वीर शहीद वेलफेयर संस्था

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वीर शहीद वेलफेयर संस्था जय हिन्द

17/03/2022
13 मार्च 2022 को गोतावर बाँध अनावरण समारोह में वीर शहीद वेलफेयर संस्था के समस्त सदस्यगण एवं समस्त शहीद परिवार सादर आमंत्...
11/03/2022

13 मार्च 2022 को गोतावर बाँध अनावरण समारोह में वीर शहीद वेलफेयर संस्था के समस्त सदस्यगण एवं समस्त शहीद परिवार सादर आमंत्रित है।

-: आमंत्रित स्थल :-
गोतावर मंदिर प्रांगण, बस्तवा माताजी
तहसील-बालेसर,(शेरगढ़ परगना) जिला- जोधपुर (राज.)

 #बलिदान__दिवस---- #मरणोपरांत_वीर_शहीद_धोकल_सिंह शौर्य की सरजमी और सूरमाओं के धरातल शेरगढ़ परगने के सेखाला (जूनावास) मे 1...
30/04/2021

#बलिदान__दिवस----

#मरणोपरांत_वीर_शहीद_धोकल_सिंह

शौर्य की सरजमी और सूरमाओं के धरातल शेरगढ़ परगने के सेखाला (जूनावास) मे 1 दिसम्बर,1923 को ठाकुर सिमरथ सिंह जी के घर माता श्रीमती मोती कंवर की कोख से वीर धोकल सिंह का जन्म हुआ ।

1 दिसम्बर 1944 को 06 राजपूताना राइफल्स मे भर्ती हुए।

लड़ाई- उरी की लड़ाई

भारत-पाक कश्मीर युद्ध 1947-48

30 अप्रैल 1948 को इस लौकिक दुनिया के आँगन से सदा-सर्वदा के लिए अदृश्य हो गया। मगर पथ प्रेरक के रूप में वो मतवाला वीर आज भी हमारी धड़कन में विद्यमान है।

वीर धोकल सिंह को मरणोपरांत "महावीर चक्र" से सम्मानित किया गया।

लेकिन दुःख के साथ कहना पड़ता हैं की हमारे शेरगढ़ परगने के एकमात्र महावीर चक्र विजेता *धोकल सिंह* के परिवार की तरफ आज तक किसी भी सरकार ने नहीं दिया।
आज शहीद परिवार सैकड़ो असुविधाओ से अँधेरे के जीवन में अपना जीवन निकाल रहे हैं।
इनके साथ ही सरकार 1999 से पहले के सभी शहीद परिवारों को भूल रही हैं।
#मेरे_युवा_साथियों_से_निवेदन_हैं_की_इस_मुद्दे_को_जितना_हो सकें सोशल मीडिया के जरिये जनप्रतिनिधियो तक पहुचाये ताकि सरकार की आँखे खुल सकें।*

*विनीत*
वीर शहीद वेलफेयर संस्था (रजि.) राजस्थान

 #विशेष_जानकारी....🇮🇳🇮🇳🇮🇳 #शहीद सुबेदार रामस्वरुप सिंह विक्टोरिया क्रोस का जन्म 12 अप्रेल 1919 को ठाकुर जोरावर सिंह‌ के ...
16/03/2021

