरोता राज्य एक दिव्य, शक्तिशाली और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राजवंश के रूप में प्रतिष्ठित है। सन 1019 ईस्वी में महाराजा जसदेव सिंह जसरोटिया ने इस राज्य की स्थापना की। वे जसरोटिया क्षत्रिय वंश के एक वीर, दूरदर्शी और कल्याणकारी शासक थे, जिन्होंने न केवल एक मजबूत राज्य का निर्माण किया, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को भी स्थापित किया।
महाराजा द्वारा निर्मित पवित्र धाम
कुलदेवी महा काली माता मंदिर – जसरोटा
महाराजा जसदेव सिंह जसरोटिया ने अपने वंश की कुलदेवी महा काली माता का एक भव्य, दिव्य और शक्तिशाली मंदिर जसरोटा में स्थापित कराया।
यह मंदिर आज भी जसरोटिया वंश का आध्यात्मिक केन्द्र है, जहाँ श्रद्धालु मातेश्वरी के चरणों में शक्ति, रक्षा और आशीर्वाद की कामना करते हैं।
श्री हनुमान जी मंदिर
उन्होंने भगवान हनुमान जी की अद्भुत शक्ति और भक्तिभाव को सम्मान देते हुए जसरोटा में श्री हनुमान जी का पवित्र मंदिर स्थापित किया।
यह धाम वीरता, शक्ति और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
श्री भगवान जगन्नाथ जी मंदिर
जगन्नाथ संस्कृति, जो भारत के प्राचीन आध्यात्मिक केंद्रों में से है, को जसरोटा में स्थापित कर महाराजा ने धर्म और संस्कृति की एकता का संदेश दिया।
यह स्थान भक्ति, ज्ञान और समर्पण का प्रतीक बन गया।
शिव शंकर भगवान का पवित्र धाम
महाराज ने महादेव शिव शंकर जी के आराधना स्थल का निर्माण करवाया, जहां आज भी भक्त शक्ति, शांति और मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
यह धाम जसरोटा की दिव्य भूमि को और भी पवित्र बनाता है।
पूज्य कुलदेव बाबा कालीवीर जी दरबार
जसरोटा राजवंश के रक्षक देव बाबा कालीवीर जी का दरबार महाराजा द्वारा विशेष रूप से स्थापित कराया गया।
यह दरबार जसरोटिया परिवार और क्षेत्र की सुरक्षा का आध्यात्मिक केन्द्र माना जाता है, जहां प्रत्येक श्रद्धालु अपने संकटों का निवारण और आशीर्वाद प्राप्त करता है।
जसरोटा—आस्था, परंपरा और शौर्य का केन्द्र
महाराजा जसदेव सिंह जसरोटिया द्वारा स्थापित ये सभी पवित्र धाम न केवल धार्मिक विरासत हैं, बल्कि जसरोटा राजवंश की संस्कृति, समृद्धि और गौरव के अद्भुत प्रमाण भी हैं।
ये मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं,
जसरोटा राजवंश की शौर्यगाथा का इतिहास जीवित है,

और जसरोटा की धरती उन कदमों की याद संजोए हुए है, जिन्होंने एक महान राज्य की नींव रखी।
सादर
Adv HP Singh Jasrotia-Bablu
World Champion Powerlifter
Chairman
Maharaja Jasdev Ji Foundation Trust, Jasrota (J&K)

सन 1942ई. में द्वितीय विश्व युद्ध के समयसबसे खराब हालत पोलैंड की थी..क्योकि पोलैंड ब्रिटेन को जितने के लिए जर्मनी को पोल...
17/11/2025

सन 1942ई. में द्वितीय विश्व युद्ध के समय
सबसे खराब हालत पोलैंड की थी..
क्योकि पोलैंड ब्रिटेन को जितने के लिए जर्मनी को पोलैंड को जीतना जरूरी था..
पोलैंड पर रूस अमेरिका ब्रिटेन और जर्मनी जापान आदि देशो की सेनाओ ने कब्जे के लिए हमला बोल दिया ..

पोलैंड के सैनिको ने दिल पर पत्थर रखते हुये अपने 500 महिलाओ और करीब 200 बच्चों को एक बड़ी शीप/नौका में बैठाकर समुद्र में छोड़ दिया.
और कैप्टन से कहा की इन्हें किसी भी देश में ले जाओ..
जहाँ इन्हें शरण मिल सके..
अगर जिन्दगी रही..
हम बचे रहे या ये बचे रहे तो दुबारा मिलेंगे..

