Arvind Kumar Vyas

Arvind Kumar Vyas education and social services

*सभी को नमस्कार, आज 11 अगस्त 2024 रविवार का शुभ दिवस है, ओम भैरवाय नमः।                   आज मैं सोशल मीडिया के माध्यम स...
11/08/2024

*सभी को नमस्कार, आज 11 अगस्त 2024 रविवार का शुभ दिवस है, ओम भैरवाय नमः। आज मैं सोशल मीडिया के माध्यम से टीवी पर समाचार देख रहा था, पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व विदेश मंत्री, स्वर्गीय कुंवर नटवर सिंह जी के बारे में उनके स्वर्गवास होने के बारे में समाचार आ रहा था, साथ में ही उनकी जीवनी भी बताई जा रही थी कि वह कौन-कौन से पदों पर रहे, कब-कब रहे, क्या-क्या जिम्मेदारियां उन्होंने निभाई, इन सब के बारे में विस्तृत रूप से बताया जा रहा था, यही जीवन है, जीवन में जो कुछ भी इंसान प्राप्त करता है, स्वर्गवास होने के बाद उसके बारे में बताया जाता है और फिर उसके साथ ही उसका वह सफर वही समाप्त हो जाता है, जिस प्रकार से यात्रा के समय चाहे ट्रेन हो या बस हो, यात्रा के अंत में कौन-कौन से स्टेशन आए के बारे में बात करते हैं और अंत में अपने निश्चित स्थान पर आकर यात्रा समाप्त कर देते हैं, इसी प्रकार से जीवन का भी सफर विभिन्न यात्राओं से गुजरते हुए अंतिम यात्रा की ओर अग्रसर हो जाता है, यह कटु सत्य भी है और सारस्वत सत्य भी है, इसलिए कहते हैं, जब इंसान इस दुनिया में आता है तब मुट्ठी बंद होती है खाली हाथ के साथ आता है जीवन के अंत में मुट्ठी खुल जाती है और खाली हाथ यात्रा अंतिम हो जाती है, इसे कहने और समझने में बहुत अंतर है, कहते हैं ना जीवन में पैसा सब कुछ नहीं है, लेकिन बहुत कुछ है, फिर भी पैसे को देखकर हर दूसरा इंसान बहुत प्रैक्टिकल हो जाता है, जब कि उसे प्रारंभिक और अंतिम सच्चाई का ज्ञान होता है फिर भी वह अनजान बना रहता है, यह मानव व्यवहार है, बस समझने वाली बात है। धन्यवाद अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान*

11/08/2024

*नमस्कार, मेरी उम्र 66 वर्ष के करीब हो चुकी है। लेकिन आज तक मै जीवन के उतार-चढ़ाव को अच्छे से समझ नहीं पाया हूं, कई बार जीवन में हम अपनी बात को सही ढंग से दूसरों के सामने नहीं रख पाते हैं, संवाद में कमी रह जाती है, जिसके कारण कई प्रकार की गलतफहमियां उत्पन्न हो जाती है। मैंने व्यक्तिगत रूप से यह महसूस किया है कि माता-पिता का स्थान कोई दूसरा इस जीवन में नहीं ले सकता है। एक बहुत ही मारके वाली बात बताना चाहता हूं कि इस जीवन में केवल माता-पिता ही एक ऐसी शख्सियत होते हैं जो बच्चे की भावनाओं को समझ सकते हैं अन्यथा परिवार अपनी जगह पर है, समाज अपनी जगह पर है, मित्र मंडली अपनी जगह पर है, सबका जीवन में अलग-अलग स्थान है लेकिन माता-पिता के स्थान को इनमें से कोई नहीं भर सकता है, मेरा व्यक्तिगत अनुभव है, सुख दुख में परिवार, मित्र, समाज, आपके साथ खड़ा रहता है, लेकिन माता-पिता की कमी हमेशा महसूस होती है, वे खुशनसीब है जिनके माता-पिता है, जो आया है उसे जाना निश्चित है, लेकिन जितना समय भी साथ रहने का मिलता है वह स्वर्ग की अनुभति से किसी भी प्रकार से कम नहीं है, मैंने व्यक्तिगत रूप से वह समय भी देखा है जब माता-पिता का साया मेरे ऊपर था और आज वह समय भी देख रहा हूं जब कि उनका साया इस दुनिया में नहीं है, ईश्वर के रूप में उनका आशीर्वाद मुझे हर पल मिलता है, यह एहसास मुझे हर पल रहता है, यही सत्य है मेरे जीवन का, मुझे ईश्वर पर पूरा विश्वास है और अपने ऊपर पूरा आत्मविश्वास है, प्रयास करता हूं हर क्षेत्र में और करता रहूंगा यही सफलता की कुंजी है धन्यवाद अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान*

