राजेश काला Page

राजेश काला Page Self-respect से बढ़कर कुछ नही है हमारे लिए,इतन?

23/09/2023

खुद को मूर्ख मत बनाएं।
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किसी दिन, एक बैल और एक तीतर खेत में थे। बैल घास चर रहा था और तीतर बैल के शरीर पर चिपकी किलनी खा रहा था - एक बढ़िया साझेदारी। खेत के किनारे पर एक बड़े पेड़ को देखकर तीतर ने कहा, ‘आह, एक समय था जब मैं उस पेड़ की सबसे ऊंची डाल तक उड़ सकता था। अब मेरे पंख में इतनी ताकत भी नहीं है कि मैं पहली डाल तक पहुंच सकूं।’

बैल ने निर्लिप्त भाव से कहा, ‘हर दिन बस मेरा थोड़ा गोबर खाओ और फिर देखो कि क्या होता है। दो सप्ताह में ही, तुम सबसे ऊपर पहुंच जाओगे।’

तीतर ने कहा, ‘अरे छोड़ो भी, यह कैसी बकवास है। ये बेकार की बात है?’

बैल ने कहा, ‘आजमाकर देखो। पूरी मानवता इसी के बल पर है।’

बहुत हिचकते हुए, तीतर ने गोबर खाना शुरू किया। और, पहले ही दिन वह पहली डाल तक पहुंच गया। एक पखवाड़े में, वह सबसे ऊंची डाल तक पहुंच गया था। वह वहां बैठकर बस दृष्य का आनंद लेने लगा।

एक बूढ़ा किसान, अपनी झूलने वाली कुर्सी पर झूल रहा था, उसने इस मोटे बूढ़े तीतर को देखा, अपनी बंदूक निकाली और तीतर को मारकर गिरा दिया।

कहानी की सीख: मूर्खतापूर्ण चीज़ें (बुलशिट) आपको ऊंचाई पर ले जा तो सकती है, लेकिन वे कभी आपको वहां टिकने नहीं देतीं!

19/03/2022

कबूतरबाज जब अपने कबूतरो को उडाते है तो कुछ कबूतर इतनी ऊचाई पर चले जाते है कि आखो से दिखना बन्द हो जाते है। कबूतरबाज इसको आकाशबन्द होना कहते है।

उस वक्त किसी के लिये यह अनुमान लगाना मुश्किल ही होता है कि कबूतर की वास्तविक पोजीशन क्या है?

वह जानता है उसका कबूतर चाहे जितना भी उँचा उड़ ले मगर बैठेगा अपने ही "अड्डे" पर।

(अड्डा उसको कहते है जो कबूतरबाज अपनी छत पर दो खडे बांसो पर दो बेड़े बांस बाँध कर खड़ा किया गया होता है जिस पर कबूतर बैठते है।)

वापस आकार बैठता भी अपने अड्डे पर है।

कभी कभी अपने साथ किसी अन्य आकाशबन्द कबूतर को भी साथ लेकर उडता दिखायी देता है।

जब कभी कबूतर मालिक को अपने कबूतर के साथ दूशरे कबूतर को उडते देखता है तो अपने कबूतर व साथ उड़ रहे कबूतर का ध्यान आकर्षित करने के लिये अपने अन्य कबूतरो को भी दरबे से बाहर निकाल कर अपनी छत पर लगे अड्डे पर अन्य कबूतरो को बैठा देता है।

जमीन पर दाना पानी डालता है।

(इस प्रक्रिया को "भडी मारना" कहते है जो नये कबूतर को बहकाने के लिये किया जाता है।)

अक्सर ऐसा होता है कि साथ उड़ रहा कबूतर इस "भडी" मे फंस कर अपना अड्डा छोडकर नये साथी कबूतर के अड्डे पर बैठ जाता है।

