08/05/2022
गांव बिनौरा जिला कन्नौज उत्तर प्रदेश सन 1933 16 जून को जन्मे सुरेंद्र बहादुर सिंह कुशवाह उर्फ गुरुजी का सफर ।
सुरेंद्र बहादुर सिंह जी वह उनके छोटे भाई रविंद्र बहादुर सिंह जी बचपन से ही खेलकूद खाना पीना इत्यादि तो शौक रखते थे गांव में सुख व संपन्न परिवार होने की वजह से खूब एस मौज में बचपन बिताया करते थे कहा जाता है कि वह स्कूल भी हाथी पर जाया करते थे व उनके घर के खूंटी पर दो हाथी बंदे रहते थे । वही जोधपुर राजस्थान में बहादुर सिंह जी की सगी मौसी का ससुराल था उनकी मौसी का विवाह कप्तान साहब जी के पुत्र के साथ हुआ कप्तान साहब जी उस समय जोधपुर दरबार में स्थान ग्रहण करते थे जोधपुर में तमाम जमीन जायदाद व हवेलीया उनके अधीन थी । जब गांव में बहादुर सिंह जी का विवाह तय किया तो वहा से नाराज होकर जोधपुर अपनी मौसी के पास चले आए और जोधपुर रेलवे डिपार्टमेंट में नौकरी करने लगे । बहादुर सिंह जी बचपन से ही पहलवानी का शौक रखते थे । उन्होंने जोधपुर आकर एक व्यायामशाला चालू करी , उस समय जोधपुर में बहुत से दंगे हुआ करते थे बहादुर सिंह जी ने व्यामशाला के रूप में अपनी खुद की एक टीम तैयार करी जो इन दंगों में हिंदुओं की रक्षा करना वह मंदिर तोड़ने, पीपल काटना, हिंदुओं की जमीन हड़पना इत्यादि को रोकने का प्रण लिया। सन 1966 मैं जब पुनः ताजिए की आड़ में मुसलमान पीपल तोड़कर वह हिंदुओं पर टिप्पणी कर आगे बढ़ रहे थे तभी बहादुर सिंह जी वह उनके साथियों ने उनको ऐसा करने से रोका उनके ना रुकने पर वह जोर आजमाइश करने पर वहां झगड़ा हुआ नतीजा यह रहा पूरे एशिया में सिर्फ जोधपुर राजस्थान एक ऐसा शहर रहा जहां ताजिए निकलना बंद हो गए इसके चलते जोधपुर में और भी दंगे भड़कने लगे वही बहादुर साहब वह उनके साथी हथियार लैस होकर हिंदुओं के घर मोहल्लों के बाहर रात में पहरा देते । वही एक बार किसी हिंदू की जमीन पर कब्जा की बात पर वहा पौचे तो वह सामने वालो का संख्या बल अधिक होने पर वहा बात बिगड़ गई और बहादुर सिंह जी के पेट पर एक चाकू का वार लग गया जिससे वह गायक हो गए पर वही लड़ते रहे और जमीन पर से कब्जा छुड़ा लिया । परंतु इस वार से उनके पेट पर 32 टाके लगे और तो और जिस हॉस्पिटल में बहादुर सिंह जी का इलाज चल रहा था उसी हॉस्पिटल में उसी समय उनके तीसरे पुत्र का जन्म हुआ । इसके बाद उन्होंने जोधपुर शहर में 100 से अधिक व्यायामशाला खोलने का प्रण लिया और रामनवमी दशहरा गणेश विसर्जन इत्यादि प्रोग्राम जोधपुर की धरा पर चालू करें जिसमें वह लाठी, तलवार, भाला, चाकूबाजी इत्यादि का प्रदर्शन कर जुलूस आज दिन तक निकालते हैं बहादुर साहब की व्यामशाला से जोधपुर के राजा महाराज गज सिंह जी राठौर व कहीं नेता जैसे गजेंद्र सिंह जी शेखावत विजय जी पूनिया वह कई एमएलए पार्षद मेयर इत्यादि व्यायामशाला से जुड़े रहे वही खेलकूद में नेशनल लेवल के बॉक्सर रेसलर पावर लिफ्टर जिम्नास्ट स्ट्रैंथ लीटर इत्यादि व्यामशाला से निकले है वही आज भी बेंच प्रेस का नेशनल रिकॉर्ड व्यामशाला के ही पहलवान के नाम पर दर्ज है यही सब के चलते उनको गुरु जी व व्यायाम शाला के वरिष्ठ दलपति की उपाधि मिली ।
बहादुर सिंह जी ने जोधपुर में अनेको हिंदू वादी संघठन को सहारा देकर वा व्यायाम शाला के लड़के देकर स्वंत्र रूप से खड़ा होने में सहायता की हैं। वही आज के समय में जहा जिम की फीस 500 से 1000 रुपए प्रति माह होती हैं। वहा सुरेंद्र बहादुर सिंह जी अपनी व्यायाम शाला में निशुल्क रूप से सेवाए दे रहे है। और तो और जोधपुर के सभी जिम जैसे तलवरकर जिम गोल्ड जिम में व्यामयम शाला के ही लड़के ट्रेनिंग देने जाते है।