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दिनांक 10 सितंबर 2026 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केंद्र रानीखेत की सहायक क्षेत्रीय निदेशक (ARD) श्रीमती...
11/09/2026

दिनांक 10 सितंबर 2026 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केंद्र रानीखेत की सहायक क्षेत्रीय निदेशक (ARD) श्रीमती रुचि आर्या एवं कार्यालय सहायक श्री उमाशंकर नेगी द्वारा नैनी गाँव स्थित House of Umang Community Owned Enterprises में विश्वविद्यालय के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में संस्था के कर्मचारियों तथा गाँव के कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सहभागिता की गई। इस अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न रोजगारपरक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उन्हें बताया गया कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से वे अपने रोजगार/कार्य के साथ-साथ अपनी उच्च शिक्षा भी जारी रखते हुए अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं।

प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की अध्ययन सुविधा, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तथा उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों ने विश्वविद्यालय की इस पहल को उपयोगी एवं रोजगारोन्मुखी पहल बताते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की तथा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में रुचि दिखाई।

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण एवं स्थानीय क्षेत्र के लोगों तक उच्च शिक्षा तथा रोजगारपरक शिक्षा के अवसरों की जानकारी पहुँचाना एवं अधिक से अधिक लोगों को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से जुड़ने के लिए प्रेरित करना रहा।

सक्रिय पहल से आशा का सृजन: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर मनोवैज्ञानिक कार्यशाला का आ...
11/09/2026

सक्रिय पहल से आशा का सृजन: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर मनोवैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय एवं एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी के मनोविज्ञान विभाग एवं एंटी ड्रग सेल के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में ‘सक्रिय पहल से आशा का सृजन’ विषय पर एक दिवसीय मनोवैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन 11 सितम्बर 2026 को उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के सी.डी.एस. जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, आत्महत्या की रोकथाम के लिए सामुदायिक एवं व्यक्तिगत स्तर पर सक्रिय पहल को प्रोत्साहित करना तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था।

कार्यक्रम का शुभारम्भ समाज विज्ञान विद्याशाखा की निदेशक प्रो. रेणु प्रकाश के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या निवारण की दिशा में समाज विज्ञान विद्याशाखा द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं प्रयासों की जानकारी भी साझा की।

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीता ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते एकाकीपन की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति अनेक प्रकार के सामाजिक एवं भावनात्मक दबावों से गुजर रहा है। नकारात्मक भावनाओं को भीतर दबाकर रखने के बजाय उन्हें समझना और समय रहते व्यक्त करना आवश्यक है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान में परिवार एवं मित्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय पर किया गया हस्तक्षेप किसी व्यक्ति को कठिन परिस्थिति से बाहर आने में सहायता कर सकता है।

निदेशक अकादमिक, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, प्रो. पी.डी. पंत ने कार्यशाला के विषय को विस्तार देते हुए कहा कि जीवन अत्यंत मूल्यवान है और कोई भी समस्या जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। उन्होंने समाज में एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एन.एस. बैंकोटी, प्राचार्य, एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी ने आत्महत्या एवं मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय, विशेषकर विद्यार्थियों के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक विषय बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में समझ विकसित करना आवश्यक है तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कलंक या सामाजिक वर्जना के रूप में देखने के बजाय संवेदनशीलता एवं स्वीकार्यता के साथ समझने की आवश्यकता है।

मुख्य वक्ता डॉ. युवराज पंत, मनोवैज्ञानिक, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी ने मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट का प्रभाव व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को भी स्वास्थ्य एवं जीवन की प्राथमिकताओं में समान स्थान दिया जाना चाहिए।

उप-वक्ता डॉ. तनुश्री गौर, सहायक प्राध्यापक, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता तक पहुंचाने में समुदाय एवं समाज की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज के लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को उचित सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने दयालुता एवं संवेदनशील व्यवहार को मानसिक स्वास्थ्य सहायता का महत्वपूर्ण आधार बताया। डॉ. गौर ने प्रतिभागियों को पाँच चरणों पर आधारित एक व्यावहारिक आकलन प्रक्रिया से अवगत कराया, जिसके माध्यम से ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है जिन्हें हस्तक्षेप एवं सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने आत्महत्या निवारण एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टेली-मानस जैसी हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी साझा की।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी ने मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निरंतर संवाद एवं जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में व्यक्ति पहले की अपेक्षा अधिक एकाकी होता जा रहा है। ऐसे में करीबी मित्रों एवं परिवार के सदस्यों के साथ अपने विचारों एवं भावनाओं को साझा करना और नियमित रूप से संवाद बनाए रखना आवश्यक है।

