27/05/2025
धोरों का शेर : नेताजी की सरहदी सरपट
राजस्थान की धरती का एक अलग ही जादू है — जहां रेत के धोरों में इतिहास की पदचापें छिपी हैं और हवाओं में बहादुरी की कहानियां गूंजती हैं !! ऐसे ही वीराने में, पाकिस्तान सीमा से सटे पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थल में, एक दिन सफेद Land Rover Defender धूल उड़ाती हुई तेज़ रफ्तार से निकलती है। गाड़ी की स्टेयरिंग पर हैं बायतु से विधायक — नेताजी !!
नेताजी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि पश्चिम राजस्थान की राजनीति का वो चेहरा हैं जिनका नाम लेते ही लोगों के चेहरे पर विश्वास और गौरव की रेखाएं खिंच जाती हैं !!
वो जाट कौम के लिए मसीहा माने जाते हैं — एक ऐसा चेहरा जिसने गांव-ढाणी से लेकर विधानसभा के गलियारों तक अपनी बात डटकर रखी और हर मोर्चे पर अपनी कौम का मान बढ़ाया !!
उनका हर दौरा खास होता है, पर आज का सफर उनके दिल के बहुत करीब था। ये वही रेगिस्तानी ज़मीन थी, जहां उन्होंने बचपन में अपने दादा के साथ ऊंटों की सवारी की थी। आज, उस बचपन की मिट्टी को सलाम करने वे फिर लौटे थे — पर इस बार एक दमकती गाड़ी में, रौब के साथ !!
गाड़ी उस वीरान पेड़ के पास रुकी, जो रेत के समंदर में हरियाली की आखिरी उम्मीद था। नेताजी उतरे, बालू की धरती को छूकर माथे से लगाया, और बोले, “यहीं से मेरी जड़ें हैं, और जड़ों को कभी कोई भूलता नहीं !!
शायद इसलिए बड़े बड़े बुजुर्गो का आशिर्वाद हमेशा उनके साथ रहता है और कहते हैं , बेटा, तू तो अब इस धरती का गौरव है !! लेकिन तुझमें आज भी हमारे गाँव की सोंधी खुशबू है !!
सत्ता की ऊंचाइयों पर पहुंचकर भी उनके भीतर का ग्रामीण बेटा आज भी ज़िंदा है !! वो बड़े-बुज़ुर्गों की इज़्ज़त करना आज भी अपना फ़र्ज़ समझते हैं । उनके दरवाज़े पर आज भी हर मज़लूम की दुआ पहले पहुंचती है, और मदद उसके बाद।
सामाजिक समारोह में आए नेताजी ने कुछ देर वहीं बैठकर चाय पी, पुराने किस्से सुने, और फिर गाड़ी में बैठकर रेत के उस रास्ते पर निकल पड़े जो सरहद की तरफ जाता है !! उनकी आंखों में आत्मविश्वास था और दिल में अपने लोगों के लिए प्यार !!
यह सफर सिर्फ रेत में गाड़ी दौड़ाने का नहीं था — यह एक नेता की अपनी धरती से जुड़ाव, अपने अतीत की पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल था !! धोरों पर आज फिर शेर गरजा था — एक सच्चा जननायक, जो सत्ता में रहकर भी अपनी जड़ों को नहीं भूला !!
राम राम 🙏 जय जय राजस्थान