*जीवन की हकीकत है 2 मिनट का समय निकालकर इसे अवश्य पढ़ें जीवन का अनुभव है*।                    सुप्रभात, सभी को नमस्कार। ...
25/07/2024

*जीवन की हकीकत है 2 मिनट का समय निकालकर इसे अवश्य पढ़ें जीवन का अनुभव है*। सुप्रभात, सभी को नमस्कार। जैसे-जैसे मनुष्य की आयु बढ़ती है, वैसे-वैसे शरीर में कई प्रकार की समस्याएं प्रतिदिन स्वत ही उत्पन्न हो जाती है, सामान्य जीवन में जो इंसान व्यक्तिगत रूप से समस्याओं का सामना करता है, उसे वही समझ सकता है, क्यों कि खुद की चोट का दर्द खुद को ही महसूस होता है, कहने और सुनने में जो महसूस होता है, उसकी भावना अलग प्रकार की होती है। हमारे कहने और सुनने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, केवल मात्र आपके जो सबसे नजदीक होता है उससे आप अपने मन की बात खुलकर कह पाते हैं, जिससे केवल कुछ समय के लिए आपके मन में शांति आती है, अन्यथा इतने बड़े जग में कोई किसी का नहीं है, यह सारस्वत सत्य है, फिर भी लोग इसे सुनना और चर्चा करना अपराध समझते हैं, ना समझी समझते हैं। सब रिश्तो में सच्ची दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है, जहां पर किसी प्रकार का इंटरेस्ट नहीं होता है, केवल प्रेम और आपसे सिक्योरिटी की भावना रहती है, यहां पर सिक्योरिटी का अर्थ केवल मात्र अपने मनोबल को बढ़ाना है और कुछ नहीं। हम किसी के दुख दर्द में मानसिक रूप से भी साथ रहते हैं, तो बहुत बड़ी बात है, यह भी कटु सत्य है, चाहे दुनिया माने या ना माने रिश्तेदारी समय के साथ दुर्बल हो जाती है, केवल मात्र लिप्स सपोर्ट रहता है, वित्तीय रूप से कोई सपोर्ट नहीं करता है, इसलिए आज की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण है कि आपकी जेब में कितना धन है और आपके साथ कोन वर्तमान में खड़ा है, यह सबसे महत्वपूर्ण है। अन्यथा केवल बातें ही बातें हैं। केवल मात्र समय व्यतीत करने का एक रास्ता है, यह ऐसी बातें हैं, जो दिल को छू जाती है, हर इंसान दिल का इतना पक्का नहीं होता है की इन बातों को सुन सके और अनुभव प्राप्त कर सके। जीवन में मुश्किलों का आना और जाना लगा रहता है, यह सब को पता है, लेकिन केवल मात्र अपनी समस्याओं के बारे में बताने उसके बारे मे सोचना कोई पाप नहीं केवल मात्र मित्रता के माध्यम से अपने मन को हल्का करना है, समस्याओं का सामना व्यक्ति खुद व्यक्तिगत रूप से करता है बस कुछ समय के लिए मनोबल अच्छा हो जाता है ऐसा कोई परिवार नहीं है आज के परिपेक्ष में जो किसी न किसी समस्या से ग्रसित ना हो समस्याओं को छुपाने से उन पर बात न करने से समस्या का समाधान तो नहीं होता है हां यह अवश्यक है कि हम अपने तक यह सोचकर निश्चित हो जाते हैं कि समस्या का जिक्र ना करके हमने समस्या को समाप्त कर लिया है बहुत बड़ी गलतफहमी है। समस्या के बारे में बात करने से मन भी हल्का हो जाता है साथ ही उसका विपरीत प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता है अन्यथा जो समस्या है उसके साथ-साथ नई समस्याएं भी स्वास्थ्य को लेकर उत्पन्न हो जाती है अतः उसे बचाने का एक ही उपाय है कि अपने सबसे नजदीकी मित्र से खुलकर बात करें बिना किसी शंका के। धन्यवाद अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान*

*सुप्रभात सभी को नमस्कार आज 20 जुलाई 2024 शनिवार का शुभ दिवस ओम शनिश्चराय नमः*।                             *मेरा व्यक्त...
23/07/2024

