17/04/2026
Kurukshetra
Dated: 15-17 April, 2026
SIASTE कुरुक्षेत्र में व्यक्तित्व विकास, संचार कौशल और साक्षात्कार की तैयारी पर तीन दिवसीय सफल कार्यशाला का समापन I
SIASTE कुरुक्षेत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल जी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास और साक्षात्कार की तैयारी पर केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन किया गया। 15 अप्रैल, 2026 को शुरू हुई इस महत्वपूर्ण कार्यशाला ने विद्यार्थियों के कौशल को निखारने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्थान के अकादमिक प्रकोष्ठ और प्लेसमेंट प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और सक्रियता के साथ भाग लिया। कार्यशाला के समन्वयक गौतम दत्त जी द्वारा संचालित की गई कार्यक्रम की रूपरेखा ने छात्रों को तीन दिनों तक विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यशाला के पहले दिन, छात्रों ने साक्षात्कार की विभिन्न प्रक्रियाओं, प्रभावी बायोडाटा लेखन की कला और समूह चर्चा की बारीकियों को गहनता से समझा। जाने-माने शिक्षाविद श्री विनीत अग्रवाल जी, जिन्होंने इस सत्र के संसाधन व्यक्ति के रूप में अपनी विशेषज्ञता साझा की, ने समूह चर्चा और साक्षात्कार प्रक्रियाओं पर अपने बहुमूल्य विचार रखे, जो प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहे।
दूसरे दिन का सत्र छात्रों के व्यक्तिगत विकास पर केंद्रित रहा। दिन के पहले सत्र में संसाधन व्यक्ति श्रीमती किरण लांबा ने अंतर्वैयक्तिक कौशल के विकास, शाब्दिक, अशाब्दिक और लिखित संप्रेषण कौशल को प्रभावी बनाने के तरीके, आत्मविश्वास में वृद्धि और आत्म-जागरूकता के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। दूसरे सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात शिक्षाविद् श्री वीरेंद्र वालिया थे। उन्होंने 'भविष्य के शिक्षक के रूप में चुनौतियां और समाधान' विषय पर छात्र-अध्यापकों को संबोधित करते हुए शिक्षण के बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। अपने संबोधन में श्री वालिया ने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब वह एक 'मार्गदर्शक' और 'सुविधादाता' के रूप में पहचाना जाता है। उन्होंने भविष्य की मुख्य चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि तकनीकी विस्फोट और सूचनाओं की बाढ़ के बीच छात्रों का ध्यान केंद्रित करना एक कठिन कार्य होगा। इसके अतिरिक्त, कक्षा में बढ़ती विविधता और नैतिक मूल्यों के ह्रास को उन्होंने गंभीर चुनौती बताया। सत्र के अंत में में विद्यार्थियों ने समूह चर्चा के माध्यम से अपने कौशल को और अधिक परिष्कृत किया।
कार्यशाला का अंतिम दिन छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया, जिसमें मॉक इंटरव्यू का आयोजन किया गया जिसमें राजकीय आदर्श संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इस्माईलाबाद के प्राचार्य श्री भीम सेन तथा डी. ए. वी. विद्यालय सेक्टर-13 कुरुक्षेत्र की प्राचार्या श्रीमती मनीषा लांबा को विषय-विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। इस व्यावहारिक सत्र ने छात्रों को वास्तविक साक्षात्कार के माहौल का अनुभव कराया और उन्हें अपनी संभावित कमजोरियों को पहचानने तथा उन्हें दूर करने का अवसर प्रदान किया।
प्लेसमेंट प्रकोष्ठ के संयोजक श्री गौतम दत्त जी ने कार्यशाला की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से छात्रों के आत्मविश्वास और कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कार्यशाला में प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए संस्थान जल्द ही छात्रों के लिए एक विशेष प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन करने की योजना बना रहा है, जिससे उन्हें अपने करियर की शुरुआत करने में सहायता मिलेगी।
संस्थान के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल जी ने कार्यशाला के सफल समापन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यशाला छात्रों के सर्वांगीण विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल छात्रों को उनके भविष्य के प्रयासों में सफलता प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे। संस्थान प्रभारी डॉ. प्रवीण कुमार जी ने सभी संसाधन व्यक्तियों, समन्वयकों और प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय भागीदारी और समर्पण के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और संवाद कौशल को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
इस अवसर पर डॉ सुमंत गोयल, डॉ अजमेर सिंह, डॉ संदीप कुमार, डॉ रीटा, डॉ राम सरण , श्री महेश श्योरायण, श्री सुनील पौलस्त्य, श्री संदीप सांगवान, श्रीमती ऋतु त्यागी, श्री अशोक टॉकी, डॉ राजेंद्र जी सहित संस्थान के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और छात्रों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
अंत में छात्रों ने प्रतिपुष्टि से निष्कर्ष आया कि यह तीन दिवसीय कार्यशाला SIASTE कुरुक्षेत्र के छात्रों के लिए एक अत्यंत लाभकारी और परिवर्तनकारी अनुभव साबित हुई, जिसने उन्हें आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया है।