चित्रकूट स्वराज अभियान Chitrakoot Swaraj Abhiyaan

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चित्रकूट स्वराज अभियान Chitrakoot Swaraj Abhiyaan ये यात्रा चित्रकूट ज़िले के अंदर “जल ,जंगल, ज़मीन पर समाज में जागरूकता के लिये एक प्रयास है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में से  आपके अपने चित्रकूट जिले में स्मार्ट फ़िल्म्स प्रोडक्शन टीम द्वारा बनाई गई वेबसिरीज "द कालीघाट" ...
05/09/2024

बुंदेलखंड क्षेत्र में से आपके अपने चित्रकूट जिले में स्मार्ट फ़िल्म्स प्रोडक्शन टीम द्वारा बनाई गई वेबसिरीज "द कालीघाट" का पहला सीजन रिलीज़ हो चुका है, जो कि दो पार्ट में है !! इस वेबसिरीज के सभी कलाकार बुंदेलखंड के बाँदा, चित्रकूट और सतना जिले से हैं !! जिन्होंने बहुत ही प्रॉपर और खूबसूरत एक्टिंग करी हैं !!
चित्रकूट में बनी इस वेबसिरीज को देखने के बाद यूट्यूब में ही कमेंट रूपी अपना रिव्यू जरूर अनिवार्य रूप से दें, ताकि आपके सुझावों को हम लोग अगली बार से और सही कर पाएं !!
वैसे तो इस वेबसिरीज को प्रॉपर बनाने के लिए स्मार्ट फ़िल्म्स प्रोडक्शन टीम ने बहुत मेहनत करी है, जो कि आप सबके आशीर्वाद और सहयोग से ही सम्भव हो पाया है !!
हम और हमारी स्मार्ट फ़िल्म्स प्रोडक्शन तीन की तरफ़ से आप सभी प्रत्येक लोगों को दिल से आभार और प्रणाम......❤️❤️🙏🙏

Welcome to Smart Films Production The KaaliGhat Webseries-2024 Season-1 | Episode 1 to Episode 5 Director- Avinash Rana & Karan Mourya Producer - Smart Films...

चित्रकूट माँ मंदाकिनी की स्थिति दयनीय है , नदी हर जगह गुमनाम होती जा रही है , हमने एक यात्रा के माध्यम से एक शुरुआत की ह...
19/04/2023

चित्रकूट माँ मंदाकिनी की स्थिति दयनीय है , नदी हर जगह गुमनाम होती जा रही है , हमने एक यात्रा के माध्यम से एक शुरुआत की है , कृपया इस वीडियो को देखें और शेयर करें
Link ~
https://youtu.be/qIsACDZMCgI
Chandrahas Pandey Karan Mourya

#जिलाधिकारी #चाइल्डलाइन

मंदाकिनी नदी चित्रकूट को कैसे बचाया जाये इसके लिए हमारी टीम ने पहले ये जानने की कोशिश की कि आख़िर वर्तमान में नदी क....

Karan Mourya Talking About Mandakini at Archha Barethi Chitrakoot UP        #जिलाधिकारी #
19/04/2023

Karan Mourya Talking About Mandakini at Archha Barethi Chitrakoot UP

#जिलाधिकारी #

Premiering Today 02:00 PM
19/04/2023

Premiering Today 02:00 PM

# dryriver

चुनौतियों से भरा रहा चाइल्डलाइन का संचालन अब सीधे सरकार चलाएगी??बच्चों के सामने की चुनौतियां सरकार कैसे दूर करेगीतब जब ब...
05/04/2023

चुनौतियों से भरा रहा चाइल्डलाइन का संचालन अब सीधे सरकार चलाएगी??
बच्चों के सामने की चुनौतियां सरकार कैसे दूर करेगी
तब जब बाल आवाज को सुनने का कोई अवसर सरकारी सिस्टम में यहां तक कि बाल अधिकारों के संवैधानिक फूलों में नहीं दिखता। अब हम सब लोगों को सरकार की मदद में लगना चाहिए पर कैसे?

