सतनामी निर्वान साध समाज संगठन

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सतनामी निर्वान साध समाज संगठन सतनामी निर्वान साध समाज

सतनामी साध समाज एक ऐसा समाज हैं जिसमें जाति वर्ण इत्यादि नहीं हैं मूल आस्था सिर्फ उस मालिक से हैं जिसनें इस समस्त ब्रहमांड की रचना की हैं साध सतनामी मत में किसी भी भांति की पूजा पाति तप जप नेम व्रत की मानता नहीं हैं सिर्फ एक मालिक का विश्वास तथा उस मालिक के द्वारा बताये गये नियमों के
अनुसार संसारिक जीवन का गुजर बसर करना हैं और वो नियम सतनामी साध समाज के धार्मिक ग्रन्थ निरवाण ज्ञान में संग्रहित ह

ैं। जो साखी,वाणी, मंत्र के रूप में पढे जाते हैं जो प्राणी इस मूल ज्ञान को पूर्ण रूप से ग्रहण कर उसी के अनुसार संसारिक जीवन का गुजर बसर करता हैं उसे मालिक इस संसार के जन्म मरण के बंधन से मुक्त कर देते हैं। सतनामी साध समाज के धार्मिक ग्रन्थ निरवाण ज्ञान का सामूहिक गुणगान प्रतिमाह पूरनमासी को सभी साध संगत करती हैं।
साध सतनामी समाज के उपदेशक गुरू सतगुरु उदादास बाबा है। निरवाण (मोक्ष दायनी) ज्ञान सतगुरु उदादास बाबा का उपदेश हैं। जिसका गुरूजी ने संवत् 1726 में साक्षात दर्शन देकर एक विशाल मेला कायम किया जो भण्डारा के नाम से जाना जाता हैं ।
भण्डारा सतनामी साध समाज का एक महान धार्मिक उत्सव हैं इसमें देश परदेश की सभी साध संगत बहुत ही चाव भाव से आपसी मत भेद समेट कर बहुत ही प्रेम प्रीत से भेले होती हैं।और सतगुरु उदादास बाबा के उपदेशों का गुणगान करती हैं।
। सतनामी निर्वान साध समाज एक ऐसा पथ प्रदान करता है जिसके नियम ग्यान अनुभव से मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है इस प्राणी मात्र को आवा गमन से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है यह समाज बहुत प्राचीन समाज है ओर इसके नियम भी दुनिआ दारी से बहुत भिन्न है यह पाखंड वाद के सख्त खिलाफ है. सादा जीवन सादा खाना ओर सादे वस्त्र उच्च विचार ही इस समाज की पहली पहचान प्रदर्शित करती है! जीव हत्या के सख्त खिलाफ ओर पराणी मात्र के उपकार मे यह समाज सर्व परी रहा है! ।। सतनामी साध समाज के नियम ।।
एक बृहद समाजिक एकता की शुरुआत के लिए स्वयं को दूसरों से छोटा मानने की दृढ मंशाशक्ति अपने मन में निर्माण करें हम !
उद्देश्य –
1- साध सतनामी समाज अपने अपन में एक ऐसा संगठन है! जिसकी गरिमा इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों से लिखी हुई है!
2- जिस प्रकार से पहले हम सब पारिवारिक माहौल में अपनी-अपनी समस्याओं का समाधान करते और मानते थे, उस स्थिति का पुनर्निमाण करें!
3- सामाजिक नियम आजकल की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर पुन: बनाने का प्रयास करें ! हम
4- समाजिक मामलों के निपटाने में जिस किसी की भी योग्यता हो!उसे बिना भेदभाव और पक्षपात के आगे लाया जाए!
5- साध समाज में गरीब से गरीब साध पर पहले ध्यान देकर एक सौहार्दपूर्ण माहौल बनाया जाना उचित होगा!
6- समाज के बडों का समाज के अन्य साधों द्वारा मान सम्मान एवं जनसमर्थन देने की जिम्मेदारी को पूरा करते हुए समाजिक एकता और सुधार के लिए रणनीति बनाना उचित होगा!
7- एक सकारात्मक विचार वाले साधों के समूह के साथ मिलकर सामाजिक चेतना और जागरुकता का निर्माण करें!हम
8- केवल सामाजिक हित को ध्यान में रखते हुए समर्पण और त्याग की भावना जागृत करना हैं!
9- एकता में ही बल है इस उद्देश्य से तन मन धन से सहयोग के लिए जागरूक रहें!हम और अन्य साधों को भी प्रेरित करें!हम
10- नकारात्मक विचार और स्वार्थी भावना वाले साधों से कूटनीतिक तरीके से दूरी बना कर उन्हें दूर रखने का एहसास भी कराएं!
11- समाज में किसी भी साध या परिवार पर हो रहे! भेदभाव और प्रताड़ना के विरुद्ध एकमत से साथ दें!हम सभी
12- समाज के भीतर हो रहे दुष्कृत्यों से दूरी बनाकर नई पीढी को इस बात की सांकेतिक शिक्षा दें!कि साध समाज सिर्फ अच्छे और सच्चे साधों के साथ किसी भी परिस्थिति में साथ खडा रहेगा!
13- आपसी सामन्जस्य एवं मर्यादित आचरण, अन्य साधों से भाईचारा एवं मैत्रीपूर्ण माहौल के लिए योजना को कार्यरूप दें!हम
14-पढ़े लिखे समझदार नई पीढी के नौजवान साधों को समाज के प्रति जवाबदार बनाना और समय-समय पर उन्हें उत्तरदायित्व देना!
16-साधों के आचरण और परम्परा को ध्यान में रखते हुए सात्विक खान पान के प्रति जागरूक करना!
17-आत्मावलोकन की प्रवृति डालना जिससे हम अपनी स्वयं की कमियों को दूर करें!और खूबियों को निखारें!
|| सतनाम ||

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