*सुप्रभात सभी को नमस्कार आज 20 जुलाई 2024 शनिवार का शुभ दिवस ओम शनिश्चराय नमः*। *मेरा व्यक्तिगत अनुभव है और लोगों की भी राय है यदि आप अपने आप को व्यस्त रखते हैं तो मान कर चलिए आपको आयु का एहसास नहीं होता है* *आप फिजिकल फिट रहते हैं जीवन में अच्छा समय बुरा समय पार्सल पार्ट आफ लाइफ है सुख-दुख समय के साथ आते जाते रहते हैं हमें हर परिस्थिति में अपने आप को संतुलित रखने की आवश्यकता है* *किसी भी बात को लेकर ज्यादा स्ट्रेच लेने की आवश्यकता नहीं होती है हमें समय व्यतीत नहीं करना है इसके लिए हमें कोई भी रास्ता अपनाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है* *उदाहरण के लिए आप देश में रहे या विदेश में रहे उससे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है क्यों कि प्रकृति का खेल है कहीं पहाड़ है, कहीं नदिया है, कहीं झरने है कहीं पर बर्फ है और कहीं पर रेगिस्तान है* *प्रकृति के अलग-अलग रूप है जिन्हें हम समय के साथ महसूस करते हैं और समय निकल जाने के पश्चात फिर वही स्थिति बन जाती है कहने का अभिप्राय इतना सा है की जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है* *नए-नए स्थान पर नई-नई अनुभूतियां होती है और मन प्रसन्न होता है उससे अधिक कुछ नहीं है इसीलिए कहते हैं जिज्ञासा की अपनी सीमा है लेकिन कभी भी जीवन में अस्थिर होने की आवश्यकता नहीं है जहां तक संभव हो सके अपने आप को धैर्यवान बना कर रखें किसी भी बात को लेकर अग्रेषित होने की आवश्यकता नहीं रहती है जीवन में उतार चढ़ाव आता रहता है जाता रहता है* *जिस प्रकार से चंद्रमा को देखने पर ईश्वर द्वारा रचित खूबसूरती का एहसास होता है इस तरह सूर्य को देखने पर ईश्वर द्वारा रचित शक्ति का एहसास होता है और आईना देखने पर ईश्वर द्वारा रचित विशेष रचना का एहसास होता है जो हम स्वयं हैं* *मेरा व्यक्तिगत अनुभव है जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आनंद के किसी भी पल को जाने का मौका नहीं देना चाहिए जहां तक संभव हो सके जीवन में हर पल आनंदित रहने का प्रयास करते रहना चाहिए गुजरा समय नहीं लौटता है केवल गुजरे पल के एहसास हमारे दिलों दिमाग में स्थान बने रहते हैं इसलिए अच्छे पलों का लाभ उठाते रहना चाहिए यही जीवन का सत्य है बाकी सब कुछ मिथ्या है*। *अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान*

हम  जब चंद्रमा को देखते हैं तो ब्रह्मांड की सुंदरता को देख पाते हैं, जब सूर्य को देखते हैं तो ब्रह्मांड की शक्ति का दर्श...
16/07/2024

