13/08/2025
आज दिनांक 12-08-2025 को जिला पुस्तकालय, जींद में Father of Library Science श्री एस.आर. रंगनाथन जी की 133वीं जयंती को मनाया गया। यह दिन इसलिए विशेष है क्योंकि 12 अगस्त, 1892 को पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ एस. आर. रंगनाथन का जन्म हुआ था तथा उन्होंने पुस्तकों व ज्ञान को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया था। इस उपलक्ष्य में सभी पुस्तकालय सदस्यों पाठकों व वरिष्ठ सदस्यों तथा स्टाफ ने भाग लिया। यह कार्यक्रम श्री हरीश चन्द्र डी.डी.ओ. एवं वरिष्ठ पुस्तकाध्यक्ष जिला पुस्तकालय, जींद द्वारा संपन्न करवाया गया। इसमें आदरणीय अतिथिगण श्री वी. के. शर्मा पूर्व पुस्तकाध्यक्ष, श्री दयानंद रेढू पूर्व पुस्तकाध्यक्ष, श्री महिपाल खटकड़ पूर्व पुस्तकाध्यक्ष, श्री नरेश जागलान मनोवैज्ञानिक, श्री सुंदर सिंह कनिष्ठ पुस्तकाध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त किये। श्री नरेश जागलान ने बताया कि वे इस पुस्तकालय के नियमित पाठक है और पुस्तकों के प्रेम ने ही उन्हें इस पुस्तकालय से और इसके पाठको से अटूट बंधन में विगत 15 वर्ष से बांधकर रखा हुआ है। वही महिपाल जी ने कन्या शिक्षा, समाज और गुरुकुल शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे। श्री मुख्य अतिथि ने बताया की महान राजनीतिज्ञ, नेतागण, वैज्ञानिक और विचारक ने हमेशा पुस्तकों एवं तत्कालीन पुस्तकालय का उपयोग किया है। पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों के अध्ययन से केवल आप परीक्षा और परीक्षा के उपरांत रोजगार की दिशा में प्रयासरत होकर सीमित सफलता प्राप्त कर सकते है। व्यक्तिगत, सार्वभौमिक और समसामयिक ज्ञान-विज्ञान के अध्ययन के लिए पुस्तकालय और पुस्तक अति आवश्यक है।
युग बदल रहा है तकनीकी व ज्ञान विज्ञान के बदलते स्वरूप के अनुसार पुस्तकालय का स्वरूप और इसकी सेवाओं की प्रकृति में भी परिवर्तन हुआ है। वर्तमान में ऑनलाइन ई-बुक्स, ओपन सोर्स, ई-पब्लिशिंग, डिजिटल ऑडियो-वीडियो संसाधनों के प्रयोग से पुस्तकालय कर्मियों और पाठकों को अपने आपको सुदृढ़ करना होगा।
जिला पुस्तकालय के आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पुस्तकालय व विगत वर्षों में इनके पाठकों का विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए चयन का सराहनीय रिकॉर्ड रहा है। वर्ष 2023 में 20 पाठकों का सरकारी सेवाओं के लिए चयन हुआ है। इस उपलक्ष्य में लाइब्रेरी स्टाफ सदस्यों में श्रीमती प्रिया,श्री अनुज,अंकुश, श्रीमती आशु,दीपक तथा मनदीप शामिल हुए।