10/09/2025
जब्बार, जो 103 कम्युनिटी में रहते हैं, अपनी बस्ती में बदलाव लाना चाहते हैं, लेकिन एक बड़ी रुकावट थी, लोगों से बात करने और उनके सामने बोलने की हिचकिचाहट। भीड़ के सामने बोलना उनके लिए हमेशा मुश्किल रहा था।पिछले दिनों हमारी कम्युनिटी में गम्मत का आयोजन हुआ, जिसमें हमें नुक्कड़ नाटक के ज़रिए लोगों को संविधान सभा में मौजूद 15 महिलाओं के योगदान के बारे में बताना था। यह नाटक हमें 6 अलग-अलग जगहों पर करना था।पहली जगह पर जब्बार बिल्कुल भी बोल नहीं पाए। दूसरी बार भी वही स्थिति रही। लेकिन तीसरी बार, उन्होंने हिम्मत जुटाई और थोड़े शब्द ही सही, पर बोलने की कोशिश की। धीरे-धीरे उनका डर कम होने लगा। और जब आख़िरी यानी छठवीं जगह पर नाटक हुआ, तो वही जब्बार, जो शुरुआत में चुप खड़े रहते थे, अब आत्मविश्वास से बिना हिचकिचाहट के बोल रहे थे।आज जब्बार का ये सफ़र हमें याद दिलाता है कि बदलाव छोटे-छोटे क़दमों से शुरू होता है। डर को हराने का रास्ता भी एक कोशिश से ही निकलता है।