17/05/2025
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बिलौना गांव में एक विशाल खेत है, जिसे "सास-बहु का खेत" कहा जाता है। इस नाम के पीछे एक मार्मिक लोक कथा छुपी है।
आषाढ़ के महीने में एक बूढ़ी सास और उसकी बहु खेत की गुड़ाई कर रही थीं। गांव की इज्जत बचाने के लिए सास ने जिद की कि आज ही पूरा काम खत्म करना है। बहु ने मना किया, लेकिन सास के आग्रह पर वह मान गई। दोनों ने भोजन खेत में एक जगह रख दिया और तय किया कि जब तक काम पूरा नहीं होगा, तब तक खाएंगे नहीं।
तेज धूप, थकावट और भूख के बावजूद वे निरंतर काम करती रहीं। शाम को जैसे ही खेत पूरा हुआ और वे खाने की छपरी तक पहुंचीं, दोनों वहीं थककर गिर गईं और दम तोड़ दिया।
इस त्याग और मेहनत की कहानी के कारण आज भी वह खेत "सास बहु का खेत" कहलाता है।