10/04/2024
मुद्दे की बात
लोकसभा आम चुनाव - 2024
विचारधारा की लड़ाई, शक्ति प्रदर्शन और सनातन का तड़का
-जितेन्द्र पुरोहित
लोकसभा आम चुनाव के तहत चुनावी प्रचार का शोर, मतदाताओं से लुभावने वायदे और रूठों को मनाने का दौर लगातार जारी है। भाजपा से कैलाश चौधरी, कांग्रेस से उम्मेदाराम बेनिवाल और निर्दलीय प्रत्याशी रविन्द्र सिंह भाटी सीधे तौर पर मैदान में टक्कर जमाए हुए हैं। इस त्रिकोणीय संघर्ष में एक-एक वोट को लेकर स्पष्ट पहुंच इस बार ही सर्वाधिक देखने को मिल रही है। इस बीच जैसलमेर-बाड़मेर-बालोतरा लोकसभा क्षेत्र में सनातन का तड़का भी सामने आ रहा है। हालांकि भाजपा हिन्दुत्व कार्ड के साथ मोदी फेक्टर को जोड़ते हुए अपने उम्मीदवार की जीत की हुंकार अवश्य भर रही हैं। भाजपा ने प्रथमतः स्थिति साफ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह, प्रदेश मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की सभाओं की घोषणा कर दी साथ ही फिल्म सितारे कंगना, सनी देओल, विश्व विख्यात रेसलर खली जैसे प्रचारकों के साथ प्रचार की योजना का खाखा जरूर स्पष्ट कर दिया है।
इन सभी के बीच सनातन का तड़का भी सामने आया है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री भी बाड़मेर आए और सनातन के नाम पर हिन्दुत्व का प्रचार करते हुए वोट करने का इशारा अवश्य किया। शास्त्री प्रदेश की अन्य कई लोकसभा सीटों पर भी धार्मिक आयोजन में शिरकत करेंगे। चाहे यह आयोजन विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी से जुड़ी मातृ शक्ति कर रहीं हो, मकसद साफ तौर पर सपष्ट है। प्रदेश सहित देश भर में धर्म आधारित राजनीति आज नई नहीं है। आजाद भारत के साथ ही देश के हर कोने में धर्म की राजनीति अवश्य हावी रही है।
कुछ बुद्धिजीवी लगतार कहते आए हैं कि राजनीति का धर्म होना चाहिए, धर्म की राजनीति नहीं। लेकिन यही कहा जा सकता है कि ऐसा हो न सका...........। बहरहाल फिर लौट कर वहीं आते हैं जहां से जैसलमेर-बाड़मेर-बालोतरा लोकसभा क्षेत्र की चुनावी चर्चा शुरू हुई थी। एक और ख़ास बात यह है कि पूर्व में कभी इस सीटों के साथ बालोतरा का नाम चर्चा में नहीं रहता था लेकिन इस बार माहौल में अवश्य बदलाव आया है। यह वहां की जनता और राजनीति से जुड़े हुए सभी पार्टीयों के कार्यकर्ताओं का साझा उपक्रम है कि प्रदेश के साथ राज्य की राजनीति में इतनी मुखरता के साथ बालोतरा का नाम भी सामने आया है।
अब सवाल यह भी उठता है कि हिन्दुत्व का नाम तो निर्दलीय प्रत्याशी और वर्तमान में शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी से भी जुड़ा है। वे मूल रूप से भाजपा की विचारधारा से जुड़े हुए हैं और पूर्व में भी और वर्तमान में भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस बात की स्वीकारोक्ति से भी चूकते नहीं है। इन सीटों पर जाट, राजपूत, मुस्लिम, मूल ओबीसी जैसे मतदाओं की भारी संख्या है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों में जाट उम्मीदवार है। ऐसे में जाटों का वोट किस ओर पड़ता है यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। ऐसे में रविन्द्रसिंह भाटी समर्थक जाट मतदाताओं में सेंध के साथ राजपूत व अन्य मतदाओं के भरोसे अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है।
कहना ही होगा कि इस महासमर में सभी प्रत्याशियों ने अपनी पूरी जान फूंक दी है। रेलियां, नारे और नारी शक्ति के इस अन्वय के साथ सनातन, जाति के नाम पर वोट के साथ इस बार युवा शक्ति और अलग चेहरे को लेकर झुकाव की चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। हालांकि मतदाता जब वोट करने जाता है तब जहां बटन दबाना है वह पूर्व निर्धारित आम तौर पर नहीं होता। मतदाता का यह हक है कि वह अंतिम समय तक अपना और क्षेत्र का भविष्य का सोचते हुए मतदान करे। लेकिन मतदान अवश्य करें।