पांच सौ शरणार्थी पोलिस महिलाओ और दो सौ बच्चो से भरा वो जहाज ईरान के इस्फहान बंदरगाह पहुंचा .. वहां किसी को शरण क्या उतरने और रुकने तक की अनुमति तक नही मिली , फिर सेशेल्स में भी नही मिली ,फिर अदन में भी अनुमति नही मिली ....

अंत में समुद्र में भटकता भटकता वो जहाज गुजरात के जामनगर के तट पर आया अब जहाज पर रसद,खाद्य सामग्री भी न के बराबर बची थी...

जामनगर के यदुवंशी महाराजा दिग्विजय सिंह जी जडेजा को सूचना मिलती है क्षत्रिय कुल की रीत के निभाते हुए महाराजा उन्हें अपने राज्य में शरण देते है जामनगर के तत्कालीन महाराजा जाम साहब दिग्विजय सिंह ने न सिर्फ पांच सौ महिलाओ बच्चो के लिए अपना एक राजमहल जिसे हवामहल कहते है वो रहने के लिए दिया.

बल्कि अपनी रियासत में बालाचढ़ी में सैनिक सकूल में उन बच्चों की पढाई लिखाई की व्यवस्था की..
ये शरणार्थी जामनगर में कुल 9 साल रहे ..

उन्ही शरणार्थी बच्चो में से एक बच्चा बाद में पोलैंड का प्रधानमंत्री भी बना..
आज भी हर साल उन शरणार्थियों के वंशज जामनगर आते है और अपने पूर्वजो को याद करते है..
उनके फोटो और नाम सब रखे हुए है ...

पोलैंड की राजधानी वर्साय में चार सड़को का नाम महराजा दिग्विजय सिंह रोड है..
उनके नाम पर पोलैंड में कई योजनाये चलती है..

हर साल पोलैंड के अखबारों में महाराजा जाम साहब दिग्विजय सिंह के बारे में आर्टिकल छपता है, स्कूल की किताबो में महाराजा दिग्विजय सिंह जी के पाठ पढ़ाये जाते है।

एक भारतीय राजा का उपकार पोलैंड नही भूल पाया वहा आज भी बहुत सम्मान की नजरो से देखा जाता है

पोलैंड वासी एक उपकार के बदले भी आभार जताते है जबकि यहाँ हिन्दुस्थान में अपना खून पानी की तरह बहाकर आक्रमणकारियों को हजारो वर्षों तक रोकने व पुत्रवत प्रजा को पालने के बावजूद कुछ कृतघ्न पानी पानी पी पी कर क्षत्रियों को कोसते रहते है।

यही सोच का फर्क है

13/11/2025

Birthday Celebration Maharaja Jasdev Singh Jasrotia Ji at Rajmahal Jasrota JK

सभी भाइयों को जय देव जय राजपूताना जय क्षात्रधर्म भाइयों कितनी शर्म की बात है कि भारत के सबसे ज्यादा जमीन दान करने वाले झ...
13/11/2025

सभी भाइयों को जय देव जय राजपूताना जय क्षात्रधर्म भाइयों कितनी शर्म की बात है कि भारत के सबसे ज्यादा जमीन दान करने वाले झारखंड (रामगढ़) राज्य के राजपूत राजा कामाख्या नारायण सिंह जी को आज कोई भी नही जानता और जो आज जनता के पैसो से पल रहे हैं उन्हे हर कोई जानता है तो भाइयों जब भूदान आंदोलन शुरू हुआ था तब उस वक्त गरीबो के लिए पिछड़ो के लिए दलितो के लिए सब के लिए जमीने मांगी जा रही थी कि जमीने दो ठाकुरों तब उस वक्त रामगढ के महाराजा कामाख्या नारायण सिंह राजपूत जी ने अगडो को पिछडो को दलितो को लगभग 2 लाख एकड जमीन दान कर दी जो 810 किलोमीटर जितनी थी जो बेंगलुरु शहर से भी ज्यादा थी और इतिहास में आजतक किसी ने भी इतनी जमीन दान नही की है यह राजपूत का दान सबसे बड़ा दान माना जाता है यही अगर राजपूत समाज की जगह किसी और ने इतनी जमीन दान की होती तो आज उसको भारत रत्न भी दे दिया होता महाराजा कामाख्या नारायण सिंह राजपूत एक नेता भी थे और वो पहले ऐसे राजपूत नेता थे उस वक्त जिन्होने अपने चुनाव प्रचार के लिए हेलिकप्टर का इस्तेमाल किया था......

