Jalamsingh surana

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 #सुराणा से खेड़ा गंगावा टूटी सड़क का मामला, टूटी सड़क से ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार अनजान, संबंधित विभाग के अधिकारियों क...
10/01/2026

#सुराणा से खेड़ा गंगावा टूटी सड़क का मामला, टूटी सड़क से ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार अनजान, संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास एक ही जवाब स्वीकृति हेतु भेजा है प्रस्ताव, लेकिन कब तक स्वीकृति मिलेगी नहीं कोई समय निर्धारित, पिछले कई सालों से यही मिल रहा जवाब।
Jogeshwar Garg Jalore
Lumbaram Choudhary
Bhajanlal Sharma
Nitin Gadkari
Diya Kumari
DIPR, Department of Information & Public Relations, Rajasthan
DDT - news jalore
Follwer

विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हा...
19/12/2025

विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"

भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाले हैं।

अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।

अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।

सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।

विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।

Follwer

14/11/2025

असली विजय दूसरों पर नहीं, अपने मन पर होती है।”
जब व्यक्ति अपने क्रोध, भय और लोभ पर जीत लेता है,
तभी वह सच्चा विजेता बनता है।

अब यह दादागिरी देखिएकल जैसलमेर में बस में आग लगी तो सरकार जागी और बसों को चेक करवाना शुरू किया। प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने ...
16/10/2025

अब यह दादागिरी देखिए
कल जैसलमेर में बस में आग लगी तो सरकार जागी और बसों को चेक करवाना शुरू किया। प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने व्यवस्थाओं को सुधारने की बजाय जोधपुर से किसी भी रूट पर बस नहीं चलाने का फैसला किया है। सरकार को झुकाने का यह गजब तरीका है।।

सरकार के दृढ़ संकल्प का पता तभी चलेगा जब वह झुकने की बजाय कड़ी कार्रवाई करे। लोगों की जिंदगी इतनी सस्ती नहीं है जितनी समझी जाती है। मुकम्मल जांच और सुधार के बिना कोई भी वाहन चलना ही क्यों चाहिए?
Bhajanlal Sharma

16/10/2025

क्षत्रिय समाज के सभी RAS चयनितों बहुत-बहुत हार्दिक बधाई एँव शुभकामनाऐ। 💐💐

1)हिमानी राठौड़(मामडोदा रेंक 28
2)राज श्री w/o भानु प्रताप सिंह लोहा(RPS) रेंक 48
3)निकिता राठौड़ पुत्री adv उमेद सिंह गुड़ा,नागौर,,रेंक 64
4) डॉ ऐश्वर्या भाटी मोरखाना रेंक 145
5)अजयपाल सिंह भाटी,बलाना रेंक 123
6)महिपाल सिंह मेड़ता रोड
7)ज्योत्सना राणावत
8)चक्रवीर सिंह चौहान
9)अंकिता राठौड़ रेंक 192
10)प्रियंका नरूका रेंक 188
11)कुलदीप सिंह राठौड़ 72
12)खुशहाल सिंह भायल
13)स्वरूप सिंह मेघा रेंक 385
14) भग सिंह चौहान 243
15)अमर सिंह बिका 62
16)आकांक्षा देवड़ा 253
17)ज्योति राजावत
18)के पी सिंह शेखावत 107
19)महिपाल सिंह देवड़ा धामसीन
20)मधु कंवर 249
21)डॉ अजय सिंह राठौड़ 78
22)दीपेंद्र सिंह ओलादन 514
23)अश्विनी चुंडावत TSP रेंक 4
24)अक्षय सिंह शेखावत 283
25)दीपक सिंह शेखावत 226
26)नरपत सिंह गिराब 390
27)राजकुमार सिंह भोजासर
28)नीलम भाटी, हरसानी
29)गजेंद्र सिंह चौहान
30)आर्यांश सिंह शेखावत
31)अरिदमन सिंह शेखावत गुढ़ा
32)विकास सिंह शेखावत बजरंगुरा
33)विवेक शेखावत सीहोर
34)अनन्य शेखावत गिरवारपुरा
35)सर्वदीप सिंह शेखावत
गिरिसाम
37)अनुराधा शेखावत पत्नी
गेमर सिंह रावलौत
38)विश्वजीत सिंह शेखावत गढ़ taknet
39)शुभम् सिंह सिसोदिया 244
40,) रोहन कुमार शेखावत
नांगल
41) अभिमन्यु सिंह शेखावत फतेहपुरा
42)परमवीर सिंह इंदा 66
43)सेजल कंवर इंदा 522
44)चंदन सिंह इंदा 115