थोडी देर अलग अलग हिकमत से अड्डे का मालिक जमीन पर उतार ही लेता है कबूतर को।
अगर कोई हिकमत ना काम आ रही हो तो इस नये कबूतर के पंख पर लग्गी की सहायता से "लासा" मार देता है।
(लासा एक प्रकार का लसलसा पदार्थ होता है जो कबूतर बाज गुड या शक्कर से बनाते है)

जब कबूतर के पंख पर लासा लग जाता है तो पंख चिपक जाते है और कबूतर चाह कर भी उड़ नही पाता है। उड़ने की कोशिस भी करे तो जमीन पर गिर जाता है।

जमीन पर कबूतर आने के बाद कबूतर मालिक के हाथो मे आ जाता है।

इसके बाद मालिक इस नये कबूतर का पंख काट कर दरबे मे डाल देता है।

अब तक कबूतर को असलियत समझ मे तो आ गयी होती है कि जिस उँचे अड्डे और दाना पानी को देखकर अपने नये साथी कबूतर के अड्डे पर उतर गया उसकी असलियत क्या है।

मगर अब तो उसके पंख भी काट दिये गये।

एक दो दिन तक दाना पानी भी नही खाता है।

साथ मे बन्द पुराने कबूतर उसके साथ मार काट भी करते रहते है। इस मार काट के वक्त वह पुराना कबूतर जिसके साथ वह इस नये अड्डे पर उतरा है अलग बैठ कर आंख बन्द करके उड़ान की थकान उतार रहा होता है।

दो चार दिन बाद उसी घर मे दाना पानी लेने ही लगता है।

इस बीच अड्डे का मालिक किसी मादा/नर कबूतर के साथ उसका जोडा भी बना देता है।

महिनो बाद जब तक इस नये कबूतर के पंख उड़ने लायक होते है तब तक उसके दरबे मे एक जोडी अण्डा भी हो जाता है।

अब पंख मिले तो अंडो की वजह से भी अपने पुराने घर वापस नही जा पाता है।

एक दो महीने बाद वह भी इसी अड्डे से उड़कर आकाश बन्द होता है।

मौका मिलते ही किसी नये नये आकाश बन्द हुए कबूतर को भी अपने साथ इसी नये अड्डे पर उतार देता है।

दूशरे कबूतर द्वारा लाये गये नये कबूतर को डराने के लिये दरबे मे मार काट करता है।

आप और आपके बच्चे भी एक कबूतर है। नये वाले कबूतर।

आपके आस पास खुरार्ट कबूतर/ कबुतरिया उड़ रही है।

अपने अड्डे को पहिचाने रहिये।

अपने अड्डे के प्रति प्रतिबद्ध रहिये।

24/07/2021

*अंबानी*
आज सुबह अपने बंगले में Gold Coated मार्बल की डाइनिंग टेबल पर बैठे थे.
सामने चांदी की प्लेट व बाउल में, अनसाल्टेड स्प्राउटस्,
बिना शक्कर की चाय पी रहे थे.

फिर कुछ देर बाद.........
अनसाल्टेड ओकरा (भिंडी) की एक सब्जी
और
बिन घी तेल की दो चपाती
और
गर्म खनिज पानी था।

7,000 करोड़ रुपये का घर,
दस नौकरों को नाश्ता मिल रहा था,
पचासों एसी चल रहे थे,
गारेगर हवा दे रहे थे।

इमारतों के नीचे से प्रदूषण का धुआं निकल रहा था।

ऐसे माहौल में नाश्ता कर रहे थे अंबानी...