सभी भाईयों को जय देव जय राजपूताना जय माँ भवानी जय क्षात्र धर्म.......भाईयों आज में आपको जरनल ज़ोरावर सिंह राजपूत के बारे ...
13/10/2025

सभी भाईयों को जय देव जय राजपूताना जय माँ भवानी जय क्षात्र धर्म.......
भाईयों आज में आपको जरनल ज़ोरावर सिंह राजपूत के बारे में बताने जा रहा हूँ जो Himachal pradesh की Kahloor रियायत से थे और एक चंदेल राजपूत थे और महाराजा गुलाब सिंह राजपूत के वो बजीर बने 1814 ईस्वी में उन्होने उनकी आर्मी join की महाराजा गुलाब सिंह राजपूत की और वह Reasi के बजीर बने और 1841ईस्वी मे अपनी 5 हज़ार पहाडी राजपूतो की फौज लेकर उन्होने china से Tibbat जीत लिया और भारत के साथ जोड दिया.....
जरनल जोरावर सिंह राजपूत ही वो राजपूत योद्धा थे जिन्होंने China को हराया था उसके बाद आज तक कोई भी china नही जीत पाया.....
जरनल जोरावर सिंह राजपूत ने China को हराकर चीनीयो का झंडा अपने कब्जे में कर लिया था वो झंडा आज भी भारत की आर्मी JAK RIF Battalion के पास है वहाँ वो झंडा रखा है
ये राजपूतो की विरासत है और यही झंडा आज भारत china को दिखाकर कहता है हमने तुम्हे एक बार हराया था.....
वही एक बार ही china हारा था भारत से उसके बाद कभी नही हारा.....
सिर्फ़ राजपूतो ने ही हराया था china को.....
आज भारत ने जरनल जोरावर सिंह राजपूत की वीरता देख के उनके नाम पर एक Tank भी बना दिया है china को डराने के लिए......
जरनल ज़ोरावर सिंह राजपूत ने सिर्फ़ Tibbat ही नही.....
Ladakh, Baltisthan, Skardu जैसे क्षेत्र जीत के भारत के साथ जोडा.......
जब एक जंग मैं जरनल जोरावर सिंह राजपूत की मृत्यु हुई तो उनके मरने के बाद भी उनके शरीर का मास लेने के लिये चाइनीस टुकडियो मे लडाई हुई थी.....
वो सोचते थे अगर हमे इस राजपूत योद्धा का मास मिल गया....
और हमारी पत्नीयों ने खा लिया तो हमारी पत्नीयाँ भी इसी दलेर राजपूत जैसा योद्धा पैदा करेंगी
और दो कबीलो ने उनकी जब लाश खरीदी उसको एक लकड़ी पर रखा और एक चाकू से काट कर तर्क्डी में उनके मास को तोला और उस मास की Rate की आज के हिसाब से calculate किया जाए तो 22 हज़ार रुपये किलो होता है
22 हज़ार किलो के हिसाब से राजपूत का मास उस वक़्त बिका था......
और 1200 रुपये एक एक सिर के बाल की कीमत पडी थी
उन्होने जरनल जोरावर सिंह राजपूत की लाश का एक हाथ बचा के रख दिया और दुशमन होकर भी उन्होने जरनल जोरावर सिंह राजपूत के हाथ की समाधि बनाईं उस समाधि को वो ( सिंह बा चोर्टेन ) कहते हैं
और आज भी अगर कोई वहाँ की chinese औरत pregnant होती है तो वो (डोल बाजे) लेकर इस समाधि पर जाते हैं और प्राथना करते हैं हमारे घर भी इसी राजपूत की तरह बच्चा पैदा हो......

