Progressive Students Front- PSF

Progressive Students Front- PSF A students organization in Haryana

साथियों,अपने अतीत को जाने बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते।जब तक हम अपने क्रान्तिकारी इतिहास को नहीं जान जाते तब तक हम अपनी ताक...
01/05/2026

साथियों,

अपने अतीत को जाने बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते।जब तक हम अपने क्रान्तिकारी इतिहास को नहीं जान जाते तब तक हम अपनी ताकत और कमजोरियों को भी नहीं जान सकते। इसलिए मजदूर आंदोलनों का इतिहास जाने बिना हम उनकी मुक्ति का सपना नहीं देख सकते।

तो आइए जानते हैं कि आखिर क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस या मई दिवस।।

असल में, पहले मज़दूरों के काम के घण्टे तय नहीं थे। ‘सूर्योदय से सूर्यास्त’ के नियम के अनुसार उजाला होने से पहले मज़दूरों को कारख़ानों में पहुँच जाना पड़ता था और अँधेरा होने तक उनसे काम करवाया जाता था। मज़दूरों के काम के घण्टे 18 से 20 तक पहुँच जाते थे। इस स्थिति के ख़िलाफ़ अमेरिका के मज़दूरों ने उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में ही विरोध करना शुरू कर दिया था।

इस दौर में अमेरिका के अलावा अन्य देशों के मज़दूर भी काम के घण्टे कम करवाने आदि माँगों के लिए आवाज़ उठाना शुरू कर दिये थे। 1871 में पेरिस कम्यून के रूप में मज़दूरों ने इतिहास में पहली बार अपना राज स्थापित किया। पेरिस कम्यून केवल 72 दिन ही चल सका। लेकिन पेरिस कम्यून ने न केवल भविष्य की क्रान्तियों के लिए ज़रूरी सबक दिये बल्कि यह साबित कर दिया कि मजदूर भी अपना राज स्थापित कर सकते हैं।

इधर काम के घण्टे आठ करने का आन्दोलन अमेरिका में बढ़ता जा रहा था। “आठ घण्टे काम, आठ घण्टे मनोरंजन, आठ घण्टे आराम” के नारे के इर्द-गिर्द शिकागो के मज़दूरों ने 1 मई 1886 के दिन को आम हड़ताल का दिन तय किया। इस दिवस के तीन दिनों बाद ही 4 मई को ‘हे मार्केट चौक’ पर मज़दूरों ने इस माँग को लेकर एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया, जहाँ साज़िशाना तरीक़े से पुलिस और मालिकों ने मिलकर बम फिंकवा दिया। इस सभा में बम के धमाके की अफरातफ़री में पुलिस ने मज़दूरों की सभा पर गोली चला दी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गयी। इस घटनाक्रम में सात पुलिसकर्मी भी मारे गये। पुलिस ने मज़दूर नेताओं को जेल में ठूँस दिया, जिनमें से चार नेताओं को झूठे मुकदमे में फांसी दे दी गई।

1889 में द्वितीय इण्टरनेशनल में पूरी दुनिया में 1 मई को मई दिवस मनाने का फ़ैसला किया क्योंकि यह मज़दूर वर्ग के राजनीतिक संघर्ष का एक प्रतीक बन चुका था। मज़दूर आन्दोलन के दबाव में दुनिया के तमाम देशों समेत भारत में भी काम के घण्टे 8 को क़ानूनी मान्यता दी गयी।अमेरिका के मज़दूरों ने जब आठ घण्टे के काम की माँग की थी उस समय तकनीक और मशीनें आज की मशीनों और तकनीक के मुक़ाबले बहुत पिछड़ी हुई थीं। लेकीन अब जबकि मशीनें और तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी हैं तब मज़दूर की मज़दूरी का हिस्सा घटता जा रहा है और काम के घण्टे बढ़ते जा रहे हैं।

