21/06/2025
डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
21 जून, 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक और प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार की 85वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता निहाल मीणा ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. हेडगेवार, जिन्हें 'डॉक्टर जी' के नाम से भी जाना जाता है, ने 27 सितंबर, 1925 को विजयादशमी के दिन नागपुर में आरएसएस की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना था।
डॉ. हेडगेवार का जीवन और योगदान
डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल, 1889 को नागपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी चिकित्सा की पढ़ाई कोलकाता में पूरी की और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे कांग्रेस के सदस्य रहे और असहयोग आंदोलन में शामिल होकर जेल भी गए। हालांकि, 1920 के दशक में सांप्रदायिक दंगों और कांग्रेस की नीतियों से मोहभंग होने के बाद, उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने के लिए आरएसएस की स्थापना की। उनका मानना था कि राष्ट्र की प्रगति के लिए समाज में एकता, अनुशासन और चरित्र निर्माण आवश्यक है।
डॉ. हेडगेवार ने आरएसएस को एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन के रूप में विकसित किया, जो 'हिंदुत्व' की विचारधारा को बढ़ावा देता है। उन्होंने छोटे-छोटे समूहों में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर संगठन को मजबूत किया और शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना का विकास किया। उनके नेतृत्व में आरएसएस ने 1940 तक एक मजबूत आधार स्थापित कर लिया था, जिसे बाद में उनके उत्तराधिकारियों ने और विस्तार दिया।
निहाल मीणा द्वारा श्रद्धांजलि
भाजपा नेता निहाल मीणा ने डॉ. हेडगेवार की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, "डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी ने अपने जीवन को राष्ट्र सेवा और हिंदू समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके द्वारा स्थापित आरएसएस आज विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, जो समाज के हर क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है। उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके आदर्शों को आत्मसात करने और राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लेते हैं।"
पुण्यतिथि पर आयोजन
इस अवसर पर देशभर में आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर डॉ. हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। नागपुर में उनके स्मृति स्थल पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां स्वयंसेवकों और नेताओं ने उनके जीवन और कार्यों को याद किया। निहाल मीणा ने अपने संदेश में जोर दिया कि डॉ. हेडगेवार के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और युवा पीढ़ी को उनके दिखाए मार्ग पर चलकर राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
डॉ. हेडगेवार का विरासत
डॉ. हेडगेवार का निधन 21 जून, 1940 को मात्र 51 वर्ष की आयु में हुआ, लेकिन उनके द्वारा स्थापित आरएसएस आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में खड़ा है। संगठन की शाखाएं देशभर में 40,000 से अधिक स्थानों पर चल रही हैं, और यह सामाजिक, सांस्कृतिक, और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उनके विचारों ने न केवल आरएसएस, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और संपूर्ण संघ परिवार को प्रेरित किया है।
डॉ. हेडगेवार की पुण्यतिथि हमें उनके बलिदान, समर्पण और राष्ट्र के प्रति उनकी दूरदृष्टि को याद करने का अवसर प्रदान करती है। निहाल मीणा और अन्य नेताओं के नेतृत्व में इस दिन को एक संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रण लिया।
निष्कर्ष
डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह हमें राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए भी प्रेरित करता है। निहाल मीणा द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रतीक है कि उनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।