😊

वहीं दूर खलिहान में दूर कुएं की मेढ़ पर एक खेतिहर मजदूर बैठा था।

वो छोले की तरी वाली सब्जी के साथ रोटी,
हल्दी-मसाले में पकी भिंडी

साथ में अचार भी खा रहा था।

मीठे में गुड़
और
पीने के लिए बर्तन में ठंडा पानी था।

सामने हरे - भरे खेत,
शुद्ध हवा में लहराती फसलें,
ठंडी हवाएं,
चिड़ियों की चहचहाहट।
तथा
वह आराम से खा कर रहा था।

*500 रुपए*
कमाने वाला एक खेतिहर मजदूर वह खा रहा था

जो 7 अरब रुपए का मालिक नही खा पा रहा था।

अब बताओ इन दोनों में क्या अंतर था? 🤔

अंबानी 60 साल के थे
और
मजदूर भी 60 साल के थे।

नाश्ते के बाद अंबानी
मधुमेह
और
बीपी
की गोली ले रहे थे

और
एक खेतिहर मजदूर चूने के साथ पान खा रहा था।

*कोई हीन नही,*

*कोई महान नहीं।*

इसलिये

*खुशी* की तलाश मत करो

*सुख* महसूस करो



*"अतुलनीय आनंद" के उत्पादन पर जीएसटी *0%* है।

*खुद को ढूँढे*
बाकी सब कुछ गूगल पर है।
🙏🏼🙏🏼

01/07/2021

*विचित्र किन्तु सत्य*

*If you give a lift in the vehicle, it is illegal & you can lose your license ... !!*

Some of the provisions in the Indian Motor Vehicle Act are *Unclear*. People are NOT aware of certain rules.

Thus; a Car Owner has been punished under the Indian Motor Vehicle Act for ‘minor assistance’ made unknowingly as doing an illegal act.

*Read what happened with Nitin Nair from Mumbai*

On the morning of the 18th of last month in Tangar, he was on his way to the office. It was raining then. Some buses were overcrowded. Some buses arrived very late. Thus those who had to go to the office urgently were asking for a ‘lift’.

So in the area called Aerroly Circle, 3 people asked Nitin Nair for a ‘lift’. One of them was an old man in his 60s and two other worked in a reputed IT company. They had to go to an area called Gandhi Nagar. Nitin Nair had to cross Gandhi Nagar to go to his office. Nitin Nair, thus understanding their situation, generously loaded the trio into his car.

A police officer stopped the car shortly after. Who were the traveling powers? Nitin Nair told the police officer what happened.

The police officer immediately confiscated Nitin Nair's license and handed over a receipt for the fine to Nitin Nair. Why this sentence? Nitin Nair did not understand that.

Therefore, he asked the police officer for an explanation. The police officer gave a shocking answer that *it is illegal to give a lift to unknown persons.*

Nitin Nair did not believe this and thought that the police officer was rounding up to take bribe. But the police officer behaved very harshly. The next day he came to the police station, paid up the fine and asked for his license back. But he was only handed over the receipt for the fine. He had to come back empty handed.

Nitin Nair went back to the police station the next day. He was informed about *Section 66 in The Motor Vehicles Act, 1988*. Police said he was convicted under the Necessity for Permits, so he had to go to court and pay a fine and get his license revoked.

Nitin was now thoroughly confused and worried. He consulted with lawyers. Only then did it become clear to him that indeed really as per the law, *it was illegal to give a lift to unknown persons in a private vehicle.*

Nitin Nayan, who went to court with no other option, pleaded guilty before the judge to the ‘crime’ of converting his personal car into a passenger car by giving ‘lifts’ to unknown persons with the intention of helping.

He was fined Rs 2,000.

After completing the court proceedings, Nitin Nair went back to the police station and was warned, *If you give anyone a lift again, your license will be confiscated.*

Nitin Nair, who was very upset about this, had poured his grunt on the page that if there were such laws, even if someone was dying on the road, no one would come forward to help.

It is true that there are rules in the Indian Motor Vehicle Act that no person should use his private vehicle as a passenger vehicle or a freight vehicle. There are two reasons for this law.

The first reason is that some people use their own non-T-permit vehicles as taxis, to avoid paying taxes. In this way they are making money illegally.

