01/10/2018
क्या वाकई में हमें ऐसे अध्यक्ष की जरूरत है जो परीक्षा भी खुद से पास नही कर सकता है। ऐसे लोगो से तो अनपढ़ होना बेहतर, ईज़्ज़त तो है।
विश्विद्यालय प्रशासन ने लिंगदोह सिफारिशों को ताक में रखते हुए नामांकन रद्द नही किया। और दण्डित छात्र को लड़वा दिया यूनिवर्सिटी का चुनाव पूरा चुनाव पर्योजित तरीक़े से मेनेज था... विनोद जाखड को तो पहले ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अध्यक्ष बना रखा था यह चुनाव तो बस एक ड्रामा था...
होश में आओ होश में आओ, विश्वविधालय प्रशासन होश में आओ।
राजस्थान यूनिवर्सिटी को बचाना है भाई रणवीर सिंघानिया को लाना है...
रणवीर सिंघानिया ज़िन्दाबाद
NSUI
करण वर्मा राजस्थान विश्वविद्यालय