कार्यशाला के दौरान एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी की युवा टीम द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से आत्महत्या को बढ़ावा देने वाले सामाजिक व्यवहार एवं दृष्टिकोणों पर प्रश्न उठाए तथा आत्महत्या निवारण में सामाजिक मनोविज्ञान एवं सामुदायिक सहयोग की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नुक्कड़ नाटक ने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया।

कार्यशाला में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विषय के शोधार्थी द्वारा भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों की सहायता के लिए व्यावहारिक सुझाव साझा किए गए। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिनका वितरण प्रो. पी.डी. पंत द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण कर्नाटक, एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यशाला का संयोजन डॉ. भाग्यश्री जोशी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं एम.बी.पी.जी. कॉलेज के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला ने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने, आत्महत्या निवारण के लिए समय रहते सक्रिय पहल करने तथा समाज में संवेदनशील, सहायक एवं संवादपरक वातावरण विकसित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

आज उत्तराखंड संस्कृत संस्थानं अध्ययन केंद्र का निरीक्षण किया एवम प्रवेश बढ़ाबे के संदर्भ में समन्वयक डॉ.हरीश गुरुरानी जी ...
11/09/2026

आज उत्तराखंड संस्कृत संस्थानं अध्ययन केंद्र का निरीक्षण किया एवम प्रवेश बढ़ाबे के संदर्भ में समन्वयक डॉ.हरीश गुरुरानी जी व कार्यालय सहयस्क से वार्ता हुई।साथ ही लंबित समायोजन के बारे में भी चर्चा हुई एवम आवश्यक मार्गदर्शन भी किया।
एमओयू की प्रक्रिया के आवश्यक पत्रजात भी तैयार कराए गए तथा प्रचार हेतु बोर्ड एवम होर्डिंग के संबंध में भी वार्ता हुई।

हिमालय केवल पर्वत नहीं, पारिस्थितिकी तंत्र और जीवन का आधारउत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में हिमालय दिवस के अवसर पर हिमाल...
09/09/2026

हिमालय केवल पर्वत नहीं, पारिस्थितिकी तंत्र और जीवन का आधार
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में हिमालय दिवस के अवसर पर हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालय क्षेत्र के पारिस्थितिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के संरक्षण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में NASI के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसएस सामंत ने मुख्य वक्ता के रूप में हिमालय के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखलाएं नहीं हैं, बल्कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र, नदियों, जैव विविधता और पर्वतीय समुदायों के जीवन का आधार हैं। जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता में कमी और बढ़ता पर्यावरणीय क्षरण हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। डॉ. सामंत ने कहा कि हिमालय को सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन और प्रकृति आधारित समाधान अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी से मिलकर हिमालय को स्वस्थ, लचीला और टिकाऊ बनाए रखने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम संयोजक, प्रो. पी.डी. पंत, यूओयू, हल्द्वानी ने अपने स्वागत भाषण में सभी विशिष्ट अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन किया। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की नाजुक स्थिति पर प्रकाश डाला और विस्तार से बताया कि कैसे हिमनदों का पीछे हटना, वनों की कटाई, अनियंत्रित पर्यटन और जलवायु परिवर्तन ने बाढ़, भूस्खलन और जैव विविधता के नुकसान ने जोखिम को बढ़ा दिया है।
प्रो. कमल देवलाल (कार्यक्रम सह-संयोजक) ने कार्यक्रम का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया । उन्होंने कार्यक्रम मे हिमालय के महत्व को एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के रूप में रेखांकित किया, जिसके लिए तत्काल संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता है।
प्रो. गिरिजा पांडे ने अध्यक्षीय भाषण दिया और हिमालयी क्षेत्र के पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा, जैव विविधता संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए सतत विकास सुनिश्चित करने की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. खेमराज भट्ट, रजिस्ट्रार, यूओयू, हल्द्वानी द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम मे डॉ. हरीश जोशी, डॉ. बीना तिवारी फुलारा, डॉ. प्रीति पंत, डॉ. कीर्तिका पडलिया, डॉ. पूजा जुयाल सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवम कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