हमारे देश के हालात कैसे हैं
आज़ादी के बाद से केन्द्र व राज्य में चाहे जिस पार्टी की सरकार रही हो, सभी ने पूँजीपति वर्ग के पक्ष में मज़दूरों के मेहनत की लूट का रास्ता सुगम ही बनाया है। लेकिन 1990-91 में आर्थिक उदारीकरण और निजीकरण की नीतियों के लागू होने के बाद और खासकर मोदी के सत्तासीन होने के बाद से मज़दूरों पर चौतरफ़ा हमला बोल दिया गया है।
आज ये सरकारें मई दिवस के संघर्षो को मिटाना चाहती है और मजदूरों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है। सरकार द्वारा मजदूरों के 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को खत्म करके 4 लेबर कोड बनाए गए हैं जिन्हें लागू कर "काम के घण्टे 8 से 12" कर दिए गए हैं। मजदूरों के यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार पर हमला किया गया है। कम्पनी मालिक को मजदूर का खून तक निचोड़ने के लिए लेबर कोर्ट को खत्म किया जा रहा है। महिलाओं को रात के समय और खतरनाक उद्योगो में काम करवाने , मजदूरी तय करने और मजदूरी में भेदभाव करने की छूट पूंजीपतियों को दे दी गयी है। कम्पनी मालिक मजदूर को कभी भी हटा सकता है और काम के समय ले सकता है।यह 4 लेबर कोड मजदूरों की स्थिति को बिगाड़ने वाले और उनकी जिंदगी को दयनीय बनाने वाले हैं।
ग्रामीण मज़दूरों की स्थिति और भी बुरी है। खेतों, भट्ठों, भवन निर्माण आदि में काम करने वाले बहुत से मज़दूर 250 से 400 रुपये तक के रेट से काम करने पर मजबूर हैं। ‘मनरेगा’ को सरकार ने पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

साथियों आज भी मानेसर-गुड़गाँव से लेकर नोएडा तक मज़दूर अपने हक़ों की माँगों को उठाते हुए आन्‍दोलनरत हैं। असंगठित मज़दूरों ने न्‍यूनतम मज़दूरी लागू करने, न्‍यूनतम मज़दूरी में बढ़ोत्‍तरी करने, डबल रेट से ओवरटाइम देने, साप्‍ताहिक अवकाश देने आदि जैसी बिल्‍कुल जायज़ व कानूनसम्‍मत माँगों को लेकर आन्‍दोलन किये। यह देश में मज़दूर संघर्षों की एक नयी लहर की शुरुआत हो सकता है।
नोएडा में इस समय मज़दूरों का जुझारू आन्‍दोलन जारी है। लेकिन आंदोलनरत मजदूरों का सरकार लगातार दमन कर रही है। उन्हें नक्सली और आतंकवादी बताकर जेलों में भरा जा रहा है।
इसलिए दोस्तों सरकार की मजदूर आंदोलनों को कुचलने की कोशिशों का पर्दाफाश करना होगा और देशभर ने संघर्षरत मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा।।

दोस्तो हम छात्र-छात्राए क्या करें:-

क्या हम भी वोट बटोरू पार्टियों और उनके पिछलग्गु सगठनों द्वारा बनाए जा रहे विश्वकर्मा जयंती की चमक -धमक में इस दिवस के सच्चे उद्देश्यों को भूल जाये ? नही दोस्तो , हम छात्र - छात्राओं ने हमेशा से मजदूर -किसानों , शोषितों और वंचितों के इतिहास को सही मायने में जिंदा रखा है इसलिए आज हम छात्र -छात्राओं का यह फर्ज है कि हम मई दिवस की ऐतिहासिक औऱ क्रांतिकारी विरासत को याद करें।

इसलिए प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फ्रंट -पीएसएफ छात्र -छात्राओं से अपील करता है कि आप सभी हमारे साथ जुड़े और सरकार द्वारा लाए गए मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड का विरोध करे और अपने कॉलेज-यूनिवर्सिटी कैम्पसों में जनवादी माहौल कायम करने के लिए गैर-समझौतावादी संघर्ष तेज करें।

#दुनियां के मजदूरों एक हों ✊✊



#मजदूरदिवस #1मई


Satish Moth Ravi Verma

27/04/2026

संयुक्त छात्र मोर्चा के आह्वाहन पर छात्र महापंचायत में पीएसएफ की तरफ से साथी सतीश अपनी बात रखते हुए..