PMOIndia
#चाइल्डलाइन का संचालन

अभी तक #गैरराजनीतिक रहा!जो emotion सुरक्षा समाज बच्चों को दे सकता है वह अनाप-शनाप बोध से लदे #जिलाधिकारी तथा जिलाधिकारी के असहनीय लक्ष्यों को ढोता कुपोषित सिस्टम कैसे दे पाएगा ‌।

#अपराधी बनता कैसे हैं?
अपराधी ना बने इसके लिए कोई व्यवस्था परिवार से लेकर समाज में आजादी के बाद से आज तक सरकार के द्वारा पोषित नहीं है।
कानूनी संरक्षण दिलाने वाले यह नहीं चाहते उनके आसपास कोई अपराध पंजीकृत हो।

मैंने अधिकांश बच्चों के केसों में देखा कि
अपराध को बड़ी मशक्कत के बाद पंजीकृत किया गया। किंतु
अपराधी को बचाने के लिए सिस्टम कहीं
ना कहीं से खड़ा हो गया।
सिस्टम के दर्द को मैंने महसूस किया
उसका कहना था कि गंभीर काउंसलिंग करने का समय हम लोगों के पास नहीं है।
काम अधिक है और केस अधिक हैं।
संविदा में काम करने वाले लोग उनकी दिक्कतें और भी संवेदनशील हैं जैसे लंबे समय तक उनके मानदेय ना मिलना के साथ भ्रमण आदि के खर्चे उनका भुगतान लंबे समय तक पड़े रहते हैं। ऐसे ही दिक्कत स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे चाइल्डलाइन संचालन में रही। बहुत ही कम पैसों में लोगों ने काम किया।
लेकिन इस बात का आत्मिक संतोष है की सभी हितग्राहियों को प्रेरित करके बच्चों के हित पर सोचने के लिए मजबूर किया जिसका परिणाम है कि चित्रकूट जनपद में आज बच्चों के प्रति विशेष पहल चारों ओर दिखती है। लेकिन बच्चे परिवार और समाज में उपेक्षित हैं उनके मन की बात प्यार से सुनने वाला शायद कोई हो।
माता-पिता तो केवल भरपेट भोजन की व्यवस्था में लगे हैं परिणाम यह है कि जिन परिवारों में आमदनी कम है वह आज ही बच्चे मजदूरी के लिए माता पिता के साथ काम करने जा रहे हैं। हम को रोक नहीं सकते क्योंकि हमारे पास।उनकी सामाजिक शारीरिक को समाप्त करने का कोई असर नहीं है

परिवारों के अंदर विशेषकर बच्चों को संरक्षित करने की जो शिक्षा और जिम्मेदारी जो होनी चाहिए
वह इसलिए नहीं है कि
आर्थिक ढांचे बहुत ही कमजोर हैं।
परिवार और समुदाय के अंदर बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी के अच्छे अभ्यास कहीं नहीं दिखते।

मैंने यह भी महसूस किया कि बच्चों के संवैधानिक फोरम के जिला स्तरीय बैठकें समय पर नहीं होती ना ही बच्चे प्राथमिकता में हैं।
मैंने यह भी महसूस किया कि किसी भी समस्या में पीड़ित बेटी के ऊपर कोई घटना घटती तब सबसे पहले सुनवाई कर रहे जिम्मेदार अधिकारी बेटी के ऊपर ही सवाल उठाते हैं इतना ही नहीं यदि बेटी कहीं गलती कर दी तब तो वह गलत ही सिद्ध होती है और ऐसा बर्ताव होता है कि वह दोबारा गलती से ऊपर ना सके और गलत हो जाए।
हम सरकार के निर्णय का स्वागत करते हैं एवं सरकार समुदाय और बच्चों के बीच की दूरी कम हो इस पर हम सरकार को मदद करेंगे क्योंकि सरकार हमारी है।

