27/06/2021
एक बात कोई समझा दो , बिल्कुल भी समझ नहीं आती !
अयोध्या में मन्दिर के लिए जमीन खरीद में घोटाले तो सब गिना रहे हैं , थाने जाकर रिपोर्ट कोई दर्ज नहीं कराता !
आखिर क्यौं ?
प्रथम दृष्टया लगता है कि कहीं नहीं कहीं कोई बात तो है , टीवी पर बहसें भी लगातार हो रही हैं , विपक्षी दल गरमा भी खूब रहे हैं , पर आश्चर्य सारे दस्तावेज चैनलों पर दिखाने वाली कोई भी पार्टी कोर्ट क्यौं नहीं जाती ?
जब तक थाने या कोर्ट नहीं जाएंगे तो तौहमतों और बयानों से क्या फायदा ?
जाइये न जरा , रपट लिखाइये ?
राम मंदिर दुनिया जहान के लिए कितना जरूरी है , हिन्दू से ही नहीं , किसी से भी पूछ लीजिये । करोड़ों लोग होंगे जो मन्दिर निर्माण की प्रक्रिया को भी अपनी यादों में भर लेना चाहते हैं । अभी तो जमीन के भीतर काम चल रहा है । जरा प्रथम तल का निर्माण ही शुरू होने दीजिए , राम के लाखों भक्त निर्माण कार्य देखने के लिए अयोध्या जाएंगे । श्रद्धा और भावनाओं का अनुमान लगाना मुश्किल है । लाखों लोग तो रामलला की जमीन के स्पर्श और उस पवित्र माटी को हृदय पर लगाने के लिए तड़फ रहे हैं । मन्दिर जब बन जाएगा तब तो देश के 110 करोड़ हिंदुओं में से ऐसा कोई होगा ही नहीं , जो अयोध्या न जाए ।
राम मंदिर करीब 500 साल पहले तोड़ा गया , अब अनेक बलिदानों के बाद वापस मिल रहा है । मन्दिर का फैसला चाहे कोर्ट से आया हो , परन्तु केंद्र में यदि मोदी की सरकार न बनती तो राम मंदिर अभी भी नहीं बन पाता । आखिर जिन छद्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों ने राम सेतु और अयोध्या को ही नकार दिया था , वे राम मंदिर कैसे बनने देते । कल प्रधानमंत्री ने राम मंदिर की वर्चुअल बैठक में समीक्षा की ।
मोदी न आते तो क्या यह सम्भव था कि कोई प्रधानमंत्री देश के रक्त में बसी अयोध्या की बार बार जानकारी लेता ? बिल्कुल भी नहीं । राम विरोधी लॉबी का वश चलता तो वे सारे साक्ष्य ही मिटा दिए जाते जो कोर्ट में काम आए । याद कीजिये उन नेताओं को जो अयोध्या में मन्दिर के बजाय अस्पताल , विश्वविद्यालय और यहाँ तक कि शौचालय बनाने के बयान दे रहे थे । राममंदिर के लिए जैसा माहौल चाहिए था , वह इस सरकार के आने से ही मिला ।
खैर , राममंदिर अब कोई स्वप्न नहीं , हक़ीकत है । इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि बन जाने के बाद राममंदिर न केवल विश्व के पर्यटन मानचित्र पर शामिल हो जाएगा अपितु विश्व का आठवां आश्चर्य भी बन जाएगा । वैसे तो दक्षिण भारत में आज भी ऐसे दर्जनों विराट मन्दिर हैं , जिनकी खूबसूरती के सामने ताजमहल फीका है , लेकिन राममंदिर को दुनिया का आठवां आश्चर्य बनने से रोक पाना असंभव है । राम तो घट घट के वासी हैं , उनकी महिमा और कथाएं अनंत हैं । भारतीय संस्कृति की पूछें तो राम की अयोध्या , कृष्ण की मथुरा और शिव की काशी युगों से हमारे इतिहास की गवाह हैं । गंगा के किनारे हमारी सभ्यता खड़ी हुई और विष्णु के दशावतार भारत की आत्मा में रचे बसे हैं । ये सभी आज भी जीवंत हैं ।
वैसे रामकाज में बहुत बाधाएं डाली गई । जिन्होंने डाली , वे सभी मिट गए , राम सदा रहेंगे । दरअसल समझना होगा कि हमारी संस्कृति जीवंत है सदा जीवंत । संस्कृति और सभ्यता को न तो कोई मिटा सकता है और न भुला सकता है । सच कहें तो जिस प्रकार आत्मा अजर अमर है , उसी तरह तरह राम भी हैं । राममंदिर बनने दीजिये , कोई विवाद मत खड़ा कीजिये । हाँ , कोर्ट खुले हैं , शौंक से जाइये । करोड़ों लोग चाहते हैं , राममंदिर उनके जीवनकाल में बन जाएं । रामकाज में बाधा डालने से अब न कुछ होगा और न किसी की आस्था कम होगी । तो आइए , रामनाम की सरयू में गोते लगाते हैं ।
Kaushal sikhaula