24/03/2022
इस 30 मार्च को नागौर के कृषि विभाग के सामने फसल बीमा योजना में गफलत के खिलाफ एक दिन के लिए बैठूँगा. पता नहीं कितने लोग साथ देंगे पर मैं तो बैठूँगा ही.
मुझे पता है कि किसान के साथ इस योजना में आज अन्याय हो रहा है तो मैं उस अन्याय के खिलाफ हर मंच से लडूंगा. मुझे संख्या से क्या करना है, जो आ जाये साथ उसका शुक्रिया और जो दूर से तमाशे देखे या आलोचना करे, उसका भी शुक्रिया.
उस दिन राजस्थान दिवस है और मैं राजस्थान को बताना चाहता हूँ कि इस राजस्थान को बनाने का क्या फायदा हुआ, जब यहाँ के दो तिहाई लोग जो खेती पशुपालन करते हैं, आज भी लुटे जा रहे हैं. कितनी बेशर्मी से सरकार और बीमा कम्पनियाँ कहते हैं कि हम सारे आंकड़े और प्रक्रिया जग जाहिर नहीं करेंगे. ऐसा क्या राज छुपा है इस योजना में ? जबकि यह किसान हित में बनाई गई थी. चूक एक ही जगह हो रही है......किसान के जागने में.
मन बन जाए तो आ जाना, एक दिन मेरे नाम कर देना .......मन नहीं बने या आलस आ जाए तो मन ही मन शुभकामनाएँ दे देना....क्या पता वे ही काम अ जाएँ, आपका यह दोस्त फकीरा तो अब धुन में है.
कल मैं सोच रहा था कि कोई साथ न आये और मैं अकेला ही बैठा रहा गया तो क्या होगा ! 'भूंडा' लाग ज्यावां ? यह मन का खेल था ! आत्मा बोली, दिल बोला...ना रे ! अपुन तो अब दिसम्बर 2022 तक ऐसे ही चलेगा पागलों की तरह. जो सोचा है वो करना है....किसान के लिए, गौ वंश के लिए, प्रकृति के लिए, सुशासन के लिए.. युवा के लिए, कर्मचारी के लिए........अपना कौनसा अहंकार है जो टूटेगा. अपने साथ तो वैसे भी दस लोग होते हैं तो दस हजार जैसे लगते हैं. मेरे साथी ऐसे ही हैं.
एक शेर याद आ आ गया
जिनके होठों पे हंसी, पाँव में छाले होंगे,
हाँ वही लोग, तेरे चाहने वाले होंगे.
नागौर शहर और आसपास के गाँवों वाले शुभचिंतकों.......पानी-चाय-छाछ तो पिला ही देना....
अभिनव अशोक,
अभिनव राजस्थान पार्टी