23/07/2022
*प्रेस विज्ञप्ति*
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*एनसीसी कैडेट्स द्वारा राष्ट्र ध्वज के अंगीकरण दिवस का आयोजन*
*महू भेरूलाल पाटीदार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय महू में आज महाविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स को राष्ट्रध्वज के जन्म के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ शोभा जैन एवं महाविद्यालय के स्टाफ के साथ-साथ एनसीसी कैडेट्स को मेजर डॉक्टर संजय सोहनी ने बताया कि गुलामी की काली स्याह रात के अंतिम प्रहर जब स्वतंत्रता के सूर्य के निकलने का संकेत प्रभात बेला ने दिया उस दिन 22 जुलाई 1947 को भारत की संविधान सभा कक्ष में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रध्वज विश्व एवं भारत के नागरिकों के सामने प्रस्तुत किया ।यह समय ही राष्ट्रध्वज के जन्म का पल था। भारत ने राष्ट्र ध्वज को स्वीकार कर सम्मान दिया गया।*
*मेजर डॉ संजय सोहनी ने बताया आजादी के दीवानों के बलिदान व त्याग की लालिमा राष्ट्रध्वज के रंगों में बसी है, इन्हें दीवानों के कारण राष्ट्रध्वज का जन्म संभव हुआ।14 अगस्त 1947 की रात 10:45 बजे काउंसिल हाउस के सेंट्रल हाल में श्रीमती सुचेता कृपलानी के नेतृत्व में वंदे मातरम के गायन से कार्यक्रम शुरू हुआ। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू के भाषण के पश्चात श्रीमती हंसा बेन मेहता द्वारा अध्यक्ष श्री राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रध्वज के रूप में सिल्क वाला स्वरूप सौंपा गया। सभी लोगों के समक्ष राष्ट्रध्वज के रूप में यह पहला प्रदर्शन था।" सारे जहां से अच्छा" तथा" जन गण मन" के सामूहिक गाने के साथ यह समारोह संपन्न हुआ था।* *23 जून 1947 को राष्ट्रध्वज को आकार देने के लिए एक अस्थाई समिति का गठन हुआ था ,,इस समिति ने विस्तृत विचार विमर्श के बाद राष्ट्रध्वज के बारे में निर्णय लिया और संविधान सभा में स्वीकृति प्राप्ति के उपरांत 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रध्वज का जन्म हुआ!*
*इस अवसर पर नायब सूबेदार राकेश सिंह 9एमपी बटालियन एनसीसी इंदौर राष्ट्र ध्वज के मानक बताएं ,उन्होंने सभी से अनुरोध किया किआप को यह जानना जरूरी है राष्ट्रध्वज भारतीय मानक संस्थान के आई एस आई _ 1 _1951, संशोधन 1968 में किया गया।उन्होंने बताया कि पंडित नेहरू ने कहा कि भारत का राष्ट्र ध्वज समतल तिरंगा होगा ,यह आयताकार होकर इसकी लंबाई चौड़ाई का*
*अनुपात दो _तीन होगा!* *यह तीन समान रंगों की आड़ी पट्टी का होगी। सबसे ऊपर केसरिया मध्य में सफेद तथा नीचे हरे रंग की पट्टी होगी। सफेद रंग की पट्टी पर मध्य में सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ में 24 सलाकाओ वाला चक्र होगा जिसका व्यास सफेद रंग की पट्टी की चौड़ाई के बराबर होगा इसमें केसरिया रंग साहस और बलिदान सफेद रंग सत्य और शांति का तथा हरा रंग श्रद्धा और शौर्य का प्रतीक होगा तथा 24 सालाकाओ वाला नीला चक्र 24 घंटे सतत प्रगति और प्रगति भी ऐसी जैसा कि नीला अनंत विशाल आकाश और नीला अथाह गहरा सागर!*
*इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ शोभा जैन ने भी राष्ट्रध्वज के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अमानक, बदरंग, कटी फटी स्थिति वाला राष्ट्रध्वज फहराने योग्य नहीं होता है,ऐसा करना राष्ट्रध्वज का अपमान होकर अपराध है ।अतः वक्त की मार से जब कभी राष्ट्रध्वज की स्थिति ऐसी हो जाए तो राष्ट्रध्वज को गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ अग्नि प्रवेश दिला दें या वजन के साथ रेत बांधकर पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाए।इसी प्रकार पार्थिव शरीर के ऊपर से उतारे गए राष्ट्रध्वज*
*के साथ भी सम्मानजनक ढंग से यह प्रक्रिया अपनाई जाना चाहिए, जिससे राष्ट्रध्वज का अपमान होने से बचा जा सके। उन्होंने बताया की पानी की सतह पर राष्ट्रध्वज को स्पर्श कराना, भूमि पर गिराना, जलाना या राष्ट्रध्वज पर लिखना तथा उसका व्यावसायिक उद्देश्य से उपभोक्ता वस्तु पर प्रयोग करना अपराध की श्रेणी में आता है। राष्ट्रध्वज को झुकाना भी अपमान कहलाता है।*
*कार्यक्रम में डॉ रोशन बेंजामिन, डॉ स्नेहलता व्यास, डॉ पी के सनसे, डॉ राजेंद्र कोचले, डॉ मनोज नागर, डॉ अजय कुमार तथा कैप्टन डॉ कृष्णा भूरिया और नायब सूबेदार राकेश सिंह ,श्री हेमंत जादम मुख्य लिपिक, डॉ पवन पाटीदार विशेष रूप से उपस्थित थे।*
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