#विशेष_जानकारी....🇮🇳🇮🇳🇮🇳
#शहीद

सुबेदार रामस्वरुप सिंह विक्टोरिया क्रोस का जन्म 12 अप्रेल 1919 को ठाकुर जोरावर सिंह‌ के घर गांव खेड़ी-तलवाना जिला महेंन्द्रगढ़(हरियाणा) में हुआ।ये तंवर राजपूत हैं।ये 12 अप्रेल 1937 को प्रथम पंजाब रेजिमेंट के झेलम ग्रुप में भर्ती हुए।ये 25 अक्टूबर 1944 को शहीद हो गए।
पांचवां भारतीय डिवीजन जिसे अग्नि पिंड़ भी कहा जाता है बर्मा के टिड्डिम क्षेत्र में उतरा।डिवीजन के सरकारी इतिहास में लिखा है कि इस डिवीजन के सैनिकों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए अति ढालु पहाडियों पर से एक हाथ पर रेंग कर चलना पड़ा।यह रास्ता चीन की पहाड़ियों के मध्यम था और इसे पार करने के लिए पांच सप्ताह का समय लग गया।ये रास्ते इतने खतरनाक थे कि वर्षों से पार जाने वाले खच्चर भी इन ढालों पर आकर भयभीत हो उठते थे।
प्रथम पंजाब की द्वितीय बटालियन ने सियालम बम के ठिकाने पर कब्जा किया।यह स्थान टिड्डिम से कैनेडी शिखर तथा फोर्ट हवाइन मार्ग के सामने था तथा इस पर जापानियों की कड़ी पहरेदारी थी।हमारे सैनिकों को इन्हीं विषम जंगलों से भरे तथा अभेद स्थल पर जापानियों से मुठभेड करनी पड़ी थी।हमारे सैनिकों के पास पहाड़ी तोपें थीं उन्हीं से वे मुकाबला कर रहे थे तथा दुश्मन के सम्पर्क मार्ग को विछिन्न कर रहे थे।चार सप्ताह तक प्रथम पंजाब रेजिमेंट ने जापानियों की नींद‌ हराम कर दी तथा उन्हें व्यस्त रखा। इस स्थान पर प्रथम पंजाब रेजिमेंट के सुबेदार रामस्वरूप सिंह ने 25 अक्टूबर 1944 को विक्टोरिया क्रोस अर्जित किया।यह वीरता पदक उन्हें अदम्य साहस और असाधारण सेवा के लिए प्रदान किया गया ।उन्होंने अपने जीवन की सर्वौच्च बलि दी तथा युध्द क्षेत्र में वीरगति पाई।उनका पार्थिव शरीर" बिग हिल" पर आज भी गौरव गाथा का बखान कर रहा है।रामस्वरूप सिंह दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढे ।उन्हें मौत का डर था या नहीं ये तो नहीं कहा जा सकता‌ किंतु यह बात स्पष्ट है कि उन्होंने मन में यह धारणा बना ली थी कि आज वे जापानियों से निपटकर ही रहेंगे।यह संकल्प उसने बटालियन से प्लाइन के युद्ध स्थल पर रवाना होते समय अपने कम्पनी कमांडर को बतलाया था।बटालियन‌ जापानियों के एक‌ ऐसे गढ़ पर आक्रमण कर रही थी जो प्राकृतिक रुप‌ से स्वत: ही रक्षात्मक स्थिति में था।साथ ही जापानियों की संख्या भी अधिक थी और हाल ही में उनकी एक ताजा कुमुक भी वहां पहचीं थी।
प्रथम पंजाब के एक सेक्सन ने एक ढलान पर हमला किया और जापानियों ने जवाब में भारी गोलाबारी की।जापानियों को ऊपर आते प्रथम पंजाब के सैनिकों को निशाना बनाना सुगम दिखाई दिया।उन्होंने कड़ी मार की तथा प्रथम पंजाब के सैनिकों ने अपनी रक्षा के लिए जहां भी स्थान मिला पनाह लेने की कोशिश की।सुबेदार रामस्वरूप सिंह ने यह देख कर एक अन्य सेक्सन की कमान संभाली और उन्होंने अपने लक्ष्य की पूर्ति हेतु तथा आगे बढ़ने वाले सैनिकों के लिए रास्ता बनाने के लिए संगीन युद्ध का सहारा लिया । रामस्वरूप सिंह ने तलघरों में बैठे जापानियों पर हमला करना प्रारम्भ किया।इस प्रकार अन्त में रामस्वरूप सिंह अपने‌ लक्ष्य की प्राप्ति में सफल हुए। जापानियों ने भी उन‌‌ पर घमासान जवाबी हमला किया।इसमें रामस्वरूप सिंह दो जगह ज़खमी हुए।जांघ पर गोली लगने से उनकी दोनों टांगें लहू लुहान हो गई थी। किन्तु उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और हमला जारी रखा। उन्होंने अपनी बूट पट्टी खोली तथा जांघ के घाव पर बांध ली।इस मुठभेड में रामस्वरूप सिंह ने स्वयं चार जापानियों को मौत के घाट उतारा तथा जापानियों के हमले को नाकामयाब कर दिया ।