14/10/2025

सवाल: जैसलमेर बस हादसे में जले हुए यात्रियों को जोधपुर रेफर क्यों करना पड़ रहा है?

जवाब: क्योंकि वहां चिकित्सा के समुचित इंतजाम नहीं हैं।

अब बताइए, जहां हादसा हुआ है वहां से जैसलमेर के जिला चिकित्सालय की दूरी बहुत कम है। जबकि घटनास्थल से जोधपुर की दूरी करीब करीब 300 किलोमीटर है।

अब बताइए, ऐसी हालत में 50 परसेंट या उससे ज्यादा झुलसे हुए लोग क्या यह दूरी आसानी से तय कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं।
यह दूरी जानलेवा भी है और जान नहीं निकले तो अत्यंत कष्टदायक भी।

अब बताइए, जैसलमेर और बाड़मेर सीमावर्ती क्षेत्र हैं। आजादी के 78 साल बाद भी इन दोनों जिला मुख्यालयों पर इलाज की बेहतरीन और समुचित सुविधाएं क्यों नहीं हैं? कितनी सरकार है आई और कितने सरकारें गई, किसी ने भी इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया?कल भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की पत्नी की तबीयत बिगड़ी —
5 मिनट में हेलीकॉप्टर तैयार,
15 मिनट में पाली पहुँचा,
आधे घंटे में जयपुर इलाज शुरू।

और आज जैसलमेर में 30 से ज़्यादा लोग आग से झुलस गए —
50% से ज़्यादा जले हुए शरीर के साथ पाँच घंटे की सड़क यात्रा करके जोधपुर पहुँच रहे हैं।

आख़िर जनता के लिए वही तत्परता क्यों नहीं दिखी?
क्या सरकार की संवेदनशीलता अब चेहरे देखकर तय होती है?
Bhajanlal Sharma
Vasundhara Raje
Gajendra Singh Shekhawat
Ravindra Singh Bhati Rajendra Singh Gudha Sabal Singh Bhati BJP Rajasthan Chhotu Singh Bhati CMO Rajasthan

वर्ष 1899-1900 में राजस्थान में एक बदनाम अकाल पड़ा था...विक्रम संवत १९५६ (1956) में ये अकाल पड़ने के कारण राजस्थान में इ...
14/10/2025

वर्ष 1899-1900 में राजस्थान में एक बदनाम अकाल पड़ा था...

विक्रम संवत १९५६ (1956) में ये अकाल पड़ने के कारण राजस्थान में इसे छप्पनिया-काळ कहा जाता है...

एक अनुमान के मुताबिक इस अकाल से राजस्थान में लगभग पौने-दो लाख लोगों की मृत्यु हो गयी थी...
पशु पक्षियों की तो कोई गिनती नहीं है...
लोगों ने खेजड़ी के वृक्ष की छाल खा-खा के इस अकाल में जीवनयापन किया था...

यही कारण है कि राजस्थान के लोग अपनी बहियों (मारवाड़ी अथवा महाजनी बही-खातों) में पृष्ठ संख्या 56 को रिक्त छोड़ते हैं...
छप्पनिया-काळ की विभीषिका व तबाही के कारण राजस्थान में 56 की संख्या अशुभ मानी है....

इस दौर में बीकानेर रियासत के यशस्वी महाराजा थे...
गंगासिंह जी राठौड़(बीका राठौड़ अथवा बीकानेर रियासत के संस्थापक राव बीका के वंशज)....

अपने राज्य की प्रजा को अन्न व जल से तड़प-तड़प के मरता देख गंगासिंह जी का हृदय द्रवित हो उठा....

