10/10/2026
मैं ही था...
मेरे बाद बस सन्नाटा बोलेगा,
जो राज़ दफ़्न थे सीने में, अब ज़माना टटोलेगा।
मैं ही था...
मेरे बाद बस खाली महफ़िल रह जाएगी,
कुछ बिखरी हुई ग़ज़लें, कुछ अधूरी बातें रह जाएँगी।
मैं ही था...
मेरे बाद बस यादों का इक कारवाँ होगा,
ज़मीं पर निशाँ मेरे, और सामने आसमाँ होगा।
मैं ही था...
मेरे बाद बस हवाओं में मेरा नाम तैरेगा,
कोई पूछेगा पता मेरा, तो वक़्त भी ठहरकर सोचेगा।
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