09/09/2026
जन संवाद कार्यक्रम | श्रृंखला भाग–2उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शोधार्थियों ...
09/09/2026

जन संवाद कार्यक्रम | श्रृंखला भाग–2
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं आमजन से सीधे संवाद के लिए जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
18 सितंबर 2026
प्रातः 11:00 बजे
Zoom Platform
अपनी बात रखें, सवाल पूछें और सुझाव दें।
पंजीकरण के लिए पोस्टर में दिए QR Code को स्कैन करें।
https://forms.gle/yMcZgDVQUREe8xwn6
“शिक्षा, अवसर और विश्वास – मिलकर करें उत्कृष्ट विश्वविद्यालय का निर्माण”
#जनसंवाद

यूओयू में एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) कार्यक्रम शुरूसाभार दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, अमर उजाला, उत्तर उजाला
08/09/2026

यूओयू में एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) कार्यक्रम शुरू

साभार दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, अमर उजाला, उत्तर उजाला

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आठ दिवसीय अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का ऑनलाइन शुभारंभउत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यू...
07/09/2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आठ दिवसीय अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का ऑनलाइन शुभारंभ

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा), नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन ई पी) अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आठ दिवसीय ऑनलाइन उद्घाटन सत्र सोमवार को प्रारंभ हुआ। 7 से 15 सितंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 180 शिक्षक, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद् प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 14 अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के बीच निरंतर संवाद, चिंतन और अनुभव-साझाकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस प्रकार के अकादमिक उपक्रमों के माध्यम से उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर नीपा की कुलपति प्रो. शशिकला वंजारी का वीडियो संदेश भी प्रतिभागियों के लिए प्रसारित किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की शैक्षणिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए एनईपी 2020 की दृष्टि को संस्थागत व्यवहार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में प्रो. अमित गौतम, निदेशक, यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र नीपा ; प्रो. प्रदीप कुमार मिश्रा, बैच निदेशक,नीपा; तथा डॉ. सुमन नेगी, बैच समन्वयक एवं एसोसिएट प्रोफेसर, नीपा की सहभागिता रही। इस अवसर पर यूओयू के अकादमिक निदेशक प्रो. पी. डी. पंत भी उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र के अंत में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय-हल्द्वानी की शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक एवं इस कार्यक्रम के स्थानीय समन्वयक प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण ने आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, समन्वयकों एवं प्रतिभागियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा आगामी आठ दिनों के अकादमिक संवाद को सार्थक एवं ज्ञानवर्धक बनाने की शुभकामनाएं दीं।

07/09/2026

📚 ‘मुक्त ज्ञान कोष’ का लोकार्पण कार्यक्रम 📚

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में ‘मुक्त ज्ञान कोष’ के लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने अपने संबोधन में मुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण ज्ञान को विद्यार्थियों और शिक्षार्थियों तक पहुँचाने की दिशा में इस पहल के महत्व पर प्रकाश डाला।

🎓 मुक्त ज्ञान कोष—ज्ञान को सबके लिए सुलभ बनाने की एक सार्थक पहल।

#मुक्तज्ञानकोष #ज्ञानकोष #कुलपति

सहायक क्षेत्रीय निदेशक रुड़की डॉ.बृजेश बनकोटी ने आज अध्ययन केंद्र एच ई सी ग्रुप ऑफ इंस्टीटूट लक्सर रोड हरिद्वार का निरीक्...
07/09/2026

सहायक क्षेत्रीय निदेशक रुड़की डॉ.बृजेश बनकोटी ने आज अध्ययन केंद्र एच ई सी ग्रुप ऑफ इंस्टीटूट लक्सर रोड हरिद्वार का निरीक्षण किया तथा संस्था के अध्यक्ष संदीप चौधरी जी से भेट कर प्रवेश बढ़ाने के संदर्भ में चर्चा की।उसके बाद छात्रों के मध्य सत्र जुलाई 2026 में प्रवेश एवम पाठ्यक्रमो के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी 21 सितंबर तक अपना प्रवेश सुनिश्चित करा लें।छात्रों में यूओयू के प्रति उत्साह देखने को मिला।इन अवसर पर समन्वयक श्री तारा सिंह जी भी उपस्थित रहे।

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