हम जब चंद्रमा को देखते हैं तो ब्रह्मांड की सुंदरता को देख पाते हैं, जब सूर्य को देखते हैं तो ब्रह्मांड की शक्ति का दर्शन होता है, और जब हम शीशे में अपनी शक्ल को देखते हैं तो ईश्वर द्वारा रचित सबसे अनोखी रचना को देखते हैं यह सत्य है कि इस ब्रह्मांड पर ईश्वर द्वारा रचित सभी रचनाएं चाहे जीव जंतु हो या इंसान हो सभी अपने आप में विशेषताएं रखते हैं इंसानों में ईश्वर ने अपनी अभिव्यक्ति को प्रकट करने के लिए वाणी की विशेषता दी है इसके विपरीत पशु पक्षियों में अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए वाणी का अभाव है, हमें पशु पक्षियों की भावनाओं को समझने के लिए कुछ विशेष प्रकार के प्रयास करने होते हैं, पशु पक्षियों की विशेषताओं को ध्यान रखते हुए हम उनकी भावनाओं को समझ पाते हैं, मेरे घर पर भी दो पालतू कुत्ते है उन दोनों को मेरी बच्ची द्वारा बहुत ही प्रेमपूर्वक रखा गया है, पिछले कुछ माह से मेरी बच्ची के विदेश जाने के पश्चात यह दोनों कुत्ते हमारी देखरेख में रह रहे थे लेकिन मैंने उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास किया, वह चाहते थे कि मेरी बच्ची के पास रहे, मेरी बच्ची की अनुपस्थिति में इन दोनों कुत्तों की गतिविधियों में काफी अंतर आ गया था, जिसे केवल हम समझने का ही प्रयास कर सकते हैं, मैंने भी समझने का प्रयास किया, क्योंकि मेरी बच्ची के विदेश जाने के पश्चात इन दोनों कुत्तों की नजर हमेशा मुख्य द्वार पर ही बनी रहती थी कब उनकी मालकिन आवे जिनसे उन्हें विशेष लगाव रहा, इसी इंतजार में रहते थे, आखिरका दोनों कुत्तों को मेरी बच्ची ने विशेष प्रयास से विदेश ले गई कई प्रकार की औपचारिकता है, पूर्ण करनी पड़ी उन्हें ले जाने के लिए, इसी क्रम में एक छोटी सी कहानी हमेशा मुझे याद दिलाती रही की इटली में एक छोटा बच्चा कुत्ते का बीमार अवस्था में एक आदमी को मिला वह उसे घर ले गया उसका लालन पालन किया और वह बड़ा हो गया वह हमेशा अपने मालिक के साथ घर से स्टेशन जाता था प्रतिदिन मलिक स्टेशन से गाड़ी पकड़ कर अपने कार्य पर जाता था शाम को जब लौटता था तो वह कुत्ता उसका इंतजार करता था और फिर मलिक के साथ घर आता था, बरसों यह सिलसिला चलता रहा, एक दिन शाम होने पर गाड़ी से उसका मालिक नहीं लौटा, कुत्ता इंतजार करता रहा, एक दिन, दो दिन, महीने तक लेकिन उसका मालिक नहीं लौटा ,मालिक की मृत्यु हो चुकी थी कुत्ते को विश्वास था कि उसका मालिक लौटेगा तो वह स्टेशन के मुख्य द्वार पर हमेशा अपनी नजर गड़ाए मालीक का इंतजार करता रहता था लोगों ने उसे खाना दिया घर ले जाने का प्रयास किया लेकिन असफल रहे और अंत में उस कुत्ते के प्राण निकल गए मृत्यु के समय पर भी उसकी आंखें खुली थी अपने मालिक के इंतजार में इतना प्रेम देखकर इटली के लोगों ने स्टेशन के बाहर एक चबूतरा बनाया जिस पर मालिक और कुत्ते की मूर्ति लगाई वह आज भी इटली की राजधानी रोम के स्टेशन के मुख्य द्वार पर लगी हुई है इसी सोच के साथ मैंने भी सोच कि यह दोनों कुत्ते अपने मालिक यानी मेरी बच्ची के इंतजार में रहते हैं अच्छा है यह उनके साथ रहे ,मैंने इस बाबत अपनी बच्ची से बोल उसने मेरी बात मान ली और आज दोनों कुत्तों को अपने साथ विदेश ले गई दोनों बहुत खुश है। मैं इतना ही कहना चाहता हूं की पशु पक्षियों की भावनाओं को समझने का प्रयास करना चाहिए तथा जहां तक संभव हो सके पशु-पक्षियों के प्रति अपना प्रेम बनाए रखना चाहिए, क्योंकि ऐसा मानते हैं कि घर पर पशु पक्षियों के पालने से घर में किसी भी प्रकार की विपत्ति आने पर यह पशु पक्षी अपने ऊपर ले लेते हैं और आपको भी विपत्तियों से मुक्त रखते हैं। धन्यवाद अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान

*हम मिथ्या में जीते हैं सत्य में नहीं*।          ।शुभ संध्या, सभी को नमस्कार। अभी हाल ही में काफी दिनों से मुकेश अंबानी ...
14/07/2024

*हम मिथ्या में जीते हैं सत्य में नहीं*। ।शुभ संध्या, सभी को नमस्कार। अभी हाल ही में काफी दिनों से मुकेश अंबानी के बेटे के विवाह को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत अधिक चर्चाएं हैं, मैं भी सुनी, आप लोगों ने भी सुना होगा, देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, कहने का अभिप्राय है कि हर क्षेत्र से बड़ी-बड़ी हस्तियां चाहे वह फिल्मी क्षेत्र हो, धार्मिक क्षेत्र हो, आध्यात्मिक क्षेत्र हो, व्यापारिक क्षेत्र हो, खेल का क्षेत्र हो, सभी क्षेत्रों से बड़ी-बड़ी हस्तियां जिनका देश में मैं ही नहीं विदेशो में भी नाम है, इस विवाह में सम्मिलित हुए, करोड़ों रुपए के गिफ्ट दिए गए, बड़ा आश्चर्य होता है, इतना पैसा शादी विवाह के समारोह पर खर्च करना अपने आप में प्रश्न चिन्ह लगता है, आज भी हमारे देश में हर क्षेत्र में पैसे की आवश्यकता है, विकास के लिए, तो यह पैसा जो केवल मात्र एक शादी समारोह में खर्च किया गया कहां तक अपने आप को सही साबित करता है, इसीलिए कहते हैं पैसा वाला होना, अपने आप में बहुत बड़ी ताकत है, लेकिन सब कुछ होने के कारण क्या पैसे के बल पर एक मरे हुए इंसान को या जीव को पुनर्जीवित किया जा सकता है, असंभव है, तो फिर पैसा कहां-काम आया, पैसे की क्या अहमियत रही, इसीलिए कहते हैं पैसा बहुत कुछ है सब कुछ नहीं, पैसे के बल पर हम केवल मिथ्या जीवन को जी सकते हैं, जीवन का सत्य इससे बहुत दूर है, तो फिर अभी मृत्यु के पश्चात सबका अंत एक सा है, वहां पर पैसा काम नहीं आता है, सिकंदर भी विश्व विजेता रहा, लेकिन जाते समय हाथ खाली थे, इसी तरह से कोई भी हो, कितने भी पैसे वाला हो, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि अंत सबका एक सा है। अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान

