डुग्स बावरी सेवा संस्थान जोधपुर

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डुग्स बावरी सेवा संस्थान जोधपुर समाज सेवा में समर्पित संस्थान ।

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11/04/2026

Did you know that most people believe airport transfers are a hassle? But, the reality is that a reliable cab service like Palak tour and travels can make all the difference. By choosing a trusted car rental service, you can ensure a stress-free journey to and from the airport. Book with us today and experience the difference for yourself!

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09/04/2026

Namrata Basu from Jodhpur raves about her seamless experience with Palak tour and travels! She loved the prompt and courteous cab service, making her trip a breeze. Try our reliable car rental services in Jodhpur for a stress-free journey.

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09/04/2026

Ride the World Your Way! Experience the best cab service in Jodhpur with our reliable car rental solutions. Whether you're a local or a tourist, our travel guide is your ultimate companion to explore the city. Visit today and discover the beauty of Jodhpur like never before!

JodhpurTourism

Waiting in traffic for a cab can be a frustrating experience, especially when you're running late for an important appoi...
07/04/2026

Waiting in traffic for a cab can be a frustrating experience, especially when you're running late for an important appointment or event. In fact, the average person spends a significant amount of time, equivalent to around 12 days in a lifetime, stuck in traffic waiting for a cab. This statistic highlights the importance of planning ahead and managing your time effectively, especially when relying on public transportation. Plan your time wisely.

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06/04/2026

Ride the City, Your Way!

Experience the best cab service in Jodhpur with Palak Tour and Travels, your trusted car rental partner. Whether you're exploring the city's vibrant streets or heading out of town, our sleek and comfortable taxis will get you there in style.

Imagine yourself gliding through Jodhpur's bustling streets, taking in the iconic views of the city's majestic architecture and vibrant markets. Our expert drivers will ensure a safe and smooth journey, so you can focus on what matters most - making unforgettable memories.

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जोधपुर जिले के लेवरा कल्ला गांव मे हमारे बावरी समाज के घर मे बीते दिनो एक अनहोनी घटना हुई है, यह जो छोटे बच्चे  दिख रहे ...
29/12/2023

जोधपुर जिले के लेवरा कल्ला गांव मे हमारे बावरी समाज के घर मे बीते दिनो एक अनहोनी घटना हुई है, यह जो छोटे बच्चे दिख रहे है इनके पिता जी का किसी बीमारी कारण मृत्यु हो गया, अब इस घटना मे बहुत ही बड़ी दुख की बात यह है की इन बच्चों के आगे पीछे कोई नहीं है, नहीं तो नाना-नानी है, और नहीं दादा -दादी 😭
बावरी समाज और सभी समाज वर्ग के भामाशाह से हाथ जोड़ के निवेदन है की इन बच्चों के लिए थोड़ी बहुत आशा की किरण बन के जैसी जिनकी इच्छा हो सहयोग कर 👏🙏
स्व. नेमाराम की पत्नी के ac. मे आप अपनी सहयोग राशि डाल सकते हो!
7878803323
Mamta phone pe

05/10/2023
रक्तदान के फायदे-नियमित रक्तदान से हार्ट अटैक का खतरा कमनियमित रूप से ब्लड डोनेट करने से बॉडी में स्टोर किए गए आयरन की म...
28/09/2023

रक्तदान के फायदे-

नियमित रक्तदान से हार्ट अटैक का खतरा कम
नियमित रूप से ब्लड डोनेट करने से बॉडी में स्टोर किए गए आयरन की मात्रा में कमी आती है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कम होता है. ब्लड डोनेशन से बॉडी में नई कोशिकाएं बनने में मदद मिलती है. रक्तदान करने के 48 घंटे के भीतर बॉडी बोनमैरो के साथ मिलकर नया ब्लड बना लेती है.

सही प्रदेश वासियों से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधारे व इस नेक कार्य में अपना योगदान देवें ।

सर्व समाज के लोगों से विनती है ज़्यादा से ज्यादा संख्या में पधारकर इस महान कार्य में अपना योगदान देवे ।
18/09/2023

सर्व समाज के लोगों से विनती है ज़्यादा से ज्यादा संख्या में पधारकर इस महान कार्य में अपना योगदान देवे ।

*बेसहारा एवं अनाथ बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए आर्थिक सहायता हेतु विनम्र अपील*🙏🙏🙏🙏🙏*सोयला बावड़ी निवासी रामेश्वर बावरी...
05/02/2023

*बेसहारा एवं अनाथ बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए आर्थिक सहायता हेतु विनम्र अपील*
🙏🙏🙏🙏🙏