The second reason is the safety of the vehicle owner. If a lift is given to an unknown person, the owner of the vehicle may be harmed by a previously unknown person when the person arrives in the no-man's-land area. This is why this law has been enacted and implemented.

*So think twice before Giving a Lift to anyone unknown*. Let your friends and relatives know that such a Law exists.🤔🙄

 #दीपावली🪔ll शुभ दीपावलीll🪔आपको ओर आपके परिवार को "राजेश काला" परिवार की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ "प्रक...
14/11/2020

#दीपावली
🪔ll शुभ दीपावलीll🪔

आपको ओर आपके परिवार को "राजेश काला" परिवार की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं। धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ महालक्ष्मी आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें

28/10/2020
30/09/2020
15/09/2020

*निजीकरण और सरकारी पर एक विचार*
*पढ़ें जरूर*

पहले दूध में केवल पानी मिलाया जाता था,फिर मलाई मारी जाने लगी और अब यूरिया और डिटर्जेंट वाला दूध मिलता है।थोड़ा बहुत अपवाद छोड़ दें तो आपके हमारे घर में भी यही दूध आता है और ये दूध सरकारी कर्मचारी नहीं बेचता।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से अरुणाचल तक ट्रेनों में यूरिया वाली जहरीली चाय कोई सरकारी कर्मचारी नहीं बेचता।
200 घन फ़ीट का दावा करके 150 घनफीट बालू आपके हमारे घर में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचाता।
सड़कें कोई सरकारी ठेकेदार नहीं बनाता,
पेट्रोल पंप पर मिलावटी तेल भी कोई सरकारी कर्मचारी नहीं बेचता।
पेट्रोल पंप पर मिलावट के विरुद्ध कार्यवाही करने वाले सरकारी अधिकारी मंजूनाथ षणमुगम को भी मारने वाला पेट्रोल पंप के मालिक सरकारी आदमी नहीं था।
बड़ी बड़ी पंचसितारा इमारतों में हर दिन पैसा सोखने वाले निजी स्कूलों का संचालन सरकारी लोग नहीं करते।
करोड़ों रुपये लेकर देश छोड़ कर भाग जाने वाले माल्या,नीरव मोदी या मेहुल चौकसी सरकारी अधिकारी नहीं थे।

बिना सोचे समझे निजीकरण के पैरोकार और सरकारी कर्मचारी को नकारा साबित करने वाले लोग क्या कभी इन लोगों से कोई प्रश्न कर पाएंगे? जब देश का पैसा लूटकर पूजीपति बने इन पूजीपतियो की आम जनता के प्रति कोई जवाबदेही नही तो निजीकरण कैसे सही होगा। निजीकरण के बाद दिवालिया होकर भाग जाने वालो से जनता के पैसे कौन वापस दिलायेगा।

और निजीकरण इतना ही सफल है तो उस दौर में जब स्मार्टफोन की सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जा रही थी तब माइक्रोमैक्स और karbonn जैसी मोबाइल कंपनियां क्यों फ्लॉप हो गई?
जब हवाई यात्रा लोगो मे लोकप्रिय हो चुकी है तब किंगफिशर व जेट एयरवेज जैसी कम्पनी दिवालिया कैसे हो गयी ?
सोचिए जब इन कम्पनियो का ये हश्र हो सकता है तो कल सरकारी उपक्रमो की जगह लेने वाली कम्पनी का भी तो हो सकता है। अंततः इसका दुष्परिणाम किसे भुगतना होगा?

