14/05/2026
शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का अद्भुत प्रतीक पांगणा की मां भुवनेश्वरी :-
सनातन परंपरा और तंत्र साधना में आदिशक्ति के दस दिव्य स्वरूपों को दस महाविद्या कहा जाता है। ये स्वरूप केवल देवी आराधना तक सीमित नहीं, बल्कि ज्ञान, शक्ति, साधना और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों के प्रतीक माने जाते हैं। इन दस महाविद्याओं में काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला प्रमुख हैं।
इन्हीं महाविद्याओं में मां भुवनेश्वरी को सम्पूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। ऐतिहासिक नगरी पांगणा में मां भुवनेश्वरी का प्राचीन मंदिर गांव के मध्य कृत्रिम रूप से निर्मित ऊंची टेकड़ी पर बने छह मंजिला दुर्ग शैली मंदिर की छठी मंजिल पर स्थित है। मंदिर का गर्भगृह प्राचीन स्थापत्य, आध्यात्मिक आस्था और तांत्रिक साधना का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
मंदिर में स्थापित प्रस्तर प्रतिमा और राज महल सुंदरनगर में ब॔द मां भुवनेश्वरी की अज्ञात धातु की प्रतिमा(सिंहासन) में देवी मां शिव की जांघ पर विराजमान दिखाई देती हैं, जो शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक प्रतीक माना जाता है। यह स्वरूप दर्शाता है कि शक्ति के बिना शिव “शव” समान हैं और शिव के बिना शक्ति निष्क्रिय। दोनों का समन्वय ही सृष्टि की पूर्णता, संतुलन और सृजन शक्ति का आधार है।
तांत्रिक प्रभाव से युक्त यह दुर्लभ और प्राचीन श्रीविग्रह प्रेम, समर्पण, त्याग और आत्मिक एकत्व का संदेश देता है। यह स्वरूप बताता है कि सच्चा प्रेम बाहरी आकर्षण में नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग और आध्यात्मिक जुड़ाव में निहित होता है। मां भुवनेश्वरी का यह दिव्य स्वरूप भक्तों को जीवन में संतुलन, शक्ति, प्रेम और समर्पण का मार्ग दिखाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह दिव्य श्रीविग्रह सुकेत रियासत की स्थापना से भी पूर्व का माना जाता है। कहा जाता है कि उग्र स्वभाव की इस देवी को तत्कालीन राजा रामशेन ने अपनी पुत्री चन्द्रावती(हत्या देवी) के संस्कार स्थल चन्द्रपुर(च॔दला) में स्थापित कर दिया था, किंतु चमत्कारिक रूप से यह श्रीविग्रह पुनः पांगणा "बेहड़े" में अपने मूल स्थान पहुंच गया। यह स्थान क्षेत्र की गहरी आस्था और रहस्यपूर्ण तांत्रिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
प्राचीन दुर्ग शैली में निर्मित यह मंदिर आज श्रद्धालुओं, इतिहास प्रेमियों,आर्किटेक्ट और तंत्र साधना में रुचि रखने वाले लोगों के लिए विशेष आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।