*सोयला बावड़ी निवासी रामेश्वर बावरी (चौकीदार )का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया, जो कि माता पिता का इकलौता बेटा था,इनके परिवार में इनकी अंधी माँ,पत्नी ,7 पुत्रियाँ,1 पुत्र रामेश्वर ही घर में एकमात्र कमाऊ सदस्य था ,जो सड़क हादसे में काल कवलित हो गया, बड़े दुर्भाग्य की बात है कि ऐसी अनहोनी (पिता की मृत्यु और पुत्र का जन्म ) इनके परिवार में तीसरी पीढ़ी है ,वर्तमान में इनके परिवार में दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मानवता के नाते हम सबका फ़र्ज बनता है कि अपनी तरफ से जितनी हो सके आर्थिक सहायता हेतु आगे आएं और दूसरों को भी सहयोग के लिए प्रेरित करें ताकि एक उजड़ते परिवार को फिर से जीने के लिए सम्बल मिल सकें ।*

*बैंक खाता जानकारी*

*Name -SANTOSH W/O RAMESHWAR*
*A/C-83084388699*
*IFSC CODE-RMGB0000321*
*RMGB BANK SOYALA*

*!! निवेदक !!*
🙏🙏🙏🙏
*समस्त ग्रामवासी*
*सोयला बावड़ी*

*Phone pe -7413890557🙏 गूगल पे फोन पे नंबर*

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 #हमारे_अपने_केरियर_में_हमारी_रुचि_का_महत्व ❤आप और हम इस मायने में बहुत भाग्यशाली हैं कि आप एक बहुत ही आजाद ख्याल और आजा...
08/04/2022

#हमारे_अपने_केरियर_में_हमारी_रुचि_का_महत्व ❤

आप और हम इस मायने में बहुत भाग्यशाली हैं कि आप एक बहुत ही आजाद ख्याल और आजाद अर्थव्यवस्था की दुनिया में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। यदि आप आज से बीस साल पहले के हिन्दुस्तान के बारे में अपने दादा और पिता से पूछें तो वे जो बातें आपको बताएँगे उन पर शायद आप आसानी से यकीन नहीं करेंगे। हो सकता है कि उनकी बहुत-सी बातें आपको किसी हवाई दुनिया की परिकथा जैसी मालूम पड़ें, लेकिन वे हकीकत थीं।

मैं आज के इस समय की तारीफ इसलिए कर रहा हूँ, क्योंकि यह वह समय है, जिसने दुनिया के युवाओं को उनकी अपनी-अपनी क्षमताओं के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराएँ हैं। आज ऐसा नहीं रह गया है कि या तो आप अपने करियर के लिए कोई नौकरी करें या फिर कोई छोटी-मोटी दुकानदारी। जब ऐसा था, उस समय न जाने कितनी प्रतिभाएँ यूँ ही सिसक-सिसककर मर गईं, क्योंकि उनके लिए कोई रास्ता नहीं था।

आज आपके साथ ऐसा नहीं है। आज यदि आपको खाना बनाना आता है, तो आप संजीव कपूर बन सकते हैं और यदि आपको कपड़े डिजाइन करना आता है तो मनीष मल्होत्रा। क्या आप भारतीय इतिहास का कोई ऐसा दौर बता सकते हैं, जिसमें खाना बनाने वाले और ड्रेस डिजाइन करने वाले को इतना धन और इतना यश दोनों ही मिले हों। यह आज ही संभव है और आप इसी महत्वपूर्ण दौर में रह रहे हैं।
आप बहुत भाग्यशाली हैं कि आजाद अर्थव्यवस्था की दुनिया में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। यदि आप आज से बीस साल पहले के हिन्दुस्तान के बारे में अपने दादा और पिता से पूछें तो वे जो बातें आपको बताएँगे उन पर शायद आप यकीन नहीं करेंगे।
इसलिए यह बहुत जरूरी हो गया है कि अब आप अपने करियर की योजना परंपरागत नजरिए से न देखकर एक नए नजरिए से देखें और इन नए नजरिए की शुरुआत इस बात से होगी कि आप अपनी शक्ति को पहचानें, आप अपनी क्षमता को पहचानें, क्योंकि आपके अंदर प्रकृति ने उपहार के रूप में जो जन्मजात क्षमता दी है, उसे आप कम मेहनत करके बहुत ऊँचाई तक बढ़ा सकते हैं और समाज इस बात के लिए तैयार है कि वह आपकी इस क्षमताकी कद्र करेगा और इसके बदले में आपको वह हर एक चीज देगा, जिसकी आपको जरूरत है और जो वह दे सकता है।

अपनी क्षमता को पहचानने के मामले में हममें से अधिकांश लोग मायोपिया के शिकार हैं। करियर की परंपरा से चली आ रही परिभाषा ने दूर तक सोचने की हमारी क्षमता को नष्ट कर दिया है। इसलिए हमारी दृष्टि 'ज्ञान' तक सीमित रह जाती है। जो पढ़ने में जितना अच्छा होगा, उसका करियर उतना ही अच्छा जान पढ़ने लगता है। हो सकता है कि कुछ दशक पूर्व तक यह सोच सही हो। लेकिन क्या यह आज भी सही है?