बड़े गंभीर प्रश्न हैं और ऐसे प्रश्नों की फेहरिश्त काफी लंबी है, बीते समय की बात है गरीबी चरम पर थी लेकिन बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, इतने सारे सरकारी उद्यम खड़े किए गए,आज बताया जा रहा है कि हम 500 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं पिछले साल HPCLक़ो बेचा गया वो तो गनीमत रही कि ONGC को दिया गया और अब BPCL को बेचने की बात चल रही है जबकि BPCLने पिछले वित्तीय वर्ष में 2600करोड़ का मुनाफा कमाया है, स्थिति समझ से परे है,,, कि सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को एक ही बार में खत्म कर देने मे समझदारी है या फिर प्रतिदिन सोने के अंडे प्राप्त करने में।
निजीकरण कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है और इसके गंभीर दुष्परिणाम आम जनता को भुगतने के लिए छोड़ दे रही है।

आज के समय के सबसे गंभीर चिंतन वाले विषय हैं ये। आप विशिष्ट मित्रों से निवेदन है कि खाली समय में इसपर विचार जरुर करें ।

धन्यवाद!

शालिनी गौतम

*वैदिक घड़ी**देखिये आपकी घड़ी क्या कहती है*◆ 12:00 बजने के स्थान पर आदित्या: लिखा हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्र...
04/09/2020

*वैदिक घड़ी*

*देखिये आपकी घड़ी क्या कहती है*

◆ 12:00 बजने के स्थान पर आदित्या: लिखा हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं...

अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु

◆ 1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है, इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है।
एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति

◆ 2:00 बजने की स्थान पर अश्विनौ लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।

◆ 3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं।

सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण।

◆ 4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेदा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं।

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

◆ 5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं।

अपान, समान, प्राण, उदान और व्यान

◆ 6:00 बजने के स्थान पर षड्र्सा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं।

मधुर, अमल, लवण, कटु, तिक्त और कसाय

◆ 7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षय: लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं।

कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ

◆ 8:00 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धिय: लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है।

अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व और वशित्व

◆ 9:00 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं।

पद्म, महापद्म, नील, शंख, मुकुंद, नंद, मकर, कच्छप, खर्व

◆ 10:00 बजने के स्थान पर दशदिशः लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है।

पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, नैऋत्य, वायव्य, आग्नेय, आकाश, पाताल

◆ 11:00 बजने के स्थान पर रुद्रा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं।

कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव

*सनातन धर्म मे प्रत्येक वस्तु कुछ न कुछ अवश्य सिखाती है...*

*संकलन साभार : || चार सदाचार ||*

03/09/2020

🍀🍁☘
भारत की सेना ने अचानक हुए ऑपरेशन में चीन के कई कैम्प्स पर कब्जा कर लिया हैं। चीन हैरान हैं इतने बड़े ऑपरेशन की कोई जानकारी लीक कैसे नहीं हुई। चीन का गुस्सा अपने भारत में बैठे चीनी प्यादों पर निकल रहा है..

एक भी जानकारी लीक नहीं हो रही है, चीन का गुप्तचर तंत्र सकपकाया हुआ है। राजनीति और मीडिया में बरसों से पाले गए वफादार कुत्ते केवल ट्विटर पर भारत की सेना के खिलाफ भौंकने वाली सेना बनकर रह गए हैं..

भारतीय सेना के आक्रामक रुख और भारत के बदलते रवैये के बीच भारत में चीन का गुप्तचर तंत्र एकदम ठप्प हैं। चीन के पैसों और आश्रयों पर पलने वाले कई राजनेता, पत्रकार और वामपंथी इंटेलेक्चुअल चीन के जरा भी काम नहीं आ रहे...

पिछले कुछ समय से राहुल गांधी भारत में चीन के प्रवक्ता बन चुके थे। हर रोज सुबह राहुल गांधी एक ही ट्वीट करते थे – चीन ने भारत की सेना को हरा दिया, चीन ने भारत के सैनिकों को मार दिया। भारतीय सेना जमीन नहीं बचा पाई...

