03/09/2026
को धारण कर #राष्ट्रप्रेम #मानवकल्याण
के साक्षात प्रतिमूर्ति महामहिम राज्यपाल महोदय Lt Gen Gurmit Singh जी आपकी आत्मा तथा आत्मा के स्वर में #सभी_के_लिए_समान_आचरण #सादगी #विनम्रता #संवेदनशीलता
एवं #निस्वार्थ_भाव से #मानव_सेवा
#मानवता ही आपकी #महानता इस #हृदय_स्पर्शी_क्षण को प्रदर्शित करती है आपको हृदय की गहराइयों से #जयहिंद
Jai Hind General
पंतनगर विश्वविद्यालय के रास्ते पर एक दृश्य बार-बार दोहराता रहा। उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल महोदय Lt Gen Gurmit Singh का काफ़िला गुजरता, और लगभग 14–15 साल का एक किशोर लड़का पूरे मन से सलामी देता। उस सलामी में न कोई औपचारिकता, न कोई दिखावा—बस वर्दीधारी लोगों के प्रति उसका स्वाभाविक, मासूम आकर्षण और गहरा सम्मान। ये सिलसिला दो या तीन बार चला जब जब राज्यपाल जी पंतनगर यूनिवर्सिटी के दौरे पर गए। हर राज्यपाल महोदय ने उसे सिर्फ़ देखा नहीं, हमेशा नोटिस किया। तीसरी बार उन्होंने अपने एडीसी को बुलाकर बच्चे के बारे में जानकारी जुटाने को कहा। पता चला कि वह बौद्धिक विकास की एक चुनौतीपूर्ण राह से गुजर रहा है, लेकिन उसकी आँखों में देश, अनुशासन और वर्दी के प्रति एक चमकदार उत्साह है। उसके बाद राज्यपाल जी ने उस बच्चे को पूरे सम्मान सहित उसके माता पिता के साथ यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस में आमंत्रित किया। उससे मिले , बातें की , उसका उत्साह बढ़ाया। वो उसके माता-पिता से मिले—उनका मान बढ़ाया, उनके धैर्य और संघर्ष को सम्मान दिया।
यह केवल एक मुलाक़ात नहीं थी।
यह उस नेतृत्व की पहचान थी, जहाँ संवेदनशीलता पद से बड़ी हो जाती है,
जहाँ हर छोटे प्रयास को देखा जाता है,
और जहाँ लोगों के दिल जीतना किसी भी प्रोटोकॉल से ज़्यादा अहम माना जाता है।
इस तरह के संघर्ष से गुजर रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए यह केवल सांकेतिक कदम नहीं—एक सच्चा, हृदय-स्पर्शी क्षण था।
कभी-कभी एक सलामी और एक स्नेहभरा स्पर्श… किसी बच्चे की दुनिया रोशन कर देता है।
और यही—राज्यपाल जी की सबसे सुंदर पहचान है।