26/09/2019
महज 15 साल की आयु में बंटवारे का दंश झेलकर अपने जन्मभूमि पाकिस्तान के गाह गाँव से घर खेत सब छोड़कर अमृतसर में बसने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का बचपन बेहद तंगहाली एवं गरीबी में गुजरा बचपन में हीं मां का साया सिर से उठ गया हिंदू यूनिवर्सिटी अमृतसर से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एवं कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड तक का सफर स्कॉलरशिप के दम पर तय किया डॉ मनमोहन सिंह ऐसे पहले भारतीय छात्र थें जिन्हें वेरनबेरी स्कॉलरशिप मिला यह स्कॉलरशिप दुनिया के गिने चुने छात्रों को मिलती है ओर आज इन्ही के नाम से हावर्ड यूनिवर्सिटी का स्कॉलरशिप प्रोग्राम समूचे विश्व में जाना जाता हैं इन सब के बावजूद डॉ मनमोहन सिंह जी ने कभी छिछोरों की तरह अपनी गरीबी का रोना नहीं रोया मां के मरने की कहानी नहीं सुनाई बार बार अपने मां बाप की जाति नहीं बदली अपने मां बाप की मनगढंत कहानियाँ नही गढ़ी अतिअल्पसंख्यक सिक्ख धर्म के होने की दुहाई नहीं दी कभी खुद की जाति, धर्म की बात नहीं की किसी के डीएनए तो किसी की पैदाईश पर सवाल नहीं उठाया हर प्रकार के राजनीतिक हमले सहने के बावजूद कभी पीएम पद की गरिमा नहीं गिरने दी कभी मर्यादाविहीन भाषण नहीं दिया मुझे डॉ मनमोहन सिंह जी पर गर्व है ऐसे महान अर्थविशेषज्ञ, राजनीतिक संत और शिक्षाविद पूर्व प्रधानमंत्री व रिज़र्व बैक गवर्नर, वित्तमंत्री, वर्ल्ड एकॉन्मिक फॉर्म प्रमुख सलाहकर डॉ. मनमोहन सिंह जी को 86वें जन्मदिवस की पुरोहित परिवार की तरफ से ह्रदय की गहराइयों से बधाई एवं शुभकामनाएँ !!
मेरे लफ्जो से ना कर मेरे किरदार का फैसला,
तेरा वजूद मिट जाएगा मेरी हकीकत ढूंढते ढूंढते ॥
शिव कुमार शर्मा Asangathit Kamgar Congress जयपुर जिला संयोजक व अध्यक्ष