#छात्रपंचायत #जीजेयू #इनसोहिसार

27/04/2026

27 अप्रैल को सुबह 11 बजे क्रांतिमान पार्क हिसार में संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले छात्र पंचायत ।।

#इनसो #इनसोहिसार #छात्रपंचायत #जीजेयू

दोस्तो,          LGBTQ समुदाय के अधिकारों को प्रभावित करने वाला प्रस्तावित LGBTQ बिल 2026 गहरी चिंता का विषय है, क्योंकि...
22/04/2026

दोस्तो,
LGBTQ समुदाय के अधिकारों को प्रभावित करने वाला प्रस्तावित LGBTQ बिल 2026 गहरी चिंता का विषय है, क्योंकि यह बिल कथित रूप से लैंगिक पहचान और यौनिक अभिव्यक्ति पर प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू करने की दिशा में है, जो न केवल एक विशेष समुदाय के अस्तित्व, पहचान और गरिमा पर सवाल खड़ा करता है। हिंदुत्ववादी विचारधारा से प्रेरित भाजपा सरकार, लंबे समय से लिंग और सामाजिक व्यवस्था से संबंधित एक कठोर एवं ब्राह्मणवादी अवधारणा को थोपने का प्रयास करती रही है। यह विधेयक उसी दृष्टिकोण को दिखाता है, जो व्यक्तियों को स्वयं को परिभाषित करने के अधिकार से वंचित करता है।

13 मार्च 2026 को, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने लोकसभा में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन बिल, 2026 पेश किया। यह विधेयक ज्यादातर ट्रांसजेंडर लोगों को बाहर कर देता है और केवल कुछ विशेष समूहों तक सीमित रह जाता है। आरोप यह भी है कि यह बिल ट्रांस मेन, ट्रांस वीमेन, नॉन-बाइनरी लोगों और ख्वाजा सरा जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले व्यक्तियों को पूरी तरह बाहर रखता है। यह बिल केवल हिजड़ा, किन्नर, अरावानी, जोगता, यूनुक और इंटरसेक्स लोगों को ही ट्रांसजेंडर की परिभाषा में शामिल करता है, जो नालसा जजमेंट के सेक्शन 129 (2) का सीधा उल्लंघन है। नेशनल लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2014) के ऐतिहासिक निर्णय में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पुष्टि की कि लिंग पहचान आत्म-परिकल्पना पर आधारित है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिंग की आत्म-पहचान का मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने माना था कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अनुच्छेद 14, 15, 19, और 21 के तहत पूर्ण संवैधानिक संरक्षण का हकदार है, जो समानता, गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और गरिमा के साथ जीने के अधिकार की गारंटी देता है। उस ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि ट्रांसजेंडर लोगों की स्व-प्रतिपादित पहचान को कानूनी मान्यता दी जाए।

आज भी समाज में LGBTQ समुदाय को संकीर्ण मानसिकता, पूर्वाग्रह और रूढ़िवादी सोच के चलते “असामान्य” या “अस्वीकार्य” मान लिया जाता है, जिसके कारण उन्हें परिवार और समाज से बहिष्कार, मानसिक उत्पीड़न, हिंसा तथा शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह बिल शरीर और निजता पर सीधा हमला है। इसमें अस्पतालों को ट्रांसजेंडर लोगों की सर्जरी से जुड़ी सारी जानकारी सरकार को देने का प्रावधान है, जो निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
सरकार का दावा है कि मूल ट्रांस एक्ट कभी भी स्व-प्रतिपादित पहचान को शामिल करने के लिए नहीं था। लेकिन सच्चाई इसके ठीक उलट है। ट्रांस एक्ट में स्पष्ट परिभाषा दी गई है कि ट्रांसजेंडर वह व्यक्ति है जिसका जेंडर जन्म के समय दर्ज सेक्स से मेल नहीं खाता, चाहे मेडिकल स्थिति कुछ भी हो। नालसा जजमेंट के सेक्शन 129 (2) में भी केंद्र और राज्य सरकारों को ट्रांसजेंडर लोगों की स्व-चयनित जेंडर पहचान- मेल, फीमेल या थर्ड जेंडर को कानूनी मान्यता देने का आदेश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जेंडर पहचान का फैसला व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक स्थिति और स्व-प्रतिपादित पहचान से होना चाहिए, न कि किसी बायोलॉजिकल टेस्ट से। कोर्ट ने यह भी कहा था कि विभिन्न जेंडर पहचानों को शामिल न करना समाज की नैतिक विफलता है।सरकार का कहना है कि एक्ट का दुरुपयोग हो सकता है और लोग फर्जी तरीके से ट्रांस खुद को ट्रांस घोषित करके लाभ ले सकते हैं। लेकिन आंकड़े कुछ और कहते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लगभग चार लाख ट्रांसजेंडर लोग हैं। इनमें से केवल 37 हजार को ही ट्रांसजेंडर कार्ड मिल पाया है। आयुष्मान भारत बीमा का लाभ सिर्फ तीन हजार लोगों (0.75 प्रतिशत) तक पहुंचा है। पुनर्वास या कौशल प्रशिक्षण का लाभ 1,500 से भी कम लोगों को मिला है। यानी कुल ट्रांस आबादी का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा लाभ ले पाया है। सरकार ने अभी तक दुरुपयोग का कोई ठोस उदाहरण नहीं दिया है। इसके अलावा फ्रॉड के लिए पहले से ही कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

