08/09/2020
#ख़त्म #हो #जाएंगे #ये #क़ानून
प्रस्तावित लेबर कोड के आने के बाद पहले के इम्प्लाई स्टेट एंश्योरेंस क़ानून, पीएफ़ एक्ट, कंपनसेशन एक्ट, मैटर्निटी बेनेफ़िट ऐक्ट, ग्रेच्युटि एक्ट, असंगठित क्षेत्र के वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा एक्ट, निर्माण मज़दूरों के कल्याण के लिए वर्कर्स वेलफ़ेयर सेस एक्ट, बीड़ी वर्कर वेलफ़ेयर सेस एक्ट, आयरन ओर माइंस, मैग्नीज़ ओर माइंस और क्रोम ओर माइंस वेलफ़ेयर फंड एक्ट, माइका माइंस लेबर वेलफेयर सेस एक्ट, लाइमस्टोन एंड लोटोमाइट माइंस लेबर वेलफेयर फंड एक्ट और सीने वर्कर्स वेलफ़ेयर फंड एक्ट को समाप्त कर दिया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि इन सभी क़ानूनों को ख़त्म कर आसान क़ानून बनाए जाएंगे और इससे उद्योग धंधों को संचालित करने में उद्योगपतियों को आसानी होगी और इससे निवेश बढ़ेगा।
अब इन सभी क़ानूनों को समेट कर एक यूनिवर्सल कोड में लाने का प्रस्ताव है। इस नए क़ानून को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल बनेगी जिसके पास वित्तीय और नियामक शक्तियां होंगी।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इतने अलग अलग किस्म के उद्योगों में लगे मज़दूरों के हितों की रक्षा एक काउंसिल कैसे कर पाएगी।
जैसा होता है भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीधे निर्देशन में ये लेबर कोड बनाए गए हों, लेकिन कई मामलों में स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है।
इसके अलावा ट्रेड यूनियनें इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि जिन क्षेत्रों के मज़दूरों के बारे में सरकार फैसले लेने जा रही है, उनसे या उनकी ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों से सरकार ने कोई भी बात करने से इनकार कर दिया है।
ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है कि ये मोदी सरकार की मनमानी है और इससे मज़दूरों के हालात बंधुआ मज़दूरी से भी बदतर हो जाएंगे।
अभी भी वक्त है मजदूर साथियों अपने हक के लिए लड़ना सीखो!
वरना जिंदगी मौत से भी बदतर हो जाएगी!
(Copy Workers Unity)
मजदूर एकता मंच!
बंटी सिंह!
जमशेदपुर , झारखंड!