ज़ीहण हिमाचल प्रदेश राज्य का एक प्राचीन भारतीय गाँव है। यह धौलाधार घाटी के उत्तर-पूर्व में व्यास नदी के किनारे [समुद्र तल से 729 मीटर] की ऊंचाई पर स्थित है, जंगल नदी एकान्त और ऊंचाई जीहण को मनमोहक जगह में तवदील करती हैं। आधुनिक सभ्यता से अप्रभावित, ज़ीहण की अपनी जीवन शैली और सामाजिक संरचना है। लोग अपने रीति-रिवाजों का पालन करने में सख्त हैं। ज़ीहण के लोगों का आर्थिक स्रोत पशुधन अथवा उनके उत्पाद
हैं जिसमें खोया पेड़े बहुत मशहूर है। ज़ीहण विभिन्न वृत्तचित्रों का विषय रहा है, जिसमें ज़ीहण : एक हिमालयी गाँव का वैश्वीकरण शामिल है
ज़ीहण में ऊंचाई वाली चोटियां
1. रसोई दा रिड्डा
2.ककरोला बाबा
3.टीबा
यहां से नैना देवी मंदिर ,काठगढ़ मंदिर, कांगड़ा किला आशापुरी सुजानपुर टीरा महल,अबादेवी मंदिर नंगी आंख से देखे जा सकते हैं ।
ज़ीहण की ऐतिहासिक कहानियां
317 BC ज़ीहण शब्द का उद्गम ,पंजाब के महाराजा प्रषोतम काटोच [पोरस] ने अपनी रानी [ लच्छी ] के लिऐ भव्य महल इच्छा जताई थी। जिसके अंर्तगत ज़ीहण के नौण का निर्माण हुआ था।
कहा जाता है कि सिकंदर के भारत आक्रमण से पंजाब की शक्ति छीनभीन हो गई और राजमहल का कार्य अधूरा छूट गया था
1562 अकबर की पत्नी बीबी दौलत शाद की अटारी पे इक कबूतर हर रोज़ देखा जाता बादशाह को शक हुआ की ये कोई संदेश वाहक कबूतर है। इसलिए अकबर ने अपनी फोजो से पीछा करवाया तो वह कबूतर धौलासिद्ध मंदिर के सामने पहाड़ की कंदर में छुप गया । जिसके चलते ईलाका वासियों को कुछ जांच परेशानियों से गुजरना पड़ा था।
ज़ीहण के किस्से कहानियां आए दिन चर्चा में चलते ही रहते, कभी समय लगे जीवन में तो ,धरा पर जन्नत [ज़ीहण] देखकर आयो जी......
धन्यवाद �