गंगासिंह जी ने सोचा क्यों ना बीकानेर से पँजाब तक नहर बनवा के सतलुज से रेगिस्तान में पानी लाया जाए ताकि मेरी प्रजा को किसानों को अकाल से राहत मिले...

नहर निर्माण के लिए गंगासिंह जी ने एक अंग्रेज इंजीनियर आर जी कनेडी (पँजाब के तत्कालीन चीफ इंजीनियर) ने वर्ष 1906 में इस सतलुज-वैली प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की...

लेकिन....
बीकानेर से पँजाब व बीच की देशी रियासतों ने अपने हिस्से का जल व नहर के लिए जमीन देने से मना कर दिया....
नहर निर्माण में रही-सही कसर कानूनी अड़चनें डाल के अंग्रेजों ने पूरी कर दी...

महाराजा गंगासिंह जी ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी और इस नहर निर्माण के लिए अंग्रेजों से एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती भी...

बहावलपुर (वर्तमान पाकिस्तान) रियासत ने तो अपने हिस्से का पानी व अपनी ज़मीन देने से एकदम मना कर दिया...

महाराजा गंगासिंह जी ने जब कानूनी लड़ाई जीती तो वर्ष 1912 में पँजाब के तत्कालीन गवर्नर सर डैंजिल इबटसन की पहल पर दुबारा कैनाल योजना बनी...

लेकिन...
किस्मत एक वार फिर दगा दे गई...
इसी दरमियान प्रथम विश्वयुद्ध शुरू हो चुका था...

4 सितम्बर 1920 को बीकानेर बहावलपुर व पँजाब रियासतों में ऐतिहासिक सतलुज घाटी प्रोजेक्ट समझौता हुआ..

महाराजा गंगासिंह जी ने 1921 में गंगनहर की नींव रखी...

26 अक्टूम्बर 1927 को गंगनहर का निर्माण पूरा हुआ....
हुसैनवाला से शिवपुरी तक 129 किलोमीटर लंबी ये उस वक़्त दुनियाँ की सबसे लंबी नहर थी...

गंगनहर के निर्माण में उस वक़्त कुल 8 करोड़ रुपये खर्च हुए...
गंगनहर से वर्तमान में 30 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है...आधुनिक बीकानेर के निर्माता, मरुभूमि के भागीरथ "केसर - ए - हिंद" से विभूषित महाराजा गंगासिंह जी की जयंती के अवसर पर उन्हें कोटि कोटि नमन।

राजसी वैभव को त्यागकर जन-सेवा, लोकतंत्र और राष्ट्रवादी विचारधारा के सशक्तिकरण हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाली,...
12/10/2025

राजसी वैभव को त्यागकर जन-सेवा, लोकतंत्र और राष्ट्रवादी विचारधारा के सशक्तिकरण हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाली, की संस्थापक सदस्य, श्रद्धेय राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!

त्याग, संघर्ष और सेवा की प्रतिमूर्ति श्रद्धेय राजमाता जी ने राष्ट्र को जो दिशा दी, वह भारत की एकता और अखंडता को सदैव बल देती रहेगी।
Vasundhara Raje

09/10/2025

राजस्थान सरकार के धर्मांतरण विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी

09/09/2025

हमारे सदस्य रफीक खान और कागजी वगैरह जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर रखा है, इनसे मैं निवेदन करता हूं कि अपने मूल धर्म में आइए"

- भाजपा विधायक गोपाल शर्मा

सनद रहे धर्मांतरण विधेयक पर इस तरह की बहस लोकतंत्र का मंदिर कही जाने वाली विधानसभा में हो रही है.

🙏श्री बजरंग बाण का पाठ🙏🌹निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥चौपाई : जय हनुम...
09/09/2025

🙏श्री बजरंग बाण का पाठ🙏🌹

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

चौपाई :
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥

अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥

जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥

जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥

जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥

बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥

भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥

इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥

सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥

जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥

अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥

यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥

पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥

यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥

धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

दोहा :

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।

बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

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