09/07/2024

सुप्रभात, सभी को नमस्कार ,आज 9 जुलाई 2024 मंगलवार का शुभ शुभ दिवस है, जय बालाजी की। जीवन संभावनाओं का एक पुंज है, हर पल समय अपना रूप बदलता है, करवट लेता है फिर भी इंसान अनजान बना रहता है, कहते हैं ना आंख बंद कर लेने से जग में अंधेरा नहीं छा जाता है, इसी प्रकार से अपने आप को अंधकार में रखने से आप खुद संतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन समय को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं, कहते हैं ना हर प्रश्न का अंतिम जवाब है, होनी को मंजूर होगा, वही होगा, जब सब कुछ ईश्वर द्वारा पूर्व में ही तय किया जा चुका है, फिर काहे का डर, काहे का सोचना, क्यों ऐसी बातों से अपने आप को अंजान बनाए रखना, आश्चर्य जनक बात है, मैं मानता हूं, व्यक्तिगत रूप से हर इंसान के जीने का अपना तरीका होता है, अपना अपना स्वभाव होता है, अपनी-अपनी भावना होती है, यह सब बातें मिलकर इंसान के व्यक्तित्व का निर्माण करती है, इंसान का व्यक्तित्व कैसा होगा, आप उसकी सोच, उसके काम करने के तरीके, किसी भी बात को लेकर उसके सोचने का तरीका अलग ही होता है, कुछ लोग जीवन में अपने आप को लेकर स्पष्ट नहीं होते हैं, कंफ्यूज होते हैं, निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होते हैं, समय किसी भी इंसान के निर्णय का इंतजार नहीं करता है, बात वहीं आकर रुक गई, सब कुछ ईश्वर द्वारा पूर्व निर्धारित है तो फिर हर बात पर चर्चा करने की क्या आवश्यकता है हर बात के दो पहलू होते हैं सकारात्मक भी और नकारात्मक भी, जब सब कुछ तय किया हुआ होता है तो हम लोग केवल औपचारिकता ही पूरी करते हैं निर्णय हर बात का ईश्वर द्वारा पूर्व निश्चित रूप से तय किया हुआ होता है तो फिर क्या सकारात्मक सोच और क्या नकारात्मक सोच ऐसा कोई भी इंसान नहीं है इस धरती पर जो केवल मात्र बिना सोच के जीवन पूरा करता है इंसानों और जानवरों में यही सबसे बड़ा अंतर है कि इंसानों में अभिव्यक्ति की विशेषता होती है इसके विपरीत जानवर इस विशेषता से पूर्ण नहीं होते हैं जब इंसानों में अभिव्यक्ति की विशेषता होती है तभी वह हर बात पर सोचता भी है और अपने राय भी देता है हास्य जनक बात है आश्चर्य जनक बात है जब ईश्वर द्वारा सभी कुछ पूर्व निर्धारित है हर पल का हिसाब पूर्व में ही निर्धारित है तो फिर अपनी अभिव्यक्ति को क्यों व्यक्त किया जाता है प्रश्न वाचक चिन्ह है। अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान

शुभ संध्या सभी को नमस्कार।  मैं परसो व्यक्तिगत कार्य से जयपुर गया हुआ था वहां पर अक्षय पात्र संस्थान पर जाने का मुझे अवस...
26/06/2024

