25/07/2019
जालोर जिले में एक छतरी हैं करीब-करीब 165 साल पुरानी हैं । इस छतरी को बनाने का किस्सा दरअसल इस प्रकार है -
जोधपुर महाराजा तख्तसिंह (1843-1873) शिकार खेलने के बडे़ शौकीन थे । गर्मियों के दिनों में अक्सर वो शिकार के लिये ऐसराणा व अरावली पर्वत श्रेणियों की ओर रूख करते थे तब उनके साथ उनकी रानियां भी साथ रहा करती थी । कुछ रानियां सवारी व बंदूक चलाने में प्रवीण थी । उन दिनों वो ऐसराणा पर्वत श्रृंखला के मायलावास गांव में शिकार के लिये आये हुए थे । उन दिनों ऐसराणा पर्वत में शेर, भालु, सुअर, तेंदुए, हिरण, खरगोश बडी़ संख्या में यहां मौजूद थे । शिकारगाह के लिए ये राजा महाराजाओं की पसंदीदा जगह थी । पानी भी पर्याप्त था पुरा क्षेत्र हराभरा था ।पुरा लश्कर साथ था । महाराजा के शिकार के लिये मचान बनाया गया । औरले उस मचान के निचे भाले लगाये गये ताकि घायल शिकार उन पर हमला न कर सके । महाराजा तख्त सिंह व उनकी महारानी भटियाणी जी मचान पर थे अचानक से महारानी का पैर फिसला और घायल शिकार से बचने के लिये लगाये गये भालो में भटियाणी महारानी बिंध गई । मौके पर ही महारानी की मृत्यु हो गई । महाराजा तख्त सिंह ने उनकी याद में उसी जगह जोधपुरी पत्थर से विशाल छतरी बनाई थी । तभी से यहां पर उस छतरी में भटियाणी सती के रूप में पुजा की जाती हैं । यहां के लोगों का मानना है कि सती भटियाणी जी के छतरी पर मन्नत मांगने पर पुर्ण होती हैं । ये छतरी क्षेत्रभर में आस्था का केंद्र बनी हुई हैं । विशेष दिवस पर ग्रामीणों द्वारा मेले का भी आयोजन कीया जाता हैं । यह छतरी मायलावास व बारलावास की सीमा पर ही बनी हुई हैं । इसी वजह से बारलावास का नाम महाराजा तख्त सिंह के नाम पर तख्तपुरा पडा़ । ऐसराणा पर्वत श्रृंखला के ये गांव धार्मिक व ऐतिहासिक दृष्टि बडे़ महत्वपूर्ण गांव हैं । आज भी इस पर्वत क्षेत्र में बघेरे, हिरन, सियार मौजूद है ।
इन्हीं महाराजा के समय 1857 की क्रांति, आऊवा की घटना, डूंगरसिंह व जवाहर सिंह का मामला, राजपुताना-मालवा रेल्वे लाईन विकास व इन्हीं के कार्यकाल में 1867 में पहला अंग्रेजी स्कूल व छात्रावास, पहला समाचार पत्र 'मुरधर मिन्त' साप्ताहिक रूप में, 1853 में पहला एलौपैथिक चिकित्सा के लिए हॉस्पिटल, झीलों को नमक बनाने के लिए ठेके पर देने जैसे कई ऐतिहासिक कार्य भी हुए । महाराजा तख्त सिंह के दस पुत्र थे ।जिनमें से ज्येष्ठ पुत्र जसवंत सिंह ( 1873-1895) राजगद्दी पर बैठे । द्वितीय पुत्र प्रताप सिंह थे जो इतिहास में ्रताप के नाम से प्रसिद्ध हुए और इन्होंने ही ऐतिहासिक #चौपासनी स्कूल का निर्माण जोधपुर में करवाया था । जो शिक्षा व खेल के क्षेत्र में आज दिन तक अलख जगाता रहा ।
#हमारा_जालोर