वन अधिकार एवं ग्रामीण विकास संगठन-हि. प्र.

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वन अधिकार एवं ग्रामीण विकास संगठन-हि. प्र. Forest Right Act & Gramin Vikas Implementation in HP Please contact on what's app

11/09/2025

नेशनल हाइवे का निर्माण विकास की धुरी है, किंतु निर्माण कार्य में अनियमितताएं, नियमों को ताक पर रखना, स्थानीय लोगों के घर व खेतों का नुकसान करना, घोटाले करना, जीवन यापन को ही अस्त व्यस्त करना, पर्यावरण की हानि करना, ये सब जनता के विश्वास को तोड़ते हैं और ये सब NH 70 (New NH- 03) के निर्माण कार्य में हो रहा है जिससे समस्त प्रभावितों के साथ-साथ सरकाघाट व धर्मपुर क्षेत्र की जनता परेशान हो रही है, समस्त जनता पर नकारात्मक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है और लोगों ने कई बार निर्माण कंपनियों के घटिया निर्माण कार्यों और विकास के नाम पर किए जा रहे विनाश को उजागर भी किया है।
किसी भी नेशनल हाइवे का निर्माण NHAI की निगरानी में होता है जिसमें केंद्र और राज्य की सरकारों की विभिन्न संस्थाओं की संयुक्त जिम्मेवारी होती है कि नेशनल हाइवे का निर्माण पारदर्शी तरीके से और गुणवत्ता के साथ किया जाए, लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए जनसंवाद हो और प्रशासनिक स्तर पर समाधान पेश किए जाएं। लेकिन पिछले कुछ समय से इस नेशनल हाइवे NH- 03 जो हमीरपुर - अवाहदेवी - सरकाघाट - पाड़छू- धर्मपुर होते हुए मंडी के लिए बन रहा है में कार्यरत कंपनियों के घटिया निर्माण कार्य का स्थानीय लोगों द्वारा भरपूर विरोध किया गया है और कुछ लोगों ने माननीय उच्च न्यायालय में में न्याय की गुहार लगाई है। इसमें भारी अनियमितताएं हुई हैं और जिला प्रशासन जैसे DC कार्यालय व स्थानीय प्रशासन जैसे SDM कार्यालय द्वारा भी निमार्ण कार्य की जमीनी निगरानी में ढिलाई, शिकायतों पर कार्यवाही न करना, जनसुनवाई और लोकतांत्रिक जनसंवाद न करना और जवाबदेही की परवाह ही नहीं की गई। निर्माण कंपनी की मनमानी, NHAI aur MORTH अधिकारियों का लापरवाह रवैया इन सबने लोकतांत्रिक तरीके से सुलझने वाली प्रभावितों की इस समस्या को आम जनता की समस्या बना दिया है क्योंकि इस सड़क पर चलने वाला, अपनी गाड़ियों में या बसों में आने जाने वाला हर व्यक्ति परेशान है। भारत में जनता सर्वोच्च है और विधायक जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि जिनका कर्तव्य और अधिकार है कि जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को शासन प्रणाली के समक्ष रखा जाए। इस NH 70 New NH- 03 निर्माण उनकी भी अनदेखी की जा रही है और शायद पिछले कुछ दिनों से स्थानीय विधायक को केंद्रीय व राज्य की संस्थाओं की इस अति के चलते ही आमरण अनशन करना पड़ रहा है जोकि कार्यपालिका की जवाबदेही पर प्रश्न भी उठता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की कमी को भी। यदि विधायक को आमरण अनशन करना पड़े तो यह लोकतंत्र की संस्थाओं की कमजोरी को उजागर करता है हालांकि यह विधायक का अधिकार है लेकिन यह अंतिम तरीका भी है। इसलिए शायद अति हुई है लेकिन फिर भी समाधान संवाद, पारदर्शिता, स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और न्यायिक निगरानी में निहित है, ताकि जनहित सर्वोच्च बना रहे। संविधान जनता और सरकार के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है और यदि जन प्रतिनिधि को आमरण अनशन जैसा अंतिम व कठोर कदम उठाने पड़े तो यह संकेत है कि कार्यपालिका अपने उत्तरदायित्व में कमजोर पड़ी है जिसका मतलब है कि केंद्र सरकार की संस्थाएं और नीतियां क्षेत्र में जन हित की उपेक्षा कर रही है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों ने इन निर्माण कंपनियों को जनता से भी बड़ा बना दिया है और साथ में संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया है और NH 70 New NH- 03 से जुड़ी लोकतंत्र की संस्थाओं को अपने दायित्व की याद दिलाने के लिए ही विधायक ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह कदम उठाया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं। किंतु यदि इनके निर्माण में अनियमितताएं, भ्रष्टाचार और जनहित की उपेक्षा हो, तो यह जनता के अधिकारों और संविधान के मूल्यों का हनन है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है। आम जनता जो इस सड़क से किसी भी माध्यम से गुजर रही है उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे है इसलिए माननीय उच्च न्यायालय को भी मामले की गंभीरता देखते हुए हस्तक्षेप करके कार्यपालिका को आवश्यक निर्देश देकर संविधान की रक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए।
सरकार को नेशनल हाइवे परियोजनाओं में Social Audit और थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग अनिवार्य करनी चाहिए। संबंधित सभी अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करना चाहिए। विधायक और पंचायत प्रतिनिधियों को निगरानी समिति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए जिसमें प्रभावित भी शामिल हो और कार्यों की निगरानी में भी इनकी भूमिका होनी चाहिए। पंचायतों को केवल साझी भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया के समय NOC लेने के लिए ही उपयोग नहीं किया जाए। डैशबोर्ड से निर्माण की गुणवत्ता, खर्च पर निगरानी की जानी चाहिए ताकि कितना धन आया गया इसका ब्यौरा पब्लिक डोमेन में हो क्योंकि यह जनता के टैक्स का पैसा है। प्रभावित जनता, प्रशासन और ठेकेदारों के बीच नियमित संवाद का आयोजन होना चाहिए जो सिर्फ कागजी न हो। शिकायत निवारण तंत्र मजबूत होना चाहिए जिसमें जन हित को प्राथमिकता मिले। सभी तरह के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सोशल ऑडिट और Citizen Charter लागू हो। नीतिगत असहमति को अनशन तक पहुंचने से पहले संस्थागत वार्ता द्वारा सुलझाया जाना चाहिए। विकास कार्यों की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं की समय सीमा पर भी प्रशासन, निर्माण कंपनियों के अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच लोकतांत्रिक संवाद हो और देरी या लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

