16/04/2026
"36 कौम के सहारा, जरूरतमंदों की आस": जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष व पूर्व #सांसद_जसवंत_सिंह_बिश्नोई उर्फ #एमपी_साहब
मारवाड़ की धरती पर जब भी निःस्वार्थ सेवा और इंसानियत की बात होती है, तो एक नाम हर जुबान पर जरूर आता है — जसवंत सिंह बिश्नोई। पूर्व सांसद होने के साथ-साथ वर्तमान में जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत जसवंत सिंह मारवाड़ के लोगों के दिलों में 'एमपी साहब' के नाम से बसे हुए हैं। यह संबोधन उन्हें सिर्फ उनके सांसद काल से नहीं, बल्कि जनता के अटूट विश्वास और प्रेम से मिला है, जो आज भी कायम है। उनके लिए न कोई दिन है, न रात। अस्पताल से जुड़ी किसी भी मदद के लिए अगर कोई एक फोन कर दे, तो जसवंत सिंह बिश्नोई हर हाल में मदद के लिए खड़े मिलते हैं।
#अस्पताल में हर मरीज का एक ही सहारा
फलोदी, जोधपुर और पूरे मारवाड़ क्षेत्र के सरकारी व निजी अस्पतालों में अगर आप किसी गरीब, लाचार मरीज के परिजन से पूछें कि "यहाँ आपका कौन है?", तो जवाब अक्सर एक ही मिलेगा — "एमपी साहब हैं न, जसवंत सिंह बिश्नोई।" खून की जरूरत हो, दवाइयों के पैसे न हों, डॉक्टर से मिलना हो या आईसीयू में बेड दिलवाना हो, जसवंत सिंह का फोन पहुंचते ही काम हो जाता है। वे खुद मरीजों से मिलते हैं, उनका हौसला बढ़ाते हैं और इलाज पूरा होने तक संपर्क में रहते हैं। उनके पास मदद मांगने वालों की कोई जाति या धर्म नहीं देखा जाता। इसी कारण लोग कहते हैं कि अस्पताल में हर जरूरतमंद का एक ही सहारा है — जसवंत सिंह बिश्नोई।
ौम का भरोसा, हर गली में पहचान
राजस्थान की '36 कौम' की बात जब एकता के संदर्भ में होती है, तो जसवंत सिंह उसका जीवंत उदाहरण हैं। बिश्नोई समाज से होने के बावजूद उनकी प्रसिद्धि किसी एक समाज तक सीमित नहीं है। राजपूत, मेघवाल, मुस्लिम, जाट, ब्राह्मण, नाई, कुम्हार — हर समाज के लोग उन्हें अपना मानते हैं। मारवाड़ के गांव-ढाणी में शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां उनके चाहने वाले न मिलें। चुनाव के समय नेता गांव-गांव जाते हैं, लेकिन जसवंत सिंह सांसद रहते हुए भी और अब भी, बिना किसी स्वार्थ के हर सुख-दुख में लोगों के बीच मौजूद रहते हैं।
#जीव_जंतु_कल्याण से मानव सेवा तक का सफर
सांसद का दायित्व निभाने के बाद जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में जसवंत सिंह बिश्नोई ने बेजुबानों की सेवा का जो बीड़ा उठाया, वही करुणा उन्होंने इंसानों के लिए भी दिखाई है। बिश्नोई समाज का मूल सिद्धांत ही 'जीव दया पालनी' है। इसी संस्कार को लेकर वे हिरण, गाय और अन्य घायल जानवरों के इलाज के लिए हमेशा आगे रहते हैं। लेकिन उनकी संवेदना यहीं नहीं रुकती। वे मानते हैं कि सबसे बड़ा धर्म मानव सेवा है और इसी भाव से वे हर जरूरतमंद की मदद के लिए तत्पर रहते हैं।
रात 2 बजे भी उठता है फोन
जसवंत सिंह की सबसे बड़ी खासियत उनकी 24x7 उपलब्धता है। उनके करीबी बताते हैं कि उनका फोन कभी स्विच ऑफ नहीं होता। आधी रात को भी अगर किसी एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति के लिए मदद चाहिए, तो वे तुरंत डॉक्टर को फोन करते हैं, एंबुलेंस का इंतजाम करवाते हैं और जरूरत पड़े तो खुद अस्पताल पहुंच जाते हैं। वे कहते हैं, "दुख और बीमारी टाइम देखकर नहीं आती, तो मदद भी टाइम देखकर कैसे दे सकते हैं।" यही कारण है कि बुजुर्ग उन्हें आशीर्वाद देते हैं और युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।
#सांसद का अनुभव, सेवा का संस्कार
जसवंत सिंह बिश्नोई पूर्व सांसद रहे हैं, इसलिए 'एमपी साहब' का संबोधन उनके साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा है। लेकिन खास बात यह है कि पद पर रहते हुए और पद के बाद भी उनका व्यवहार और जनसेवा का जज्बा एक जैसा रहा है। एक सांसद की तरह ही वे आज भी पूरे क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनते हैं और दिल्ली-जयपुर तक पैरवी कर उनका समाधान करवाते हैं। अधिकारियों के पास उनकी बात का वजन इसलिए है क्योंकि सब जानते हैं कि वे किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि किसी गरीब के हक के लिए आए हैं। उन्होंने साबित किया कि कुर्सी जाने से सेवा का भाव नहीं जाता।
निष्कर्ष: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
आज के दौर में जब राजनीति और समाजसेवा में अंतर मिटता जा रहा है, जसवंत सिंह बिश्नोई जैसे लोग उम्मीद की किरण हैं। उन्होंने सांसद रहते हुए भी और अब बोर्ड अध्यक्ष के रूप में भी दिखा दिया कि नीयत साफ हो तो हर पद सेवा का माध्यम बन जाता है। '36 कौम' का जो विश्वास उन्होंने कमाया है, वह किसी चुनावी जीत से बहुत बड़ा है। मारवाड़ का हर जरूरतमंद जानता है कि मुसीबत के समय एक दरवाजा हमेशा खुला मिलेगा — 'एमपी साहब' यानी जसवंत सिंह बिश्नोई का दरवाजा। उनकी यह सेवा-यात्रा यूं ही चलती रहे, यही पूरे मारवाड़ की दुआ है।
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