प्रदर्शनकारी अब सरकार से कुछ सीधे सवाल भी पूछ रहे हैं: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के राष्ट्रीय परिषद से परामर्श क्यों नहीं लिया गया? जो ट्रांसजेंडर व्यक्ति पहले ही मूल कानून के तहत अपना जेंडर बदल चुके हैं, उनका क्या होगा? कथित दुरुपयोग के सबूत कहां हैं और वैध लाभार्थियों को क्यों सजा दी जा रही है?

समुदाय का एकमत है कि यह बिल नालसा जजमेंट और मौलिक अधिकारों दोनों का उल्लंघन करता है। इसलिए उनकी मांग बिल को तुरंत वापस लेने और ट्रांस समुदाय से सही मायने में बातचीत करने की है। विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे है।

सुरक्षा-प्रावधानों को सुनियोजित ढंग से समाप्त कर देता है, और उनके स्थान पर राज्य की निगरानी, चिकित्सा-संबंधी अवरोधों (medical gatekeeping), और नौकरशाही नियंत्रण वाली एक नई व्यवस्था स्थापित कर देता है। यह बिल नालसा जजमेंट को भी दरकिनार करता है जिसमें सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि ट्रांसजेंडर लोगों की स्व-प्रतिपादित पहचान को कानूनी मान्यता दी जाए। यह विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों क संवैधानिक अधिकारों पर एक सीधा हमला है।

PSF हरियाणा इस जनविरोधी और भेदभावपूर्ण LGBTQ बिल 2026 का कड़ा विरोध करता है और सरकार से इसकी तत्काल वापसी की मांग करता है।साथ ही, PSF हरियाणा सभी प्रगतिशील संगठनों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता से अपील करता है कि वे एकजुट होकर इस अन्यायपूर्ण कानून के खिलाफ आवाज उठाएं और संविधान, समानता, स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा के लिए मजबूत जनआंदोलन खड़ा करें, क्योंकि यह केवल LGBTQ समुदाय का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे समाज के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।

जारीकर्ता : Progressive Students Front- PSF
संपर्क : 080598 70115

फोटो साभार: आउटलुक इंडिया

#मोदीजनताविरोधी

 #सिया गुलेरिया को न्याय दो। #सिया गुलेरिया के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा दो। साथियों,प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फ्रंट हिस...
19/04/2026

#सिया गुलेरिया को न्याय दो।
#सिया गुलेरिया के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा दो।

साथियों,
प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फ्रंट हिसार (हरियाणा), हिमाचल प्रदेश के सरकाघाट के गोपालपुर में 19 वर्षीय छात्रा, SFI की कार्यकर्ता सिया गुलेरिया की दिनदहाड़े हत्या की घटना पर गहरा शोक और कड़ी निंदा व्यक्त करता है।

हाल ही में सिया (SFI कार्यकर्ता) की एक नशेड़ी द्वारा की गई निर्मम हत्या ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता को उजागर करती है बल्कि सरकार की तथाकथित महिला सुरक्षा नीतियों (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं) की सच्चाई भी सामने लाती है। यह घटना कोई पहली घटना नहीं है ना जाने कितनी महिलाओं के साथ ऐसी अमानवीय घटनाएं घटित होती है। एक ओर सरकार महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के खिलाफ अपराध, विशेषकर रेप की घटनाएं, लगातार बढ़ती जा रही हैं—जो इस दोहरे रवैये को उजागर करती है। इस जघन्य हत्या के बाद सरकार द्वारा मात्र 10 लाख रुपये की सहायता देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है जो न्याय का विकल्प नहीं हो सकता। यह पीड़ित परिवार के साथ अन्याय है और व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
PSF हरियाणा इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है और स्पष्ट रूप से न्याय की मांग करता है।
साथ ही, हम यह भी मांग करते हैं कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा महिला सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम ज़मीनी स्तर पर लागू किए जाएं।

