11/08/2025
संघर्ष से सफलता तक: बहन #इंद्रा_गाड़िया_लोहार
क़स्बा- कठूमर (जिला-अलवर) में सड़क किनारे अस्थायी झुग्गी में रहने वाली इंद्रा गाड़िया लोहार का जीवन अभावों और संघर्षों से भरा रहा। माँ-बाप पारंपरिक लौहार का काम करते थे—लोहे के औज़ार बनाना, उन्हें गाँव-गाँव फेरी लगाकर बेचना और उससे घर का खर्च चलाना। न पक्की छत थी, न बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ, लेकिन इंद्रा के सपनों की उड़ान पर कोई रोक नहीं थी।
दिन में माँ-बाप के साथ फेरी और शाम को स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई, यही उसका बचपन था। कठिन परिस्थितियाँ भी इंद्रा की पढ़ाई के प्रति लगन को डिगा नहीं सकीं। उसने न सिर्फ स्कूल की पढ़ाई पूरी की, बल्कि आगे चलकर कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
इन्द्रा ने बीएससी (स्नातक) की पढ़ाई क़स्बा नगर , जिला डीग के निजी कॉलेज से और M.Sc (Chemistry subject ) से महानगर जयपुर के निजी कॉलेज से कर स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और आज क़स्बा नगर के निजी कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रही है।
इंद्रा आज उन तमाम झुग्गी-बस्तियों में रहने वाली बेटियों के लिए एक मिसाल है, जो कठिनाइयों के बावजूद कुछ कर दिखाने का जज़्बा रखती हैं। उसका संघर्ष यह साबित करता है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो हालात कितने भी विपरीत क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है।
इंद्रा – एक नाम, एक प्रेरणा।