27/04/2026
हरिद्वार, 26 अप्रैल।
प्रेस क्लब हरिद्वार द्वारा “आर्थिक उदारीकरण बनाम बाजारीकरण के दौर में पत्रकारिता” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य बालकृष्ण ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में टीवी एंकर प्रियंका शर्मा ने अपने विचार साझा किए।
अपने संबोधन में निशंक ने कहा कि ‘उदंत मार्तंड’ के समय से लेकर आज के डिजिटल युग तक मीडिया की प्रभावशीलता बनी रही है। उन्होंने पत्रकारिता को जिम्मेदारीपूर्ण और परिश्रम-आधारित पेशा बताते हुए पेड न्यूज़ और फेक न्यूज़ जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई। साथ ही फील्ड रिपोर्टिंग में कमी, “टेबल जर्नलिज्म” की प्रवृत्ति और घटती जवाबदेही को मीडिया के लिए गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले के दौर में पत्रकारिता एक मिशन के रूप में की जाती थी, जब सीमित संसाधनों के बावजूद पत्रकार सच्चाई को सामने लाने के लिए दूर-दराज़ क्षेत्रों तक जाते थे।
मुख्य वक्ता प्रियंका शर्मा ने 24 घंटे के समाचार चैनलों में बढ़ती सनसनीखेज़ता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डिबेट कार्यक्रमों में शोर-शराबा और एंकर-प्रधान शैली हावी हो रही है, जिससे समाचार की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी बताया कि जहां टीवी दर्शकों की संख्या घट रही है, वहीं डिजिटल मीडिया तेजी से उभर रहा है और अब हर व्यक्ति सूचना प्रसार में भागीदार बन गया है। उन्होंने संतुलित, विश्वसनीय और सार्थक कंटेंट के चयन पर बल देते हुए कहा कि सेल्फी संस्कृति के प्रभाव से न्यूज़ सेंस कमजोर हो रहा है। उन्होंने अपने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म “न्यूज़ अड्डा” के माध्यम से स्वतंत्र पत्रकारिता की ओर बढ़ते रुझान को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि के विभिन्न संस्थानों—शोध, आयुर्वेद, वेलनेस, आचार्यकुलम् और विश्वविद्यालय—के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्यों के प्रसार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग शिक्षा के जरिए युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जा रही है और उन्हें सामाजिक विकृतियों से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में योगदान, रोजगार सृजन और वैश्विक स्तर पर पहचान बढ़ाने में इन प्रयासों की भूमिका भी स्पष्ट की। साथ ही औषधीय पौधों के दस्तावेजीकरण, आयुर्वेदिक शोध और आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि शोध-आधारित तथ्यों के माध्यम से सत्य को स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि आचार्य बालकृष्ण को Stanford University और Elsevier द्वारा विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है। उनका कार्य आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ते हुए प्रमाण-आधारित अध्ययन और प्राकृतिक चिकित्सा के विकास को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पतंजलि विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन एवं जर्नलिज्म के नए पाठ्यक्रम की घोषणा रहा। इस पाठ्यक्रम में आधुनिक शिक्षा के साथ योग, संस्कार और अत्याधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में डिजिटल स्टूडियो और उन्नत मीडिया लैब स्थापित करने की योजना भी साझा की गई, जिससे छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके और उन्हें नैतिक व प्रामाणिक पत्रकारिता के लिए तैयार किया जा सके।
यह संगोष्ठी पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप, चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर गंभीर मंथन का प्रभावी मंच बनी। इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. किरण त्रिवेदी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।