सरकार का निर्णय बच्चों के हित में कितना है यह तो समय बताएगा। लेकिन सवाल है समाज के हर काम को सरकार करेगी सब लोग समुदाय सब अपाहिज होंगे और उनकी प्रतिरोधक क्षमता खत्म होगी इतना ही नहीं वह हर काम के लिए सरकार का मुंह देखेंगे।

सवाल है?
समुदाय को अपनी जिम्मेदारी निर्वाहन से हटाना वात्सल्य नहीं है।
दागदार को हटा देना चाहिए था?

 #विश्वजलदिवस 22 मार्च 2023इस बेटी के सवाल का उत्तर कौन देगा?  #चित्रकूट स्वराज अभियान एवं जलवायु संरक्षण फोरम चित्रकूट ...
23/03/2023

#विश्वजलदिवस 22 मार्च 2023
इस बेटी के सवाल का उत्तर कौन देगा?
#चित्रकूट स्वराज अभियान एवं जलवायु संरक्षण फोरम चित्रकूट द्वारा
चित्रकूट की जीवन रेखा मंदाकिनी नदी तट
रामघाट भरत घाट जहां भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु के बाद तर्पण किया था उस जगह #जलवायुजलसंवाद संपन्न हुआ जहां पयस्वनी नदी सीवर लाकर मंदाकिनी नदी मिलाती है। किसी स्थान को
राघव प्रयाग कहते हैं।

मुख्य चर्चा चित्रकूट के पेयजल
मंदाकिनी पयस्वनी नदी के मृत होने उत्पन्न परिस्थितियों
एवं नदी पुनर्जीवन पर केंद्रित थी।
सभी ने महसूस किया कि नदी में किसी तरह का कानून नहीं है जिसका परिणाम है कि नदी के किनारे सब सिमट गए हैं और कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए।

नदी सूखने और मरने के प्रभावों पर चित्रकूट के युवा अपने अनुभव बता रहे थे।
सभी ने माना कि मौसम बदल गया है
बाढ़ सुखाड़ बुंदेलखंड में आए दिन बने रहते हैं
जिसका परिणाम है कि बुंदेलखंड की नदियां जल स्रोत सब सुख रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत जो पाइपलाइन गांव गांव बिछाई जा रही है क्या उन पाइप लाइनों में पानी आएगा जब यमुना भी सूखे गी और मंदाकिनी भी सूखे गी। नदियों के सूखने की चर्चा हुई जिसमें बताया गया कि नर्मदा जैसी नदी भी सूख रही है अमरकंटक में भूस्खलन बड़ी तेजी से हो रहा है इतना ही नहीं जो जलधाराएं बहुत तीव्रता में थी आज अधिकांश जल धाराएं सूख रही हैं या उनकी गति कमजोर हो गई। जब नर्मदा की स्थिति ऐसी है तब मंदाकिनी नदी तो और जल्दी सूखे गी क्योंकि इसके कैचमेंट का जंगल खत्म हो गया है और नदी के किनारे पक्की सड़कें मकान बन गए हैं तब बादल चित्रकूट में कैसे आएंगे बरसात की बूंद को
बिना जंगल और तालाबों के कैसे सुरक्षित रखेंगे उनको कैसे पकड़ा जाएगा? सवाल इतना ही नहीं है सवाल यह है कि चित्रकूट फिर कौन आएगा जब चित्रकूट की मंदाकिनी नहीं रहेगी यहां की आजीविका कैसे चलेगी?
नदी में लगातार जिस तरीके से निर्माण हो रहा है उसको बांधा गया है सच में एक नदी हत्या है।
सवाल पूछा गया कि एक आदमी की हत्या जब होती है तब 302 लगता है उसे मृत्युदंड की सजा भी होती है लेकिन जैविक नदी को नदी का समाज और सरकार दोनों मार देते हैं तो सच में उसकी सजा क्या होनी चाहिए?