रामस्वरूप सिंह ने अनोखे जोश और साहस के साथ अपनी कार्रवाई जारी रखी तथा अपने साथियों का नेतृत्व करता रहा।वह संगीन से जापानियों को घायल करता रहा तथा एक अन्य को गोली का शिकार बनाया। इतने में ही कुल पांच गज के फांसले पर से दुश्मन के मौर्चे पर से एक गोला छुटा जो सीधा रामस्वरूप सिंह की छाती में आकर लगा।
इसके बाद‌ अपने अन्तिम सांस लेते समय अपने प्लाटून हवलदार को ऊंची आवाज में कहा "मैं तो मर रहा हूं पर तुम लडों और इन दुश्मनों का सफाया‌ करदो "।इन शब्दों का‌ कहना था कि सारी की सारी कंपनी‌ में लड़ने की नई ताकत सी आ गई।
उधर जब रामस्वरूप सिंह ‌के मृत शरीर को गोले गोलियों की बौछार में मैदान से उठा लाने की आज्ञा मिली हर किसी ने इस कठिन काम के लिए अपने आप को आगे (वालण्टियर) कर दिया।

हिन्दुस्तान के कमांडर-इन-चीफ जनरल सर क्लाड आकिनलेक ने स्वर्गीय सुबेदार रामस्वरूप सिंह को विक्टोरिया क्रोस मिलने पर प्रथम पंजाब रेजिमेंट की बटालियन को बधाई का सन्देश भेजा जिसमें --
श्री कमांडर-इन-‌चीफ महोदय लिखते हैं --"शोक है कि सूबेदार जीते जी यह सम्मान न ले सके।मुझे विश्वास‌ है कि रेजिमेंट के जवानों को इनकी मृत्यु से बड़ा शोक हुआ होगा और वे उनके नाम को सदा आदर के साथ लेंगे।
प्रथम पंजाब के नाम तार में श्री कमांडर-इन-‌चीफ लिखते हैं:- "स्वर्गीय सुबेदा‌र रामस्वरूप सिंह ने बज़ोड कारनामा दिखाकर रेजिमेंट के लिए पहला विक्टोरिया क्रोस जीता।फस्ट(प्रथम) बटालियन के कर्नल के रूप में मेरे लिए यह बड़े ही गर्व और अत्यंत प्रसन्नता की बात है।"

इस लड़ाई में 1291‌ जापानी मारे गए थे।

सुबेदार रामस्वरूप सिंह के पुत्र श्री तेजपाल सिंह अजमेर के किंग जॉर्ज स्कूल से पढकर 1962 में चीन के युद्ध के समय राजपूताना रा‌‍‌इफल्स‌ में भर्ती हुए।

सुबेदार रामस्वरूप सिंह के दो पोते हैं। इनके बड़े पोते श्री रिपुदमन नम्बरदार हैं जो गांव खेड़ी-तलवाना के सबसे बड़े जमींदार हैं।
दूसरे पोते श्री शिवकुमार 24 मैकेनाइज में हवलदार हैं तथा कुश्ती के कोच हैं।
सुबेदार रामस्वरूप सिंह की बहादुरी के लिए म्यान्मार(बर्मा) में तथा लंदन में इनका शहीदी स्मारक भी बनाया गया है।
सुबेदार रामस्वरूप सिंह को हरियाणा स्वर्ण जयंती पर हरियाणा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
इनके परिवार को 200 बिघा जमीन सरकार की तरफ से दी गई। Ripudaman gs/0 Subedar Ramsarup Singh victoria cross
9416838582

19/12/2020

जंग ए आजादी के महानायक,काकोरी कांड के नायक, अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्लाह खान के शहादत दिवस पर इन शहीदों को कोटि कोटि नमन ! 💐💐जय भारत 🇮🇳🙏🏻

 #दिलावर_अब_सिर्फ_दिलावर_राठौड़_नहीं_क्रन्तिकारी_दिलावर_राठौड़_है ।समय निकालकर पढ़े व शेयर करे....भारत पाक युद्ध  1971 के प...
15/12/2020

#दिलावर_अब_सिर्फ_दिलावर_राठौड़_नहीं_क्रन्तिकारी_दिलावर_राठौड़_है ।
समय निकालकर पढ़े व शेयर करे....