शुभ संध्या सभी को नमस्कार। मैं परसो व्यक्तिगत कार्य से जयपुर गया हुआ था वहां पर अक्षय पात्र संस्थान पर जाने का मुझे अवसर मिला बहुत बड़ी विश्व स्तरीय संस्थान है वहां पर संत रघु प्रसाद दास जी से मुलाकात जिनके पास संस्था का नियंत्रण है मेरे सन 2011 से आपसे व्यक्तिगत संबंध है उनसे भी मिलना हुआ उनके अलावा वहां पर कार्यरत सभी अधिकारियों से भी मुलाकात हुई काफी लोग मेरे परिचित मिले आप लोगों ने बहुत मान सम्मान दिया और मैं जिस कार्य से गया था उस कार्य में भी आपके सहयोग से मुझे सफलता मिली इसके लिए सभी धन्यवाद के पात्र हैं। जयपुर में ही राजस्थान सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री जी मदन जी दिलावर जो कि मेरे पूर्व वंचित है आपसे भी व्यक्तिगत मुलाकात हुई आपको भी हाल ही में जोधपुर जिले का प्रभारी मंत्री नियुक्त किया गया है उसके लिए आपको जोधपुरी रिवाज के अनुसार साफै और दुपट्टे से स्वागत कर बधाई दी आपने बहुत प्रसन्नता जाहिर की और इसके लिए आभार प्रकट किया। जयपुर प्रवास के दौरान मेरे स्कूली मित्र श्री ब्रह्म प्रकाश जी शर्मा जो की सेवानिवृत्ति मुख्य अभियंता है विद्युत विभाग के आपसे भी मिलना हुआ भोजन की व्यवस्था आपके द्वारा ही की गई काफी व्यक्तिगत चर्चाएं हुई। इसके पश्चात मेरी मुलाकात एक ऐसे मित्र से हुई जिनके साथ बचपन में स्कूल टाइम में बहुत अच्छी मित्रता रही ज्यादातर समय हम दोनों एक दूसरे के घर पर ही व्यतीत करते थे आपके पिता बहुत बड़े उद्योगपति थे आपका उपयोग जापान और बर्मा में था जो वर्तमान में म्यांमार है आपका जन्म स्थान भी बर्मा ही है आपसे आप राजस्थान के सुप्रसिद्ध डॉक्टर हैं ईएनटी स्पेशलिस्ट है डॉ उमाशंकर केडिया है आपसे मिलकर हम दोनों को बचपन की यादें आ गई बहुत ही भावुक होकर आपसे मुलाकात हुई आपने बहुत खुशी जाहिर की तथा कहा कि बचपन की मित्रता के लिए कोई शब्द नहीं है केवल मात्र जो एहसास है उसे मैं शब्दों द्वारा व्यक्त नहीं कर सकता 45 साल के बाद ऐसी मुलाकात अपने आप में बहुत बड़ी बात है कहने का तात्पर्य यह है कि मेरा जयपुर का टूर बहुत ही सफल रहा, यादगार रहा। अब मैं मिशन पर्यावरण एवं सामाजिक विकास एवं संरक्षण संस्थान जोधपुर राजस्थान के अध्यक्ष होने के नाते भविष्य में जो कार्य संस्था के माध्यम से, जो मिशन संस्था के माध्यम से हाथ में लिया है, आप सभी के सहयोग से उसे सफल बनाने के लिए उस पर कार्य शुरू कर दिया है, जल्द ही हम सब लोग एक छोटी सी मीटिंग के माध्यम से मुलाकात करेंगे तथा आगे की रणनीति तय करेंगे, आप सभी के सहयोग से हम इस मिशन में अपार सफलता प्राप्त करेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। धन्यवाद, अरविंद कुमार व्यास जोधपुर, राजस्थान।

*समय का चक्र*। सुप्रभात, आज 23 जून 2024 रविवार का शुभ दिवस है, ओम भैरवाय नमः।                              कल की ही बात ...
23/06/2024

