27/06/2020
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✅ आकाशीय बिजली – मानसून की दस्तक या मौत का प्रहार
✅ सुर्खियों में –
➡️ हाल ही में उत्तर भारत में आकाशीय बिजली के कहर से लगभग 200 व्यक्तियों की मौत हो गयी है|
अब मानसून की दस्तक के साथ ही देश में आकाशीय बिजली की घटनाओं का सिलसिला शुरू हे चुका है।
➡️ मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 72 घंटे में अकाशीय बिजली के साथ बारिश हो सकती है।
✅ आकाशीय बिजली-
➡️ क्या है? –
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वायुमण्डल में विद्युत आवेश का एक वस्तु से दूसरी पर स्थानान्तरण और उससे कड़कड़ाहट उत्पन्न होना आकाशीय बिजली हैं।
➡️ कैसे बनती है आकाशीय बिजली? –
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आकाश में बादल दो तरह के आवेशों से आवेशित रहते है जो कि धनात्मक और ऋणात्मक होते है, और इनके चार्जिंग डेंसिटी के आधार पर इनमें वोल्टेज डिफरेंस होता हैं जो आकाशीय बिजली के उत्पन्न होने का कारण होता है|
बरसात मे चूँकि वातावरण में नमी ही नमी बनी रहती हैं जो कि विद्युत के लिए सुचालक का काम करती हैं। और जब दो बाद विपरीत आवेष वाले पास पास मे आ जाते है तब इस स्थिति में high voltage (उच्च विद्युत दाब) की वजह से आपस ने तेज स्पार्क पैदा होता हैं जिसे हम आकाशीय बिजली के रूप में जानते हैं।
आकाशीय बिजली धरती पर पहुंचने पर बेहतर कंडक्टर (संचालक) को तलाशती हैं, जिससे वह गुजर सके। इसके लिए धातु और पेड़ उपयुक्त होते हैं। बिजली अक्सर इन्ही माध्यमों से पृथ्वी में जाने का रास्ता चुनती है।
✅ आकाशीय बिजली से बचने के उपाय-
➡️ धातुओं से दूर रहें|
➡️ बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहें|
➡️ बिजली के उपकरणों का प्रयोग न करें|
➡️ मोबाइल का प्रयोग न करें|
✅ बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या –
➡️ बिजली गिरने से बड़े पैमाने पर मौतें हर साल सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। 2005 के बाद से हर साल बिजली गिरने से 2 हजार से अधिक की मौत हुई।
➡️ 2018 में प्रकृति की शक्तियों के कारण 6,891 लोगों की मौत हुई, इनमें 2,357 या 34 फीसद आकाशीय बिजली के कारण हुई। यह बाढ़ (500), भूस्खलन (404), ठंड ( 757) और गर्मी (890) के कारण संयुक्त रूप से हुई मौत के करीब था।