जय देव जय राजपूताना जय क्षात्र धर्म भाइयों, आज करवाचौथ का पावन पर्व है — और यह कोई साधारण तिथि नहीं, बल्कि राजपूत शौर्य,...
10/10/2025

जय देव जय राजपूताना
जय क्षात्र धर्म
भाइयों, आज करवाचौथ का पावन पर्व है — और यह कोई साधारण तिथि नहीं, बल्कि राजपूत शौर्य, नारी त्याग और क्षत्रिय मर्यादा का प्रतीक दिवस है।
इतिहास के पन्नों में झाँकें तो पता चलता है कि करवाचौथ की शुरुआत राजपूत वीरांगनाओं ने की थी। जब रणभूमि में हमारे वीर राजपूत योद्धा — मुगलों, आक्रमणकारियों और अत्याचारियों से भारत माता की रक्षा के लिए युद्ध भूमि में उतरते थे, तब उनकी रानियाँ व धर्मपत्नी अपने सुहाग की रक्षा के लिए निर्जल व्रत रखती थीं।

वे दिन-रात भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव से यही प्रार्थना करती थीं —

“हे देव, हमारे वीर पति रणभूमि से विजयी होकर घर लौटें, उनका तेज और साहस अक्षुण्ण रहे।”

यही वो भावनाएँ थीं जिनसे करवाचौथ का जन्म हुआ।
यह त्योहार केवल प्रेम का नहीं, बल्कि त्याग, पराक्रम और क्षत्रिय धर्म की रक्षा का प्रतीक है।

धीरे-धीरे इस परंपरा ने समाज में अपनी अलग पहचान बनाई, और दूसरे वर्गों ने भी इसे अपनाया — परंतु इसकी मूल आत्मा और उत्पत्ति राजपूत संस्कृति से ही जुड़ी है।
राजपूत रानियों ने करवाचौथ को केवल एक स्त्री-श्रृंगार का पर्व नहीं, बल्कि राजपूताना के गौरव का प्रतीक बनाया।

आज जब हम करवाचौथ मनाते हैं, तो यह केवल चाँद देखने की रस्म नहीं, बल्कि हमारे पुरखों की शौर्य गाथा, नारी समर्पण और क्षत्रिय संस्कारों की याद है।

राजपूत इतिहास की जय

क्षत्रिय धर्म अमर रहे

महाराजा गुलाब सिंह राजपूत सभा, जम्मू-कश्मीर

 #रानी_नायकी_राजपूत गुजरात  की रानी थीं, इन्होंने 1178 ईस्वी में कसाहरादा के युद्ध (जिसे कायन्द्रा का युद्ध भी कहते हैं)...
08/10/2025

#रानी_नायकी_राजपूत गुजरात की रानी थीं, इन्होंने 1178 ईस्वी में कसाहरादा के युद्ध (जिसे कायन्द्रा का युद्ध भी कहते हैं) उस युद्ध मे मुहम्मद गोरी को हराया था......
कहा जाता है उस युद्ध मे रानी नायकी राजपूत ने मुहम्मद गोरी पर अपनी तलवार से एक वार ऐसा किया था जिसमे मुहम्मद गोरी नपुंसक कर दिया था....

#रानी_कर्णावती_राजपूत गढ़वाल के राजपूत राजा महिपति की पुत्री थीं। पिता की असमय मृत्यु के बाद उन्होंने गढ़वाल की सत्ता संभाली। इतिहास में वर्णन मिलता है कि वर्ष 1640 में मुगल शासक नजाबत खान ने रानी को कमजोर समझकर गढ़वाल पर आक्रमण कर दिया। लेकिन रानी ने बुद्धिमानी और वीरता के साथ मोर्चा संभाला।
लेखक निकोलो मनुची की पुस्तक में उल्लेख है कि उत्तराखंड की दुर्गम भौगोलिक स्थितियों का लाभ उठाकर रानी ने अपनी छोटी सेना से मुगलों को घुटनों पर ला दिया।कहा जाता है कि युद्ध में बंदी बनाए गए मुगल सैनिकों के सामने रानी ने दो विकल्प रखे या तो सभी के सिर काट दिए जाएं या वे स्वयं अपनी नाक काट लें। अपमान से बचने के लिए मुगलों ने अपनी नाकें खुद काटीं और लौट गए। इस अपमान से दुखी होकर मुगल सरदार ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.....

#रानी_दुर्गावती_राजपूत जबलपुर मध्यप्रदेश की रानी थी इन्होंने अपने शासनकाल में कुल 52 युद्ध लड़े, जिनमें से 51 में उन्हें विजय मिली थी। इनमें तीन बार उन्होंने अकबर की सेनाओं को भी परास्त किया......

#रानी_अवंती_बाई_राजपूत मध्य प्रदेश की रानी थी इन्होने 1857 के भारतीय विद्रोह में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ जंग लड़नी थी जिन्होंने अपने राज्य रामगढ़ की रक्षा के लिए युद्ध में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए.....

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