*समय का चक्र*। सुप्रभात, आज 23 जून 2024 रविवार का शुभ दिवस है, ओम भैरवाय नमः। कल की ही बात है मित्रों के साथ बैठे थे वैसे ही सामाजिक परिपेक्ष में घटित घटनाओं के बारे में बात कर रहे थे, कोई कुछ कह रहा था भविष्य का कुछ नहीं पता चलता है इतिहास केवल गुजरी बातों का एक संग्रह रह जाता है और जो कुछ है वह वर्तमान है, इस प्रकार की कुछ बातें हो रही थी इन सब बातों को सुनने के बाद जब मैं एकांत में बैठकर गुजरी बातों पर मनन कर रहा था, कई विषय मस्तिष्क में लगतार चलते रहते हैं, सारी बातों का एक ही निष्कर्ष निकला की जिस प्रकार से खिचड़ी बन जाती है ना दाल का पता ना चावल का पता ना मसाले का पता ना मिलाइ हुई सब्जियों का पता सब कुछ एक दूसरे में मिल जाते हैं इसी प्रकार जीवन भी उस खिचड़ी की तरह है जिसमें घटनाएं इतिहास के रूप में वर्तमान अपने हिसाब से और भविष्य का कुछ ता पता ही नहीं यही जिंदगी है हम या कोई भी इतनी आसानी से जिंदगी को परिभाषित नहीं कर सकते है सुबह होती है दोपहर होती है रात होती है और दिन गुजर जाता है फिर शुरुआत होती है इस प्रकार से समय आगे बढ़ता रहता है सेकंड फिर मिनट फिर घंटे फिर दिन फिर सप्ताह फिर महीने फिर वर्ष गुजरते जाते हैं तारीख बदलती रहती है समय के साथ हर इंसान की आयु भी हर पल बढ़ती रहती है और उसके हिसाब से ही उसका जीवन भी आगे बढ़ता रहता है अगर हम यह सोचे की हमारी आयु रुक गई है या हम अभी भी वही है तो यह बहुत बड़ी गलतफहमी होती है ना तो आयु रूकती है और नहीं हम रुकते हैं अपने चेहरे को आईने में देखने से चेहरा हमेशा एक जैसा ही लगता है लेकिन हकीकत इससे बहुत दूर है समय के साथ दिल भी बदल जाते हैं दिमाग भी बदल जाते हैं और चेहरे भी बदल जाते हैं कहने का अभिप्राय यह है कि जीवन का अर्थ हर पल बदलना है वैसे तो किसी से भी बात करें एक ही जवाब आता है थोड़ा बिजी हूं समय नहीं है ऐसा नहीं होता है जीवन भी समय की ही परिभाषा है हर इंसान अपनी आवश्यकता के अनुसार अपनी प्राथमिकता तय कर लेता है कोई पूर्व तैयारी के साथ और कोई हाथों हाथ इसी के अनुसार वह अपना समय देता है मैं कई लोगों से मिलता हूं मैं चर्चा भी करता हूं और कहता भी हूं कि यदि आपके पास पर्याप्त समय है जो होता है बात को आगे बढ़ाने के लिए बोलना पड़ता है यदि आपके पास समय हो तो यह कार्य हम कर सकते हैं इस प्रसार से योजना बना सकते हैं तो एक ही उत्तर आता है अभी बिजी हूं समय मिलने पर देखते हैं हर दूसरा इंसान अपनी दैनिक दिनचर्या को बिजी का नाम दे देता है प्रतिदिन की जीवन शैली हमारे जीवन का हिस्सा होता है उसके लिए अतिरिक्त समय देने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि जीवन समय के साथ आगे बढ़ता है तो फिर हम कैसे कह सकते हैं कि हमारे पास समय नहीं है पर्याप्त समय कभी भी नहीं होगा मेरा ऐसा मानना है व्यक्तिगत सोच है लोगों की सोच कुछ और हो सकती है उसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता जो सत्य है वह सत्य है उसे नकारा नहीं जा सकता बहाने बहुत है जीवन में उतरा नहीं जा सकता हमें जीना है हर हाल में जीना है चाहे सुख हो या दुख हो इस जीवन में सब कुछ अस्थाई है केवल मात्र जन्म और मृत्यु दो शब्द स्थाई है इसके अलावा सब कुछ भ्रम है इंसान गलतफहमी के साथ जीता है और चला जाता है इसीलिए कहते हैं ना अगर कोई इंसान गलतफहमी में जीता है तो उसकी गलतफहमी को कभी भी दूर करने का प्रयास नहीं करना चाहिए यह जीवन का सारस्वत सत्य है। अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान

*जीवन में नियमिता जरूरी है*।               सभी को नमस्कार। अंतरराष्ट्रीय  योगा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।      मेरा व्य...
21/06/2024

