21/11/2022
जिला लखीमपुर_खीरी संक्षिप्त परिचय ******
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कल तक लखीमपुर खीरी जिले को देश में कितना लोग जानते थे,,,, जानने वाले लोग इसे #तराई_जिला अथवा #गाँजर_क्षेत्र भी कहते हैं ,,,,
यह जिला प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर #पर्वतराज_हिमालय की गोद में हिमालय से मात्र 150 किमी0 की दूरी पर स्थित है जो कि ,अतुल वन सम्पदा से आच्छादित ,निर्मल शुद्ध पर्यावरण युक्त है । खास बात यह कि यहां की आबो हवा आज की प्रदूषण युक्त दमघोंटू और जहरीले वातावरण से कोसों दूर बेहद स्वच्छ, नैसर्गिक, रमणीक, सुरम्य और ऐतिहासिक स्थल है जहाँ की भूमि काफी उर्वरक है......
जहाँ धान गेहूँ के साथ गन्ना भी एक प्रमुख फसल है जिसका प्रमाण जिले में स्थित 9- 9 चीनी मिलों (पलिया ,गोला ,सम्पूर्णानगर , बेलरायाँ , खमरिया ,खम्भारखेड़ा , अजवापुर और कुम्भी और गुलरिया । ) तथा अनगिनत शुगर इंडस्ट्रीज स्थित होने के कारण मिलता है ,इसी कारण इस जिले को #शुगर_बाउल_आफ_यूपी के नाम से भी जाना जाता है ,,,,,,,
जिसकी उत्तरी-पूर्वी सीमा भारत के पड़ोसी मित्र देश #नेपाल की अंतररराष्ट्रीय सीमा से मिलती है,,,
पूर्वोत्तर यूपी मे स्थित यू पी का सबसे बड़ा ,किन्तु बेहद उपेक्षित, और अति पिछड़ा जिला, जहाँ उत्तर प्रदेश की #थारू नामक अनुसूचित जनजाति की काफी बड़ी आबादी निवास करती है,,,,
जहां पर प्रदेश का इकलौता नेशनल पार्क # #दुधवा_नेशनल_पार्क स्थित है,,,
जिसमें विलुप्त होती शेरों की जनसंख्या को संरक्षण देने हेतु #प्रोजेक्ट_टाइगर नामक योजना , तथा गैंडा पुनर्वास केन्द्र नामक योजनाधौ के द्वारा उनका संरक्षण किया गया है,,,,
जहाँ की शेरनी " तारा " की हत्या का मामला , देश की मा0 उच्चतम न्यायालय तक में गूँज चुका है। ज्ञातव्य हो कि तारा को प्रमुख शिकारी और पर्यावरण प्रेमी जो ( #बिली_अर्जन_सिंह जो पंजाब के मशहूर #कपूरथला स्टेट के शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे ) जिन्होंने #पर्यावरण और वन्य जीवों पर काफी कार्य किया था , ( तारा ) शेरनी उनके लिए उनकी बेटी के समान ही प्रिय और पालतू थी ,,,,, #बिली_अर्जन_सिंह के बारे मैं आप लोग यू-ट्यूब और गूगल पर सर्च कर सकते हैं,,,,
जहां की तहसील #पलिया
यूपी में #पंजाब की अनुभूति कराती हो , या फिर यूँ कहिये जो स्वयं #मिनी_पंजाब कहलाती हो ,,,, और जहां की विशेष वनस्पति " कटरुवा " बेहद लोकप्रिय है जिसका स्वाद और मोहक सुगंध लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर लेती हो,,,...