#सियागुलेरिया
SFI - Students' Federation of India

Progressive Students Front- PSF जीजेयू प्रशासन और हिसार प्रशासन के द्वारा इनसो के कार्यकर्ताओं का दमन करने का विरोध करता...
19/04/2026

Progressive Students Front- PSF जीजेयू प्रशासन और हिसार प्रशासन के द्वारा इनसो के कार्यकर्ताओं का दमन करने का विरोध करता है।
सम्मेलन के लिए सेमिनार हॉल की अनुमति न मिलने पर भड़के इस विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है जिसके कारण शहर में धारा 163 लागू की गई है।

इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (इनसो ) हरियाणा में जननायक जनता पार्टी के छात्र विंग के रूप में काम करता है।
कुछ दिन पहले इनसो ने जीजेयू में सम्मेलन के लिए सेमिनार हॉल न मिलने के कारण विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान वीसी सर ने उनसे कोई बातचीत नहीं की,जिसके कारण गुस्साए छात्रों ने वीसी ऑफिस के अंदर घुसने का प्रयास किया। इस दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़प हो गई।

प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया हुआ था जो कि सरासर गलत है। विरोध प्रदर्शन करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है। वर्तमान फासीवादी भाजपा सरकार ने कॉलेज , विश्वविद्यालयों को पुलिस छावनी बना कर रख दिया है। ये पुलिसबल इसलिए लगाया जाता है ताकि वहां जनवादी माहौल कायम होने से रोक सके।

पुलिस ने इनसो और जेजेपी के 6 कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी तरीकों से गिरफ्तार किया। पुलिस रात को उनके घरों में घुस गई और एक महिला साथी को तो बिना महिला पुलिस के ही गिरफ्तार करके ले गई। इसके विरोध में जननायक जनता पार्टी के बड़े चेहरे हरियाणा के पूर्व उप मुख्यमंत्री और उनके भाई दिग्विजय चौटाला व अन्य थाने में अपनी गिरफ्तारी देने पहुंचे।

पर हमें यहां इन वोट बटोरू पार्टियों के नेताओं के दोहरे चरित्र का भी पर्दाफाश करना चाहिए। जो दुष्यन्त चौटाला आज इसे पुलिस की गुंडागर्दी करार दे रहे हैं वो जब हरियाणा के उप मुख्यमंत्री थे तब किसान आंदोलन में किसानों पर अत्याचार करने वाली पुलिस इन्हें गुंडा नहीं दिख रही थी। तब इन्होंने ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी भाजपा के साथ मिलकर हर तरीके से आंदोलनकारियों का दमन किया था । वास्तव में सभी वोट बटोरू पार्टियों का मकसद जनता का शोषण करके सत्ता हथियाना ही होता है। जब ये नेता सत्ता में होते हैं तब इन्हें किसान, मजदूर ,दलित , छात्र ,महिलाएं कोई याद नहीं आता।
अतः साथियों हमे इन लोगों के चरित्र को समझते हुए हमेशा सही का साथ देना चाहिए और गलत के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।।

जारीकर्ता :- प्रोग्रेसिव स्टूडेंटस फ्रंट (हरियाणा )
संपर्क :- 8059870115

#इनसोहिसार #जेजेपी

एनसीआर में अपनी मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे मजदूरों का साथ दो।।योगी सरकार द्वारा मज़दूर आन्‍दोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं प...
16/04/2026

एनसीआर में अपनी मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे मजदूरों का साथ दो।।
योगी सरकार द्वारा मज़दूर आन्‍दोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर “नक्‍सलवाद” व “आतंकवाद” के झूठे आरोप लगाये जाने का विरोध करो।।

साथियों मानेसर-गुड़गाँव से लेकर नोएडा तक मज़दूर अपने हक़ों की माँगों को उठाते हुए आन्‍दोलनरत हैं। मानेसर के मज़दूरों ने पहले ही अपने संघर्ष के बदौलत एक जीत हासिल की और कम्‍पनियों को मज़दूरी में बढ़ोत्‍तरी व डबल रेट से ओवरटाइम का एलान करना पड़ा।
अब नोएडा में मज़दूर आन्‍दोलन इसके ठीक बाद ही शुरू हो गया। इसके ठीक पहले देश के कई हिस्‍सों में असंगठित मज़दूरों ने न्‍यूनतम मज़दूरी लागू करने, न्‍यूनतम मज़दूरी में बढ़ोत्‍तरी करने, डबल रेट से ओवरटाइम देने, साप्‍ताहिक अवकाश देने आदि जैसी बिल्‍कुल जायज़ व कानूनसम्‍मत माँगों को लेकर आन्‍दोलन किये। यह देश में मज़दूर संघर्षों की एक नयी लहर की शुरुआत हो सकता है।