*जीवन में नियमिता जरूरी है*। सभी को नमस्कार। अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है, मैं भी अपने स्कूल टाइम में, कॉलेज टाइम में अच्छा खिलाड़ी रहा हूं, क्रिकेट के माध्यम से जिला स्तर पर एवं राज्य स्तर की, विश्वविद्यालय स्तर की कई प्रतियोगिता में भाग लिया है, कोई भी खेल हो उसे खेलने से पूर्व शरीर को व्यायाम के द्वारा संतुलित किया जाता है, यदि आप प्रतिदिन व्यायाम नहीं करते हैं और केवल एक दिन ही करते हैं तो शरीर में लैक्टिक एसिड बन जाता है जो की विषैला होता है और वह कोशिकाओं के लिए हानिकारक रहता है और वह हमें दर्द के रूप में महसूस होता है, इसी प्रकार से कोई भी कार्य यदि हम नियमित रूप से नहीं करते हैं तो उसका लाभ हमें नहीं मिलता है। योग करना भी एक दैनिक कार्य है, जब तक नियमित रूप से अपनी दैनिक दिनचर्या में नहीं लेंगे तब तक आपको इसका लाभ नहीं मिल सकता है, किसी कार्य को करने का मकसद नहीं होना चाहिए केवल एक दिन के लिए योग करना है समाचार पत्रों में अपना नाम देना, अपनी फोटो देना, सोशल मीडिया के माध्यम से मार्केटिंग करना उचित नहीं है, वे लोग जो नियमित रूप से योग करते हैं उनके द्वारा आज के दिवस एक मैसेज के रूप में इस कार्य को करना चाहिए ताकि लोग भी उसका अनुकरण करें और जीवन में उसे नियमित रूप से करने का प्रयास करें अन्यथा एक दिन करने से उसका कोई उपयोग नहीं है केवल मात्र उसकी औपचारिकता पूरी होती है, मैं खुद शिक्षा विभाग से एक सेवानिवृत अधिकारी हूं मुझे पता है कि सरकार किस प्रकार से आदेश निकलती है और किस प्रकार से कर्मचारी उन आदेशों की पालना करते हैं केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए ऐसा नहीं होना चाहिए कुछ लोग इन आदेशों को पार्सल पार्ट ऑफ जब समझते हैं और कुछ लोग सोशल मीडिया पर अपने आप को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं जो कभी भी उचित नहीं है। धन्यवाद अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान

शुभ संध्या, नमस्कार। बैठे-बैठे विचार कर रहा था, इंसान जन्म लेता है बाल्य काल अवस्था गुजराती है, युवावस्था की ओर जिंदगी ध...
20/06/2024

शुभ संध्या, नमस्कार। बैठे-बैठे विचार कर रहा था, इंसान जन्म लेता है बाल्य काल अवस्था गुजराती है, युवावस्था की ओर जिंदगी धीरे-धीरे अग्रसर होती है, जिंदगी में कई मीठे खट्टे अनुभव होते हैं, जब तक माता-पिता का सर पर हाथ होता है, जिंदगी बहुत आसान लगती है, ऐसे वक्त में यह बात हर इंसान भूल जाता है कि उसका भी एक दिन अंत होना है, आज के परिपेक्ष में जब हम ऐसी बात करते हैं, तो सामने वाला इंसान एक ही बात कहता है, आपकी सोच नकारात्मक है, क्योंकि हर इंसान हकीकत से दूर भगाने की कोशिश करता है, हकीकत आसानी से गले नहीं उतरती है, इंसान अपने व्यस्त जीवन में कभी भी इस बारे में विचार नहीं करता है, क्योंकि उसे समय नहीं मिलता है, वह अपने पारिवारिक जिम्मेदारियां से, अपनी नौकरी से, अपने व्यवसाय से बंधा रहता है, एक प्रकार से कहते हैं, सोचने के लिए वक्त नहीं मिलता है, महिलाओं में ज्यादातर महिलाएं 50 की उम्र के पश्चात और पुरुष 60 की उम्र के पश्चात थोड़ा इस संबंध में विचार करना प्रारंभ कर देते हैं की जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है, यह बात 50 और 60 की उम्र के पश्चात ही ध्यान में आती है, इससे पूर्व तो वक्त ही नहीं होता सोचने का, समझने का, क्योंकि पारिवारिक जिम्मेदारियां से महिलाएं भी बन्धि रहती हैं और पुरुष भी, समय के साथ, आयु के साथ, हर इंसान चाहे वह पुरुष हो या महिला हो आध्यात्मिक की ओर सोचना प्रारंभ कर देते हैं, जब इंसान इन विषयों पर विचार करता है तो विचारों के समुद्र में एक प्रकार से डूब जाता है, उसे किनारा नहीं मिलता है, वह समुद्र में ही विचारों में ही डुबकी लगाता रहता है, बहुत ही हास्यप्रद बात है। लेकिन जीवन का सत्य यही है, इसे नकारा नहीं जा सकता है, यह मित्रता, यह पारिवारिक बंधन जैसी बातें हैं, विचार में नहीं आती है, इसीलिए कहते हैं ब्रह्म सत्य है, बाकी सब मिथ्या है। अरविंद कुमार व्यास जोधपुर राजस्थान

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