20/04/2021
नेताओं की दोगली नीति व दोगले चेहरों से हो रहा है प्रदेश का बुरा हाल...
जो लोग पहले कहते थे कि बॉर्डर पर किसान नहीं हैं, बल्कि मुट्ठी भर लोग बैठे हैं। जो किसानों को खालिस्तानी, आतँकवादी, अलगाववादी और चाइना व पाकिस्तानी प्रयोजित बताते थे। अब उन्हें वो किसान दिखाई देने लगे हैं। जो लोग कल तक तीन काले कानूनों को किसान हितैषी बताते थे और उनके समर्थन में ट्रैक्टर रैलियां निकालते थे, अब प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने का ड्रामा कर रहे हैं। सत्ता की मलाई खाने वाले किसान हितैषी नहीं हो सकते। किसान हितैषी बनने के लिए त्याग व संघर्ष करना पड़ता है। यह तय करना पड़ता है कि आपको कुर्सी या किसान में से कौन प्यारा है।
किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों की श्रद्धांजलि के विषय में एक शब्द जिनके मुंह से नहीं निकला। प्रदेश का किसान ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोगों को बखूबी समझता है। मुख्यमंत्री व गृहमंत्री आज मानवता व कोरोना के नाम पर किसानों से आन्दोलन वापिस लेने की बात करते हैं।भाजपा के नेताओं व मंत्रियों ने किसानों को जो अपशब्द कहकर अपमानित किया था। मुख्यमंत्री को किसानों से माफी मांगनी चाहिए और आन्दोलन में शामिल किसानों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री से मिलकर तीनों काले कानून वापिस करवाने चाहिए। अगर किसानों के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई तो सरकार को बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा।
देश के कृषि मंत्री एक तरफ तो कह रहे हैं कि बॉर्डर पर बैठे किसानों की वजह से कोरोना फैलेगा। वहीं दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री बंगाल में धड़ाधड़ रैलियां कर रहे हैं। तब कोरोना नहीं फैलता है क्या? ऐसे नेताओं के दोगले चेहरों और दोगली नीतियों से देश व प्रदेश का बुरा हाल हो रहा है।