11/08/2025
हिमाचल प्रदेश का वन विभाग, सभी NGO व अन्य संस्थाएं, सभी जन संगठन व दबाव समूह, महिला मंडल व युवक मंडल और वन अधिकार समितिय...
30/04/2025

हिमाचल प्रदेश का वन विभाग, सभी NGO व अन्य संस्थाएं, सभी जन संगठन व दबाव समूह, महिला मंडल व युवक मंडल और वन अधिकार समितियां सतर्क रहें और ऐसे लोगों पर करे उचित कार्यवाही करें व इनकी शिकायत करें।
पटवारी/कानूनगो या RFO/DFO कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाएं।
वन विभाग और पटवारी कानूनगो ऐसी शिकायतों का रेंज स्तर पर रिकॉर्ड रखें।
वन अधिकार कानून 2006 के मुताबिक 13 दिसंबर 2005 से पहले काबिज लोगों को ही मान्यता पट्टा मिलेगा। वह भी एफआरसी की ग्राम सभा से पारित होने के बाद।
इस तरह के नए अवैध कब्जे वन अधिकार कानून 2006 में मान्य नहीं होंगे बल्कि विभागीय कार्रवाई भी चलेगी और आपराधिक केस भी दर्ज हो सकते हैं।





सौ. मंडी केसरी (पंजाब केसरी)

'हिमाचल प्रदेश में पिछले कई वर्षों से वन अधिकार कानून 2006 को इसकी मूल भावना से लागू करवाने के लिए हमारी पूरी टीम का संघ...
29/04/2025

'हिमाचल प्रदेश में पिछले कई वर्षों से वन अधिकार कानून 2006 को इसकी मूल भावना से लागू करवाने के लिए हमारी पूरी टीम का संघर्ष रंग लाया है'

We further demand that it (previous controversial letter/order) should be rejected outright, because the Forest Departme...
17/04/2025

We further demand that it (previous controversial letter/order) should be rejected outright, because the Forest Department alone cannot issue any order related to FRA-2006.
It is a legal direction in FRA-2006 that the employees and officers of the Forest Department will have to work in accordance with the decisions of the Gram Sabha.

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Hamirpur
175101

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+919459187576

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