23/02/2026
*अरिय (आर्य) और बमण (ब्राह्मण) दोनों बुद्धिस्ट शब्द हैं, जो बौद्ध भिक्षुओं को संबोधित किए गए हैं* *भारत में वर्ण व्यवस्था की शुरुआत सातवीं शताब्दी से हुई है*
=====================
एड आर एस वर्मा
आर्य बुद्धिस्ट शब्द है, पाली भाषा के *अरिय* शब्द को जब देवनागरी लिपि में लिखा जाता है तो वह *आर्य* हो जाता है,
आर्य बौद्ध विद्वानों और बौद्ध भिक्षुओं को संबोधित किया गया है इसीलिए विदेशी तथाकथित आर्य जब भारत आए इन्होंने *अरिय* शब्द को अपना बना लिया और स्वयं को आर्य कहने लगे, इसी तरह पाली भाषा का *बमण* ( ब्राह्मण) शब्द जो बुद्धिस्ट विद्वानों के लिए संबोधित किया जाता था, इसको भी इन विदेशियों ने अपना बना लिया और स्वयं को *बमण* ( ब्राह्मण) कहने लगे
यह सातवीं शताब्दी में हुआ है जब *मोहम्मद बिन कासिम* ने सिंध और पंजाब में हमला किया और उसने *इस्लाम* कबूल करने के लिए लोगों को लालच दिया, उसने यह भी पता लगवाया की समाज में किन-किन लोगों को विशेष दर्जा और सम्मान प्राप्त है तो पता चला की सबसे अधिक सम्मान *बौद्ध भिक्षुओं* और *विद्वानों* ( बमण) को प्राप्त है, इसीलिए जब उसने कराची, सिंध, पंजाब को जीत लिया और उसे प्रशासन चलाने के लिए क्षेत्रीय भाषा- भाषी लोगों की आवश्यकता महसूस हुई
तो मोहम्मद बिन कासिम के पास कुछ ऐसे लोग पहुंचे जो *बुद्धिस्ट* विद्वान नहीं थे, किंतु उन्होंने कहा कि वही समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त विद्वान है, कासिम ने अपने गुप्तचरों से पता लगवाया तो यह जानकारी हुई की समाज में बुद्धिस्ट विद्वानों और बौद्ध भिक्षुओं को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त है, कासिम ने उन तथा- कथित ब्राह्मणों को समाज में और शासन प्रशासन में उचित भागीदारी प्रदान की , यह मानकर की यह सभी लोग बुद्धिस्ट है, जबकि वे लोग *यूरेशिया* से आए हुए विदेशी थे
भारत में सातवीं शताब्दी से ही *मनुस्मृति* की नीव पड़ी थी और मुगल काल में इसे और कठोर बनाया गया, जिसमें बुद्ध धर्म का पालन करने वालों को *शूद्र* की श्रेणी में रखकर सारे सामाजिक और आर्थिक अधिकारों से उन्हें वंचित कर दिया गया
संदर्भ:-
पुस्तक:- *चचनामा*
अनुवादक:- शापुर नवसारी
पेज क्रमांक:- 91,92,96,191,192,193