जहां महाभारत युद्ध के पूर्व पांडवों ने अज्ञात वास के दौरान छिप कर वास किया था,,,
जहां संकटं काल के दौरान वीर पांडवों की पत्नी महारानी द्रौपदी ने माता लक्ष्मी की पूजा और आराधना की थी और जो आज भी लक्ष्मीपुर ( लखीमपुर ) में वह मंदिर लखीमपुर के प्रमुख मंदिर #माँ_संकटा_देवी मंदिर के नाम से विख्यात है,,,,
जहाँ #मण्डूक तंत्र पर आधारित कम से कम 250-300 वर्ष पुराना भगवान महादेव का
सम्पूर्ण विश्व में अद्वितीय ऐतिहासिक #मेढ़क_मंदिर आज भी स्थित है
जो अपनी विशिष्ट आकृति , तांत्रिक विशेषता और खड़ी #नन्दी की मूर्ति के कारण ( आपने हर शिव मंदिर में नन्दी की मूर्ति स्थापित अवश्य देखी होगी, परन्तु खड़ी नन्दी की मूर्ति कहीं नहीं देखी होगी ) अपना विशेष स्थान रखता है
और खास बात यह कि यह मंदिर ्टेट के #राजवंश द्वारा निर्मित कराया गया था जो उनके राजमहल से अलग आम जनता को समर्पित किया गया था। यह मंदिर ओयल राजमहल से आज भी #सुरंग द्वारा सम्बद्ध है जिसके अंदर से राजपरिवार के लोगों द्वारा निश्चित समय पर निर्विघ्न भगवान महादेव जी की पूजा अर्चना की जाती थी,,,,,
जहाँ स्थित #लिलौटी_नाथ नामक देव स्थान पर स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर पर कभी न मरने के श्राप से शापित कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र #अश्वत्थामा आज भी सर्वप्रथम पूजा करता है ,,,,
जहां #धौरहरा में #रामबटी नामक देवस्थान पर हिन्दी साहित्य के महाकवि #गोस्वामी_तुलसीदास जी ने स्वयं भगवान हनुमान जी की पूजन आराधना करते हुए हिन्दू धर्म के महाकाव्य रामचरितमानस के सर्वोत्तम कांड " सुन्दरकाण्ड " की रचना की है और जहां उनके द्वारा रोपित वट वृक्ष आज भी विद्यमान है और गोस्वामी जी के हस्तलेख में भोजपत्र पर लिखित "मूल प्रति " आज भी सुरक्षित है ,,,,
जहां #देवकली नामक देवस्थान पर #पाण्डुपुत्र-अर्जुन के पौत्र महाराज परीक्षित की सर्पदंश से मृत्योपरान्त उनके पुत्र महाराज जन्मेजय द्वारा सर्पयज्ञ का आयोजन किया गया था .....
जिसमें लाखों सर्पों को हवन कुंड में मन्त्रों की शक्ति के आगे अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी थी और अंत में जब सर्पराज #तक्षक देवताओं के राजा इन्द्र के सिंहासन से लिपट गया तो देवराज इन्द्र का सिंहासन भी ऋषि-मुनियों के मंत्रोच्चार की शक्ति पर स्वर्ग से खिंचा चला आ रहा था ,,,,,,
जहाँ #छोटी_काशी के नाम से विख्यात देव स्थान #गोला_गोकर्णनाथ नामक स्थान है जहां पर प्रचलित लोककथा के अनुसार एक बार लंकापति #रावण जो कैलाश पर्वत से बाहुबल और तपोबल के आधार पर जबरन भगवान महादेव जी को #शिवलिंग_रूप में अपने नगर लंका अपने साथ ले जा रहा था और ऐसा करने से पूर्व ही भगवान शिव ने उसके साथ एक शर्त रखी थी कि वह उनके शिवलिंग को मार्ग मिल कहीं भी नहीं रखेगा वरना वह सदैव के लिए वहीं पर स्थापित हो जाएंगे ,,,,,
कहते हैं कि यहां तक आते आते रावण को तीव्र लघुशंका महसूस हुई जिसके कारण रावण को मजबूरन वह शिवलिंग गोकरन नामक एक चरवाहे को पकडानी पड़ी और उससे विनती की गई कि मेरे लघुशंका से निवृत होने तक कृपा करके इस शिवलिंग को पकड़ कर रखना है और किसी भी परिस्थिति में भूमि पर नहीं रखना है,,,,,