भारत पाक युद्ध 1971 के पर बनी फ़िल्म "बॉर्डर" यह फ़िल्म 1997 में बनी थी । इस फ़िल्म में भैरो सिंह को शहीद होना बताया गया है, असल जिंदगी में वह आज भी जीवित है। फ़िल्म में भैरो सिंह का सीन बॉलीवुड स्टार सुनील शेट्टी ने निभाया...!

सेना मैडल भैरो सिंह जी वास्तव में एक रियल हीरो है। आज भैरो सिंह को जो भी मान-सम्मान मील रहा है, वह उनके हक़दार है। लेकिन आज से कुछ साल पहले किसी को पता तक नहीं था की भैरो सिंह जी आज भी जीवित है । वह एक गुमनाम जिंदगी जी रहे थे । ऐसे सैकड़ो योद्धा आज भी जीवित है, जो आज भी एक गुमनाम जिंदगी जी रहे है, हम सबको मिलकर उनका भी सम्मान करना चाहिए ।
लेकिन यह नहीं भूले की इस विशेष योद्धा की बात को आगे तक पहुँचाने वाला कोही और नहीं हमारे क्षेत्र (बेलवा) के पत्रकार दिलावर सिंह राठौड़ है। दिलावर सिंह राठौड़ ने वास्तव में बता दिया की पत्रकारिता की ताकत क्या होती है, पत्रकारिता जगत का जो पत्रकार सत्य के रूप में ईश्वर को पहचान लेता है तो फिर दुनिया की कोई ताकत उसे सच्चाई को उजागर करने से रोक नहीं सकती है।
आज से हमें एक नया मिशन देना है आज से दिलावर सिंह राठौड़ सिर्फ दिलावर राठौड़ ही नहीं क्रांतिकारी पत्रकार दिलावर राठौड़ है।
हमें विश्वास है दिलावर राठौड़ पर और आपकी कलम पर, कलम वह शक्तिशाली हथियार है जिसकी ताकत से विश्व को बदला जा सकता है।
Rathore

जय भारत 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

विनम्र श्रद्धांजलि #अत्यंत दुखद घटना  कश्मीर में देश की वीरांगना बहन कविता सैनी शहीद हो गई है ।वीरांगना को नमन...आपको दे...
11/12/2020

विनम्र श्रद्धांजलि

#अत्यंत दुखद घटना कश्मीर में
देश की वीरांगना बहन कविता सैनी शहीद हो गई है ।
वीरांगना को नमन...
आपको देश हमेशा याद करते रखेगा ।

जय भारत....🇮🇳🇮🇳

शहीदों को नमन
29/11/2020

शहीदों को नमन

संस्था के कदम बाड़मेर की तरफ अब आपके शुभकामनाओ का इंतजार... आपके द्वारा दी गई शुभकामनायें हमें एक अलग शक्ति प्रदान करती ह...
25/11/2020

संस्था के कदम बाड़मेर की तरफ अब आपके शुभकामनाओ का इंतजार... आपके द्वारा दी गई शुभकामनायें हमें एक अलग शक्ति प्रदान करती है 🌹🌹🇮🇳🇮🇳🇮🇳
शहीद दीपा राम अमर रहे 🇮🇳🇮🇳

शहीदों की स्मृति में रक्तदान शिविर का पोस्टर विमोचन स्थान:- महाराणा प्रताप स्कूल, पैट्रोल पंप के सामने बेलवा, बालेसर, जो...
17/09/2020

शहीदों की स्मृति में रक्तदान शिविर का पोस्टर विमोचन

स्थान:- महाराणा प्रताप स्कूल, पैट्रोल पंप के सामने बेलवा, बालेसर, जोधपुर (राज.)

दिनांक:- 20 सितंबर 2020, रविवार

नाम रजिस्ट्रेशन करवाये:- 06375723009, 09057070405

Address

Jodhpur
342022

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