यहाँ हमें यह समझना ही होगा कि 'ज्ञान' और 'प्रतिभा' में फर्क होता है। सचिन तेंडुलकर अभी तक ग्रेजुएशन नहीं कर पाए हैं, लेकिन उनके पास क्रिकेट खेलने की अद्भुत प्रतिभा है। महान गणितज्ञ रामानुजम को इतिहास का विषय पल्ले पड़ता ही नहीं था। नेपोलियन जिस मिलट्री अकादमी में पढ़ते थे, वहाँ के 50 स्टूडेंट्स में उनका स्थान नीचे से दूसरा था। 'थोक आविष्कारक' के रूप में विख्यात थॉमस अल्वा एडीसन को उनके शिक्षक बुद्धु बताते हुए अपने स्कूल से ही निकाल दिया था।

ये जानने का स्रोत : नई दुनिया अवसर (Book)

बिल गेट्स ही कौन से बहुत पढ़े-लिखे हैं, जिन्होंने सूचना के क्षेत्र में एक क्रांति मचा दी है। इन लोगों को तथा इन जैसे सैकड़ों लोगों के सफल जीवन की कहानियाँ हमें यह विश्वास करने को बार-बार बाध्य करती है कि 'प्रतिभा' महत्वपूर्ण है। 'ज्ञान' भी महत्वपूर्ण है, किंतु वही सब कुछ नहीं है।

इस प्रकार जब हम स्वयं को पहचानने के दौर से गुजर रहे हों, तो हमारी शक्ति को इन तीन श्रेणियों में परखा जाना चाहिए- 1. शारीरिक शक्ति, 2. मानसिक शक्ति, 3.आध्यात्मिक शक्ति जिसे आप सृजनात्मक शक्ति भी कह सकते हैं।

पहले हमें मोटे तौर पर यह देखना चाहिए कि इन तीनों शक्तियों में से हममें कौन सी शक्ति प्रबल है। याद रखिए कि प्रत्येक के पास ये तीनों ही शक्तियाँ कुछ न कुछ मात्रा में होती ही हैं। लेकिन हमें यहाँ देखना यह होगा कि हमारे अंदर इनकी मौजूदगी कितनी-कितनी है। निश्चित रूप से इनमें से जिसकी उपस्थिति सबसे अधिक होगी, हमें उसे ही अपनी मूल शक्ति मानना चाहिए तथा शेष दोनों शक्तियों का उपयोग इस मूल शक्ति को बढ़ाने के लिए करना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी में शारीरिक क्षमता का प्राबल्य है, तो उसे श्रम प्रधान, शक्ति प्रधानक्षेत्र जैसे- खेल, कृषि आदि क्षेत्रों को चुनना चाहिए। ज्ञान के प्रति उत्सुक युवा को अकादमिक क्षेत्र में तथा सर्जनात्मक रुचि वाले युवा को कला, साहित्य-संस्कृति वाले क्षेत्र को चुनना चाहिए।

सबसे पहले तो हमें इसी का चुनाव करना चाहिए कि 'मुझे इस क्षेत्र में जाना है।' क्षेत्र का चयन कर लेने के बाद फिर यह चुनना होगा कि उस क्षेत्र के किस भाग में जाना है। जैसे यदि आपने यह निर्णय ले लिया कि ज्ञान के क्षेत्र में जाना है तो अगला निर्णय यह लेना होगा कि ज्ञान के किस क्षेत्र में जाना है- डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक आदि-आदि। निश्चित रूप से यह निर्णय लेते समय तीन तत्व सबसे प्रमुख भूमिका निभाएँगे। ये हैं कि 1. आपकी रुचि क्या है? 2. समाज में किसकी क्या स्थिति है तथा 3. आपकी अपनी स्थिति क्या है?

यही क्रम फिर आगे चलेगा कि आप क्या बनना चाहेंगे और क्यु बनना चाहेंगे

अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए हमें इस बारे में पूरी गंभीरता के साथ विचार करके निर्णय लेना चाहिए

ये सब में आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि हाल में चर्चा में आई एक बावरिया समाज की लड़की की रुचि और लगन से मिली उसकी सफ़लता से आपको अवगत कराया जाये,
आइये जानते हैं!!

