21/02/2026
Have created a song for my late loving Papa
मेरे जीवन में भी एक फरिश्ता था,
जिससे मेरा मेरे पिता का रिश्ता था,
मैं था उनके लिए, गुलों का एक गुच्छा,
और फरिश्ता फूलों का गुलदस्ता था।
चोट मुझे लगती थी वो करहाता था,
मंदिर, दरगाहों में वो ले जाता था,
मरहम, सद्गुरु, तीर्थ भभूत लगाता था,
वो कभी रहबर, पिता और कभी माता था।
जब भटका मैं वही दिखाता रस्ता था।
मेरे जीवन में भी एक फरिश्ता था।
मैने उसे कभी मायूस नहीं देखा,
असल में वो ही था इन हाथों की रेखा,
पर वो भी तो सत्य है
ईश्वर का लेखा,
वज्र समय ने मेरे जीवन पर फेंका,
छीन लिया उसे, जो हर खुशी पे हंसता था।
मेरे जीवन में भी एक फरिश्ता था।
Lyrics by
Sanjay Mahendra Pachori
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