चित्रकूट के जंगलों का समाप्त होना
मंदाकिनी के सूखने का सबसे बड़ा कारण है।
जल है तो कल है यदि जल नहीं तो कल नहीं
तब सवाल है कि मंदाकिनी नदी यदि आने वाले कुछ सालों में सूख गई तब क्या चित्रकूट का अस्तित्व बचेगा? मरी मंदाकिनी का आरती करने वाले लोग फिर क्या करेंगे जब प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाएगे।

#जलवायुजलसंवाद मे युवा साथियों ने कहा कि
चित्रकूट के रामघाट में जो नदी आपको दिख रही है
वह नदी नहीं है यह जरीला पानी है।
रामघाट में दर्जनों नाले शिवर चित्रकूट उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश आबादी के लगे हैं। सीवर और नालों के कारण आज मंदाकिनी पयस्वनी सरयू सब के सब मैला ढोने वाली गाड़ी है इतना ही नहीं इनके शरीर में कंक्रीट के जंगल सरकार और समाज ने पैदा कर दिए हैं जो जंगल था वह सब कटते कटते आज वहां कालोनिया बस गई है।
नदी तट के किनारे गरीब मध्यमवर्गीय परिवार जो पानी नहीं खरीद सकते वह सीधे नदी का पानी पीते हैं या जल संस्थान का पानी पीते हैं उनके आरो नहीं लगे हैं ऐसे परिवारों में लोग नदी का जंगला पानी
पीने के बाद लोग बीमार पड़ते हैं ।
इतना ही नहीं गरीब घरों में जब कोई बीमार पड़ता है तो कर्ज लेकर दवा करानी पड़ती है। मंदाकिनी नदी अब जीवित नहीं है यह मर चुकी है। चित्रकूट के घाट में चित्रकूट में कारपोरेट पानी का एक बड़ा बाजार खड़ा हो गया है पैसे वाले तो पानी खरीद लेते हैं किंतु गरीब परिवार के लोग बच्चे
इस मरी हुई नदी का ही पानी पीते हैं और उन परिवारों से पूछिए कि किस तरह की बीमारीयो परिवार जूझ
रहे हैं।
चित्रकूट से 10 किलोमीटर बाद मंदाकिनी सूख जाती है जिन गांव से मंदाकिनी गुजरती है उन गांव में मंदाकिनी के सूखते ही गरीब परिवारों का बच्चों का जो हाल होता है वह सबसे दर्दनाक है।
सबसे अधिक समस्या बच्चों पर आती है बच्चे किस तरह अपने जानवरों की प्यास बुझाने के लिए
पानी खोजते दूर दूर जाते हैं। नदी किनारे गांव में लोगों की आजीविका पशुओं पर निर्भर है। पानी दूर होते ही पशु बीमार होने लगते हैं उनकी उत्पादन क्षमता घट जाती है। परिवार धीरे-धीरे आर्थिक रूप से कमजोर होता है। बीमारियां बढ़ती हैं फिर परिवार कर्जदार होता है।
गांव में पलायन बढ़ने लगता है बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
रामघाट में घाट के किनारे फूल बेचकर कुछ पैसे इकट्ठा कर अपनी मां को देने वाली एक बेटी जल के संवाद को बड़ी ध्यान से सुना फूल बेचना भूल गई ऐसा
महसूस हुआ कि वह इसी तरह की समस्या से लगता है कि परेशान है। उसे अपना कल समझ में नहीं आ रहा क्योंकि उसकी नदी जहरीली हो गई है।
संवाद में नदियों के मरने जल स्रोतों के सूखने का सबसे बड़ा कारण नदियों के साथ सीवर नाले तो लगाई गए लेकिन नदियों के चारों ओर जो पहाड़ थे जंगल थे उनको काटा गया और भेजा गया।
नदी पुनर्जीवन के लिए सभी ने एक साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

23/03/2023
22/03/2023

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