नोएडा में इस समय मज़दूरों का जुझारू आन्‍दोलन जारी है। लेकिन आंदोलनरत मजदूरों का सरकार लगातार दमन कर रही है। उन्हें नक्सली और आतंकवादी बताकर जेलों में भरा जा रहा है जिसके तहत अब तक लगभग 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सरकार द्वारा लागू किए गए 4 लेबर कोड मजदूरों के खिलाफ हैं। ये कोड मालिकों को ताकत देते हैं , छटनी आसान करते है,काम के घंटे बढ़ाते है,यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को सीमित करते हैं। मजदूरों पर अत्याचार भी इसी एवज में किए जा रहे हैं। नोएडा में लगातार मजदूर नेताओं और बिगुल के साथियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
दिशा छात्र संगठन के युवा कवि तनुज कुमार को भी पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया है।
लेकिन वास्‍तव में मोदी सरकार और साथ ही योगी सरकार की यह नीति है कि जनता के हक़ों के लिए संघर्ष करने वालों पर “नक्‍सली”, “उग्र वामपंथी” आदि के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और फिर उनके दमन को सही ठहराने का प्रयास किया जा रहा है।

इसलिए दोस्तों सरकार की मजदूर आंदोलनों को कुचलने की कोशिशों का पर्दाफाश करना होगा और देशभर ने संघर्षरत मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा।।
पीएसएफ आंदोलनरत मजदूरों का समर्थन करता है और सरकार द्वारा इन आंदोलन में भाग लेने वाले मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारियों का पुरजोर विरोध करता है।।

#मजदूरआंदोलन #नोएडा #मानेसर #गुड़गांव

आज अंबेडकर जयंती के अवसर पर PSF के साथी अलग अलग जगह पर मौजूद रहे।कुछ साथियों ने हांसी में बुक स्टॉल लगाई जिसमें प्रगतिशी...
14/04/2026

आज अंबेडकर जयंती के अवसर पर PSF के साथी अलग अलग जगह पर मौजूद रहे।
कुछ साथियों ने हांसी में बुक स्टॉल लगाई जिसमें प्रगतिशील साहित्य के साथ साथ डॉ अंबेडकर द्वारा लिखी किताबें जैसे 'राज्य और अल्पसंख्यक ' , डॉ अंबेडकर के भाषण, शूद्रों की खोज, महाड़ आंदोलन, वीजा के इंतजार में, जातिभेद का उच्छेद आदि रखी गईं थी। साथ ही भगत सिंह के लेख,उधम सिंह और अन्य क्रांतिकारी,फूलन देवी, ज्योतिबाफूले, रमाबाई, कार्ल मार्क्स, लेनिन, माओ से जुड़े साहित्य का संकलन किया गया था।
किताबों के प्रति खासी रुचि दिखाते हुए
लोग बहुत सी किताबें लेकर गए।।

वहीं PSF के कुछ साथी डीएससी छात्र संगठन के कार्यक्रम में महम में मौजूद रहें जहां साथी सतीश ने अंबेडकर के जीवन और उनके संघर्षों पर अपनी बात रखी।


#बाबासाहेबआंबेडकर #आंबेडकर #हिसार

आज के सेमिनार को सफल बनाने के लिए सभी साथियों का क्रांतिकारी आभार ✊ #बाबासाहेबआंबेडकर  #भगतसिंह    #जीजेयू          #हिस...
10/04/2026

आज के सेमिनार को सफल बनाने के लिए सभी साथियों का क्रांतिकारी आभार ✊

#बाबासाहेबआंबेडकर #भगतसिंह #जीजेयू #हिसार #आंबेडकर

09/04/2026

कल 10 अप्रैल सुबह 10 बजे
गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी,हिसार के सेमिनार हॉल - 2 में आइए और डॉ अंबेडकर और शहीद भगत सिंह के विचारों को जानिए।।

#बाबासाहेबआंबेडकर #भगतसिंह #हिसार #जीजेयू

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