*चीन पर की गई 48 ट्वीट में से 37 बार राहुल गांधी ने लिखा कि चीन ने भारतीय सैनिकों को मार दिया, एक बार भी ये नहीं लिखा कि भारतीय सेना ने चीन के किसी सैनिक को मारा हैं...*

चीन को हमेशा से लगा कि अगर भारत के सबसे बड़े राजनैतिक खानदान को अपनी मुट्ठी में रखेंगे तो देश मे सरकार किसी की भी हो, गुप्त सूचनाएं चीन तक पहुँचती रहेंगीं। लेकिन इस बार जब भारत ने 1962 में "हारी रेकीन माउंटेन पास" और "हुनान कोस्ट" पर कब्जा किया तो चीन गुप्तचर तंत्र को हवा भी नहीं लगी। चीन हैरान हैं। चीन के इशारे पर काम करने वाले भी हैरान हैं...

रोज चीन पर कुर्ता फाड़ नाचने वाले राहुल गांधी, भारतीय सेना के पराक्रम पर सन्नाटे में हैं..!

राहुल गांधी ने जिस बेशर्मी से चीन का साथ दिया है, उससे कांग्रेस में भी कई लोग बहुत हैरान हैं। चीन के सामने गांधी परिवार की हालत उसी तरह की हैं जैसे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली की है। ऐसा लगता हैं चीन के पास गांधी परिवार खासतौर पर राहुल गांधी की कोई खास नब्ज कब्जे में हैं..!

माना जा रहा है कि कल की असफलता के बाद चीन की सरकार गांधी परिवार से नाराज हैं। चीन को लग रहा है कि भारत में बरसों में बनाया उनका पूरा तंत्र अब बेकार साबित हो रहा हैं। चीन को सबसे बड़ा भरोसा अपने इन्ही प्यादों पर था..‼️
🚩🔱🇮🇳

22/08/2020

कल हमारे एक मित्र ने दूसरे को पूछा :
2020 वर्ष ने हमें क्या दिया ???
क्या दे रहा है ???
क्या देगा ???

वह बोला,
कोरोना, चक्रवात, व्यवसाय- नौकरी में नुकसान, मानसिक तनाव, आत्महत्या.
चीन, पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसी स्थिति ...!!!

दूसरा बोला,
*नहीं दोस्त, गलत सोच रहे हो... सच में देखा जाए तो 2020 ने हमें संघर्ष करना सिखाया है ...*

देश में स्वच्छता कितनी जरूरी है, ये सिखाया ...

सावधानी बरतना...

एकदूसरे की मदद करना ...

प्रकृति को सहेजना ...

अन्न की कीमत...

मानसिक संतुलन ...

अनेकों नये मेनू...

विविध तर्कपूर्ण लेख और पोस्ट...

मन को गुदगुदा देनेवाली अनेकों हास्य और व्यंगात्मक पोस्ट ...

इस साल ने हमें बताया कि कम खर्च में शादी और कम लोगों में भी अंतिम संस्कार हो सकता है ...

इसी वर्ष ने बिना मेकअप के ओरिजिनल चेहरे दिखाये ...

घर में रहने के लिए आवश्यक संयम दिया ...

घर के लोगों के साथ बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर दिया ...

समय आने पर पास-पड़ोसी, अपने रिश्तेदारों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं, ये बताया ...

प्रदूषण में कमी ...

भविष्य में आनेवाली किसी भी बड़ी विपदा से निपटने की मानसिक तैयारी करायी ...

यही सब तो सिखाया है इस 2020 साल ने.

इस अवधि में हमने कई महत्वपूर्ण लोगों को अवश्य खोया ...

लेकिन अमीरी-गरीबी का भेद मिटा दिया इस साल ने...

अबतक हम जिन्हें अपने पूजास्थलों पर देखते थे, उस परमशक्ति ईश्वर का दर्शन कराया है इस साल ने.

जीवन का सही मूल्य समझा है हमने ...

हमने जाना, सही अर्थों में जीना कितना आसान है ...

हमारी सही क्षमता पहचानने का और सकारात्मक विचारों को अपनाने का सुनहरा मौका मिला ...

*केवल इसी साल में*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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