06/02/2026
मीणा हाईकोर्ट सिर्फ पचवारा क्षेत्र नहीं बल्कि संपूर्ण मीणा आदिवासी समुदाय की सामाजिक परंपरा और अस्मिता का एक ऐसा प्रतीक है जो हमें सत्ता के ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ रचनात्मकता संघर्ष की याद दिलाता है. आज कोई भी व्यक्ति आकर उसके अस्तित्व और अस्मिता पर सवाल खड़े कर रहा है तो एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे भी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि पचवारा के लोग अभी भी खामोश बैठे हैं.
जिस पचवारा के लोगों ने सामंती और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ कभी घुटने नहीं टेके, क्रिमिनल ट्राइब एक्ट के खिलाफ सबसे अधिक तीव्र विरोध करने वाले, आजादी के बाद सामाजिक सुधारों रचनात्मक कार्यों में सबसे आगे रहने वाला क्षेत्र आज मीणा आदिवासी हाईकोर्ट का अपमान होने पर चुप्पी साध कर बैठा है.
पचवारा क्षेत्र के पंच पटेलों ने राजस्थान की बड़ी से बड़ी ताकत को झुकाया है. जिसका जीता जागता उदाहरण मीणा आदिवासी हाई
कोर्ट है.
बाबा किरोड़ी ने सही कहा है कि पचवारा अब अपने अवसान की ओर है. शायद पचवारा अब अपने स्वार्थों में इतना उलझ गया है कि वो अपनी मान, मर्यादा और ताकत को भूल गया है.