घुमंतू समुदाय बावरिया से संबंध रखने वाले मजदूर टीकूराम और उनकी पत्नी नान्ति देवी के बेटी हुई । शुरू में बेटी #रजनी_बावरिया आम बच्चों की तरह ही थी । लेकिन , उम्र बढ़ने के बाद भी उसकी एक्टिविटी पांच साल के छोटे बच्चे जैसी ही थी । परिवार झोपड़ी में रहता था । मजदूरी का काम करने वाले माता - पिता ख़राब आर्थिक स्थिति के चलते उसका इलाज नहीं करवा सके । मानसिक रूप से कमजोर अब 14 साल की उसी रजनी ने भुवनेश्वर ( उड़ीसा ) नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर दौड़ , लम्बी कूद में दो सिल्वर मेडल और 400 मीटर दौड़ में एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है ।

पढ़िए- उसी रजनी के हौसले की कहानी ..👇👇👇

6 भाई - बहन , माता - पिता मजदूरी करते हैं रजनी की बड़ी बहन सरिता बावरिया ने बताया कि वे 6 भाई - बहन हैं । पिता टीकूराम और माता नान्ति देवी दोनों मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं । पहले सीकर शहर में बाहरी इलाके में झोपड़ियों में रहते थे । सरिता के स्पोर्ट्स में आने के बाद कोच महेश नेहरा ने ही मदद की और उन्हें दो कमरों का एक घर बनवाकर दिया । इसके साथ ही रजनी के बाकी भाई - बहनों को ट्रेनिंग दी बड़ी बहन सरिता और भाई साबरमल कई खेलों में ऑलराउंडर हैं जिन्होंने स्टेट और नेशनल लेवल पर भी मेडल जीते हैं

रजनी की स्पोर्ट्स में रुचि देखते हुए उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ - साथ ट्रेनिंग दी । पैसों के अभाव के चलते बिना जूतों के ही सड़कों , बीहड़ों और सीकर के आस - पास के पहाड़ों में प्रैक्टिस करवाई । रजनी मानसिक रूप से कमजोर है । जब वह दौड़ती तो लोग ताने मारते कि ये तो बावरिया जाति की है ।

पढ़ाई में कमजोर , लेकिन स्पोर्ट्स में आगे रजनी बावरिया की बड़ी बहन सरिता ने बताया कि रजनी भले ही पढ़ाई में कमजोर है , लेकिन उसने स्पोर्ट्स में हमेशा रूचि रखी । जब रजनी पांचवी क्लास में थी तब से ही वह लगातार प्रैक्टिस करते हुए आ रही है । स्कूल में भी उसे पढ़ाई के साथ - साथ स्पोर्ट्स के लिए भी हमेशा प्रोत्साहित किया जाता है ।

बिना जूतों के ज्यादा तेज दौड़ती है रजनी , पेड़ पर लगे फल को कुछ देर में तोड़ लाती है मेंटर महेश नेहरा ने बताया कि रजनी ने उड़ीसा नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर दौड़ 6.5 मिनट में पूरी की है । कुछ सैकंड के अंतर के कारण वह दूसरे नंबर पर रही । महेश ने बताया कि रजनी बिना जूतों के ज्यादा तेज दौड़ती है । इसके साथ ही रजनी को पेड़ - पौधों का भी काफी शौक है । वह पेड़ पर लगे किसी भी फल को कुछ ही सैकंड में तोड़कर ले आती है । गाइड करने वाला मेंटर भी दिव्यांग रजनी बावरिया के मेंटर महेश नेहरा खुद एक हाथ से दिव्यांग है । उन्होंने एशियन एथलेटिक्स में पंद्रह सौ मीटर रेस में चौथा स्थान प्राप्त किया था । नेशनल स्तर पर वॉलीबॉल भी खेला हुआ है । राज्य का महाराणा प्रताप खेल पुरस्कार भी मिला हुआ है । रजनी को ट्रेनिंग उनकी बड़ी बहन सरिता ने ही दी है , लेकिन महेश समय - समय पर रजनी को गाईड करते रहते थे । पिछले एक साल से महेश रजनी को गाईड करते । एक साल से उन्होंने सीकर की ही एक रेजीडेंसी के खेल ग्राउंड में प्रैक्टिस करवाई । चैंपियनशिप शुरू होने से पहले महेश रजनी को अपने साथ जयपुर ले गए । यहां उन्होंने खुद के खर्चे पर रखा और एक महीने तक जयपुर में प्रैक्टिस करवाई । राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गोकुलपुरा ( सीकर ) के प्रिंसिपल बनवारी लाल ने बताया कि खराब हालत के बावजूद अभिभावकों ने इनको सदैव आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और इनके उच्च लक्ष्य व कठिन परिश्रम का ही परिणाम है कि रजनी इस मुकाम तक पहुंची । इसका लक्ष्य एक दिन पैरा ओलंपिक एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल प्राप्त कर देश का नाम रोशन करने का है !👏

#हमारी_और_से_उज्जवल_भविष्य_की_शुभकामनाएं ❤👏

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Jodhpur

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