30/05/2026
“बिना Registration के भी वसीयत (Will)वैध — Hon’ble Supreme Court of India”
एक व्यक्ति ने अपनी वसीयत में पत्नी और बच्चों को कुछ नहीं दिया — पूरी संपत्ति बहन के नाम कर दी। वसीयत registered भी नहीं थी। पत्नी और बच्चों ने यह कहते हुए वसीयत को चुनौती दी कि यह संदिग्ध है और registered न होने से फर्जी है।
Hon’ble Supreme Court of India ने अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वसीयत का अपंजीकृत होना उसे अवैध नहीं बनाता। Will का registration Indian Registration Act, 1908 के under अनिवार्य नहीं है। Indian Succession Act, 1925 की Section 63 तथा Indian Evidence Act, 1872 की Section 68 के अनुसार एक attesting witness की testimony से Will को विधिवत proved माना जा सकता है।
Court ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर कि natural heirs को वसीयत से बाहर रखा गया है, वसीयत को संदिग्ध नहीं माना जा सकता। प्रत्येक व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी संपत्ति जिसे चाहे, वसीयत करे। यह testamentary freedom का मूल सिद्धांत है।
इसके साथ ही Court ने एक बार पुनः दोहराया कि mutation entries से कोई स्वामित्व अधिकार उत्पन्न नहीं होता — Balwant Singh v. Daulat Singh के सिद्धांत के अनुसार।
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