किंतु ईश्वर की लीला के अनुसार ज्यों ही
उक्त शिवलिंग को गोकरन चरवाहे को पकड़ा कर लघुशंका करने गया वह शिवलिंग धीरे धीरे भारी होने लगा और उधर रावण की लघुशंका समाप्त होने का नाम नहीं ले रही थी ,,,,
,गोकरन के बार बार कहने के बावजूद भी जब रावण लघुशंका से निवृत होकर न आ सका तब मजबूरन गोकरन ने वह शिवलिंग भूमि पर रख दिया और वैसे ही रावण की लघुशंका समाप्त हो गई किंतु तब तक सब कुछ बदल गया था और रावण के लाख प्रयासों के बावजूद वह शिवलिंग नहीं उठा सका,,,
जिससे खीझकर रावण द्वारा उक्त शिवलिंग को अपने बाहुबल से पाताल में घुसाने का प्रयास किया गया जिससे आज भी उक्त शिवलिंग भूतल से काफी अन्दर मौजूद है और यही नहीं उक्त शिवलिंग पर आज भी। रावण के अगूंठे के निशान को छूकर महसूस किया जा सकता है,,,,,
जहां बस रहे शेरों की बस एक झलक पाने के लिए आएदिन , अमेरिका, इंग्लैंड, जापान रूस और कनाडा निवासी विदेशी पर्यटकों का निरन्तर मेला लगा रहता है और जहाँ #कतर्निया_घाट , #गिरजापुरी #कैलाशपुरी आदि स्थानों पर भी पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं,,,,
जहाँ अंग्रेज हुकूमत के दौरान #वीरक्रांतिकारी #नसीरुद्दीन ने अपने 2 साथियों के साथ तात्कालिक कॉलेक्टर विलोवी को अपनी तलवार से मौत के घाट उतार दिया था.... जिसकी याद मे जिला मुख्यालय के मध्य में विलोवी मेमोरियल हाल की स्थापना की गई थी, जिसे आज नसीरुद्दीन हाल के नाम से जाना जाता है!
जहाँ आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक जिले के #मुख्यालय पर एक (वर्कशॉप) #रोडवेज_बस_डिपो तक उपलब्ध न हो सका हो । हां बिना वर्कशॉप , कागजों पर लखीमपुर बस डिपो संचालित है
यानी आप बेबस हैं और मजबूर भी यानी बस बाहर से आने पर ही उपलब्ध होगी .....
और तो और जो पिछले 6 वर्षो से लगातार अमान परिवर्तन का कार्य चलने के बावजूद आजतक
जिले को आज तक पूर्ण रूप से #ब्राडगेज की सुविधा न उपलब्ध हो सकी हो.....
हां पर सरकार डबल इंजिन की जरूर है।
सबसे खास बात यह कि जहाँ जनता द्वारा भारतीय जनता पार्टी के नारे को ,"सबको देखा बार बार हमको देखो एक बार " को आत्मसात कर पूरा जिला दो बार #भगवामय किया चुका है
यानी 2014 और 2019 में जिला की दोनों सीटों पर भाजपा के सांसद को चुनाव में विजयी बना कर दिल्ली भेजा गया ।
इसके अलावा 2017 के विधानसभा के चुनाव में जिले की सम्पूर्ण सीटों से यानी 8 विधायक विजयी कर लखनऊ भेजने के बावजूद
जिला खीरी आज भी #विकास की मुख्य धारा से वंचित हैं .....
जहाँ हिंदी साहित्य जगत में अवधी भाषा के मशहूर राष्ट्रवादी कवि #राष्ट्रकवि #पंडित_बंशीधर_शुक्ल जी की जन्मस्थली #मन्यौरा नामक गांव में स्थित है,,,,,,
जहां आए दिन शेर, चीता और तेंदुओं बारहसिंघा गैंडा मगरमच्छ और हाथियों की रोजाना
आम इंसानों से आँखमिचौली और लुकाछिपी रहती हो ,,,
जी हाँ उस जिले को ही #लखीमपुर_खीरी कहते हैं 🙏🙏
#लखीमपुर #जिला_खीरी #जिला_लखीमपुर