14/06/2026
किसान का कोई धर्म या जाति नहीं होती, किसान की सिर्फ एक ही पहचान है—मेहनत और मिट्टी!
🌾🚜पिछले दो दशकों से हमारे पूर्वी राजस्थान का पांचना बांध (Panchana Dam) जल विवाद राजनीति और आपसी अविश्वास की भेंट चढ़ा हुआ है। एक तरफ डूब क्षेत्र के वो भाई हैं जिन्होंने बांध के लिए अपनी उपजाऊ जमीनें कुर्बान कर दीं, तो दूसरी तरफ कमांड क्षेत्र के वो किसान हैं जो सालों से बूंद-बूंद पानी और अपनी सूखी फसलों को देख आंसू बहा रहे हैं।अब समय आ गया है कि हम राजनीति और जातिगत दीवारों से ऊपर उठकर इस विवाद का एक व्यावहारिक और स्थायी समाधान (Solution) निकालें:
1️⃣ डूब क्षेत्र को हक (लिफ्ट इरिगेशन): जिन्होंने अपनी जमीनें खोईं, उन्हें लिफ्ट नहर प्रणाली के जरिए सिंचाई और पीने का पानी प्राथमिकता से मिलना ही चाहिए।2️⃣ कमांड क्षेत्र को न्याय (नहरें खुलें): नीचे बसे गांवों के किसानों को उनके हक का पानी मिले ताकि सालों से बंद पड़ी नहरें फिर से हरी-भरी फसलें उगा सकें।
3️⃣ मुआवजे का तुरंत निपटारा: सरकार 20 साल से लंबित पड़े विस्थापितों के मुआवजे और पुनर्वास के दावों को तुरंत क्लियर करे।
4️⃣ सामाजिक संवाद (जाजम बैठक): दोनों समाजों के बड़े-बुजुर्ग और युवा साथ बैठें। जब तक आपस में दिल नहीं मिलेंगे, तब तक पानी की राह आसान नहीं होगी।पानी जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं। आइए, इस विवाद को सामाजिक सौहार्द और तकनीक के जरिए हमेशा के लिए सुलझाएं ताकि हमारा क्षेत्र खुशहाल हो सके।
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