10/04/2026
उक्रांद UKD जागो उत्तराखंड Kamal Joshi Santosh Bhandari Uttarakhand Student Federation - USF Uttarakhand
ये क्या हो गया है ukd को ख़ुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी, वो भी चुनाव के समय
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बड़ी खबर: उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की बड़ी कार्रवाई, युवा प्रकोष्ठ के प्रभारी कमल जोशी 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति और सोशल मीडिया गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोपों में अपने युवा प्रकोष्ठ के पूर्व प्रभारी **कमल जोशी** को प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है।
कमल जोशी, जो हल्द्वानी की चर्चित ब्लॉगर ज्योति अधिकारी के पक्ष में मुखर रहने के लिए जाने जाते हैं, उन पर पार्टी ने डिजिटल संपत्तियों पर "अवैध कब्जे" का भी आरोप लगाया है।
क्यों हुई कार्रवाई? (मुख्य कारण)
पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, निष्कासन के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण बताए गए हैं:
अनुशासनहीनता:पार्टी का आरोप है कि कमल जोशी दल के नाम का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए कर रहे थे। इस संबंध में नैनीताल जिला अध्यक्ष और छात्र संगठन द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
डिजिटल अकाउंट्स पर कब्ज़ा: दल का आरोप है कि कमल जोशी ने पार्टी के आधिकारिक फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (Twitter) हैंडल को अनधिकृत रूप से अपने नियंत्रण में रखा हुआ है। बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्होंने ये अकाउंट्स आईटी प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष अतुल जैन को नहीं सौंपे।
धोखाधड़ी और टालमटोल: पत्र में उल्लेख है कि जोशी ने बार-बार समय मांगने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया और अंततः अकाउंट्स हैंडओवर करने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसे पार्टी ने गंभीर अनुशासनहीनता माना है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष राकेश सेमवाल द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में कमल जोशी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि:
1. वे भविष्य में पार्टी के नाम, चिन्ह या पहचान का उपयोग न करें।
2. अगले 7 दिनों के भीतर सभी डिजिटल अकाउंट्स के पासवर्ड पार्टी को सौंप दें।
"यदि निर्धारित समय में अकाउंट्स वापस नहीं किए गए, तो पार्टी कमल जोशी के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए बाध्य होगी यह चेतावनी राकेश सेमवाल, अध्यक्ष केंद्रीय अनुशासन समिति द्वारा दी गयी है ।
कमल जोशी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और अक्सर विवादों में घिरी रहने वाली ब्लॉगर ज्योति अधिकारी के समर्थन में खड़े नजर आते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी की छवि को लेकर आलाकमान काफी समय से उन पर नजर रख रहा था, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई है।