26/05/2026
। श्रुति-स्मृति-पुराणानाम् आलयं करुणालयम्।
नमामि भगवत्पादं शंकरं लोक-शङ्करम्॥
अर्थात
जो वेद, स्मृति और पुराणों के भंडार हैं, करुणा के सागर हैं, और संसार का कल्याण करने वाले हैं, उन पूज्यपाद 'श्री शंकराचार्य' को मैं प्रणाम करता हूँ।
चित्रकूट आने पर हम सभी पुज्य जगद्गुरू स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का स्वागत अभिनन्दन करते हुए उनके श्रीचरणों में नमस्कार करते हैं और उम्मीद करते हैं कि चित्रकूट के समस्त जन उनके धार्मिक कार्यों के अनुगामी बनेंगे। गौरक्षा और राष्ट्र रक्षा के उनके संकल्प को पूरा करने में सहभागी बनेंगे। पुनः एक बार महाराज श्री के चरणों में नमन। हर हर महादेव।