31/01/2025
**प्रथम पुण्यतिथि विशेष**
**छाजूराम गाढ़ा: एक कर्मठ किसान की प्रेरणादायक जीवन गाथा**
*हल जोतकर परिवार को संवारने वाले छाजूराम गाढ़ा, 31 जनवरी 2024 को हुए पंचतत्व में विलीन*
भिवानी जिले के बहल गांव में जन्मे छाजूराम गाढ़ा का जीवन संघर्ष और कर्मठता की मिसाल रहा है। 1963 में किसान चंदगीराम और भरपाई देवी के घर जन्मे छाजूराम छह भाइयों और चार बहनों के परिवार में पले-बढ़े। जहां उनके सभी भाई शिक्षित होकर अपने-अपने कार्यों में लगे, वहीं छाजूराम ने अनपढ़ होते हुए भी अपने परिश्रम से पूरे परिवार को संभाला।
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**संघर्ष और मेहनत का सफर**
छाजूराम गाढ़ा ने खेती-किसानी और पशुपालन को अपनी जीविका का आधार बनाया। बिजली और आधुनिक संसाधनों के अभाव में, कुएं से रस्सी के सहारे पानी निकालकर खेतों की सिंचाई करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर खेतों में हल चलाया और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाई।
उनका विवाह स्वतंत्रता सेनानी स्व. सहजराम सांगवान की पुत्री रामरती देवी से हुआ, जो पांचवीं तक शिक्षित थीं। रामरती देवी न केवल गृहस्थी संभालती थीं, बल्कि खेती में भी पति का सहयोग करती थीं।
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**पारिवारिक जीवन और नई पीढ़ी को शिक्षित करने का सपना**
छाजूराम ने अपने बच्चों को शिक्षा देने का पूरा प्रयास किया। उनके दो पुत्र मनजीत सिंह और रणसिंह तथा एक पुत्री सोनिका हैं, जो आज अपने-अपने परिवारों के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
छाजूराम गाढ़ा का जीवन सादगी और परोपकार से भरा रहा। पक्षियों को दाना-पानी देना, पेड़-पौधों की देखभाल करना और समाजसेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा था।
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**अंतिम समय और विदाई**
करीब ढाई दशक पहले उन्होंने बहल में भिवानी रोड पर मकान बनाकर परिवार समेत वहां रहना शुरू किया। समय के साथ बढ़ते प्रदूषण और अन्य कारणों से उन्हें सांस की समस्या हो गई। वे हुक्का पीते थे और दवा के तौर पर शराब का सेवन भी करते थे, जिससे उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे कमजोर होता गया।
31 जनवरी 2024 की सुबह 7 बजे, घर की चारपाई पर बैठे-बैठे वे इस दुनिया को अलविदा कह गए। गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।
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**एक युग का अंत, लेकिन यादें अमर रहेंगी**
यह जीवन गाथा उनके सुपुत्र रणसिंह गाढ़ा, जो पेशे से पत्रकार हैं, ने अपने पिता की स्मृति में लिखी है। उनका कहना है— *"आज मेरे पिताजी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनके संघर्षों की सीख हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।"*
छाजूराम गाढ़ा का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची मेहनत, परिवार के प्रति समर्पण और ईमानदारी से किया गया कार्य व्यक्ति को अमर बना देता है। वे भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणादायक गाथा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।